संपादकीय समाचार

मेट्रो के बढ़े किराये और दिल्ली सरकार के ड्रामे के खिलाफ स्वराज इंडिया का मेट्रो स्टेशनों पर प्रदर्शन

मेट्रो के बढ़े किराये और दिल्ली सरकार के ड्रामे के खिलाफ स्वराज इंडिया का मेट्रो स्टेशनों पर प्रदर्शन नई दिल्ली (अजमिल)। झूठा ड्रामा बंद करो, बढ़ा किराया वापस लो। इस मांग के साथ स्वराज इंडिया के वॉलंटियर्स ने दिल्ली के विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर शुक्रवार को ज़ोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कीर्ति नगर, सीलमपुर, […]

संपादकीय

मां का महत्व भूल रहे हैं युवा वर्ग

मां का महत्व भूल रहे हैं युवा वर्ग ‘ मां शब्द एक ऐसा शब्द हैं जिसको आज तक कोइ परिभाषित नहीं कर पाया। यह शब्द अपने आप में इतना महान है कि इसके अर्थ को समझ पाना बहुत मुश्किल हैं फिर भी हम अक्सर इस शब्द के महत्व को भूल जाते हैं । मां का […]

संपादकीय

नारी का उत्थान: कन्या भ्रुण हत्या की जिम्मेदार औरतें

नारी का उत्थान: कन्या भ्रुण हत्या की जिम्मेदार औरतें आज समाज में नारी का महत्तवपुर्ण स्थान है , लेकिन जो उसे मिलना चाहिए, क्या समाज में उसी अवस्था में मिल रहा है । नही आज भी नारी काफी हद तक पिछडी हुई है । कहने को तो आज महिलाएं – पुरूषों  के साथ कंधा मिलाकर […]

संपादकीय

जनता के प्रति पुलिस का व्यवहार एंव कर्तव्य

पुलिस सेवा एक ऐसी सेवा प्रदान करती है । जिससे जिन्दगी को काफी नजदीकी से देखा जा सकता है । जीवन के हर पहलू का अनुभवों के माध्यम से सभी रसो का आस्वादन किया जा सकता है । प्रेम करूणा, वात्सलय, क्रुरता, निर्दयता  आदि सभी भावनाएं देखने को मिलती हैं । दुसरे षब्दों में पुलिस […]

संपादकीय

न हो पर्यावरण की अनदेखी

पर्यावरण को विकृत व दूषित करने वाली समस्त स्थितियों तथा कारणों के लिए हम मानव उत्तरदायी हैं। हताशा बढ़ती जनसंख्या की आवास तथा बेकारी की समस्या को दूर करने के लिए जंगलों, हरे-भरे खेतों, बाग, बगीचों को काटा जा रहा है। नगरों महानगरों में गंदगी का ढेर बन गया है। बड़े-बड़े कल-कारखानों की चिमनियों से […]

संपादकीय

लाल आतंक का खूनी खेल

नक्सलियों द्वारा किए गए एक बड़े हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश के नीति-नियंता नक्सलवाद की समस्या की गंभीरता को नजरअंदाज करते रहे हैं। गौरतलब है कि सोमवार की दोपहर में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने घात लगाकर सीआरपीएफ की टीम पर हमला बोल दिया, जिसमें 26 […]

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समाज के बिना मानव का पूर्ण रूप से विकास होना सम्भव ही नहीं

समाज के बिना मानव का पूर्ण रूप से विकास होना सम्भव ही नहीं मानव एक सामाजिक प्राणी है । ‘प्राणी’ इस जगत का सर्वाधिक विकसित जीव है ओर इस समाज के बिना उसका रहना कठिन ही नहीं असंभव है । माता-पिता, भाई-बहन, रिश्‍तेदारों आदि लोगों को मिलाकर ही इस समाज की रचना होती है । […]

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तीन तलाक: फैसला संविधान पीठ करेगी

तीन तलाक: फैसला संविधान पीठ करेगी हमारे समाज में एक सोच बहुत ज्यादा प्रभावशाली है और वो है बिना सोचे-समझे किसी प्रथा को जन्म दे देना। संपूर्ण ज्ञान ना होते हुए भी लोग परम्पराओं को मान देने लगते हैं फिर चाहे वे किसी अन्य के लिए दुखदायी ही क्यों ना हो। कुछ इसी प्रकार की […]

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तमाशा बनते ‘फतवे व ‘फतवेबाज

फतवा इस्लाम धर्म से जुड़ी एक ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें इस्लाम धर्म का ज्ञान रखने वाले शिक्षित लोगों की एक समिति अथवा धार्मिक मामलों के जानकार यानी मुफ्ती द्वारा अपने अनुयाईयों को दिशा निर्देश जारी किया जाता है। आमतौर पर फतवा लेने या देने की स्थिति उस समय पैदा होती है जब […]

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आम बजट 2017 या भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध का शंखनाद!

आम बजट 2017 या भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध का शंखनाद! आठ नवम्बर 2016 की रात्रि 8 बजे प्रधान मंत्री द्वारा देश की 86 प्रतिशत मुद्रा के एक झटके में विमुद्रीकरण (500 व 1000 के नोट बंदी) की घोषणा के बाद अब केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरूण जेटली ने भी संसद में […]