संपादकीय

समाज के बिना मानव का पूर्ण रूप से विकास होना सम्भव ही नहीं

समाज के बिना मानव का पूर्ण रूप से विकास होना सम्भव ही नहीं मानव एक सामाजिक प्राणी है । ‘प्राणी’ इस जगत का सर्वाधिक विकसित जीव है ओर इस समाज के बिना उसका रहना कठिन ही नहीं असंभव है । माता-पिता, भाई-बहन, रिश्‍तेदारों आदि लोगों को मिलाकर ही इस समाज की रचना होती है । […]

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तीन तलाक: फैसला संविधान पीठ करेगी

तीन तलाक: फैसला संविधान पीठ करेगी हमारे समाज में एक सोच बहुत ज्यादा प्रभावशाली है और वो है बिना सोचे-समझे किसी प्रथा को जन्म दे देना। संपूर्ण ज्ञान ना होते हुए भी लोग परम्पराओं को मान देने लगते हैं फिर चाहे वे किसी अन्य के लिए दुखदायी ही क्यों ना हो। कुछ इसी प्रकार की […]

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तमाशा बनते ‘फतवे व ‘फतवेबाज

फतवा इस्लाम धर्म से जुड़ी एक ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें इस्लाम धर्म का ज्ञान रखने वाले शिक्षित लोगों की एक समिति अथवा धार्मिक मामलों के जानकार यानी मुफ्ती द्वारा अपने अनुयाईयों को दिशा निर्देश जारी किया जाता है। आमतौर पर फतवा लेने या देने की स्थिति उस समय पैदा होती है जब […]

संपादकीय

आम बजट 2017 या भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध का शंखनाद!

आम बजट 2017 या भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध का शंखनाद! आठ नवम्बर 2016 की रात्रि 8 बजे प्रधान मंत्री द्वारा देश की 86 प्रतिशत मुद्रा के एक झटके में विमुद्रीकरण (500 व 1000 के नोट बंदी) की घोषणा के बाद अब केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरूण जेटली ने भी संसद में […]

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भोजपुरी को मान्यता मिले तो हिंदी का नुकसान नहीं

भोजपुरी को मान्यता मिले तो हिंदी का नुकसान नहीं जिस भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की वकालत भारतेंदु हरिश्चंद्र से लेकर आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, राहुल सांकृत्यायन, विष्णुराव पडारकर, शिव प्रसाद गुप्त आदि तक ने की, वही भोजपुरी भाषा जब आज संवैधानिक मान्यता पाने के निकट आकर खड़ी है तो हिंदी के […]

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राजनीति में स्वच्छता अभियान चलाने का शुभ अवसर

राजनीति में स्वच्छता अभियान चलाने का शुभ अवसर भारतीय गणतंत्र के कई प्रमुख राज्य अगले कुछ दिनों में विधानसभा के आम चुनावों से रूबरू होने जा रहे हैं। इन राज्यों में जहां उत्तरप्रदेश जैसा देश का सबसे बड़ा राज्य विधानसभा चुनाव का सामना करने जा रहा है वहीं मणिपुर व गोआ जैसे छोटे राज्यों व […]

संपादकीय

यह हैं असली नायिकाएँ

यह हैं असली नायिकाएँ भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है। इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया जाता है। भारतीय इतिहास में कुछ औरतें आज भी वीरता और सतीत्व की मिसाल हैं जैसे […]

संपादकीय

अमेरिका न पढ़ाए सहिष्णुता का पाठ

अमेरिका न पढ़ाए सहिष्णुता का पाठ 20 जनवरी 2017 का दिन न केवल अमेरिकी इतिहास के लिए, बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है। यह दिन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रुप में शपथ लेने का दिन है। ट्रंप के शपथ समारोह से पूर्व, अलग-अलग अमेरिकी संस्थाओं की दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट प्रकाश में […]

संपादकीय

इस्लामिक आतंकवाद पर टंप कार्ड

अमेरीकी राष्ट्रपति डोड्डनाल्ट टंऊप की जीत के बाद यह साफ हो गया था कि इस्लामिक आतंकवाद पर उनका नजरिया बेहद सख्त है। संभवत: उनकी जीत के पीछे यह सबसे बड़ा छुपा राज था, जिसे हिलेरी और उनके समर्थक नहीं पढ़ पाए। राष्ट्रपति पद की कमान संभालने के बाद से ही उन्होंने आतंकवाद पर कड़ा रुख […]

संपादकीय

हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक अशफाक उल्लाह खान की कहानी और काकोरी काण्ड में उनका योगदान

हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक अशफाक उल्लाह खान की कहानी और काकोरी काण्ड में उनका योगदान नई दिल्ली अशफाख उल्ला खां भारत के दिल अजीज स्वतंत्र-सेनानी थे जिन्होनें काकोरी काण्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। ब्रिटिश शासन ने उनके ऊपर मुकदमा चलाया और 19 दिसम्बर सन् 1927 को उन्हें फैजाबाद जेल में फांसी पर लटका कर […]