समाचार

नोएडा में गिरफ्तार संदिग्धों को नक्सली नहीं रही बिहार पुलिस

लखनऊ। दोन दिन पूर्व नोएडा में गिरफ्तार बिहार के चार कथित नक्सलियों को बिहार बिहार पुलिस ने नक्सली मानने से इंकार कर दिया है। पुलिस उन्हें विभिन्न आपराधिक मामलों में संदिग्ध मानकर सूबे में उनके लिंक तलाशने की कोशिश में जुट गई है। बिहार पुलिस का कहना है कि केवल बयान के आधार पर किसी को नक्सली नहीं ठहराया जा सकता है।
आप को बता दें कि उत्तर प्रदेश (यूपी) पुलिस ने नोएडा से बिहार के गिरफ्तार सभी संदिग्धों को नक्सली बताकर उनकी पहचान के लिए बिहार पुलिस से संपर्क किया था। इसके बाद की पड़ताल के बाद बिहार पुलिस ने यह सूचना यूपी पुलिस को दी है।
बिहार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यूपी पुलिस जिन्हें नक्सली कह रही है, उनमें से दो का सूबे में कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। सिर्फ रोहतास जिले के कृष्णा कुमार राम एवं सुनील कुमार यादव के खिलाफ मामले दर्ज हैं। इनमें सुनील यादव के खिलाफ मारपीट जैसी मामूली आपराधिक धाराओं में मुकदमे हैं।
बिहार पुलिस के अनुसार कृष्णा कुमार के खिलाफ भी वर्तमान में नक्सलियों से लिंक की कोई सूचना नहीं है। 2005 के पहले वह सीपीआइ (माओवादी) से जुड़ा हुआ था, लेकिन उसके बाद वह तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) का सदस्य बन गया। बिहार पुलिस के मुताबिक झारखंड में सक्रिय टीपीसी लूटपाट, अपहरण एवं फिरौती के धंधे में जुटी है। इसे नक्सलवादी विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है।
बिहार पुलिस ने मधुबनी जिले के पवन कुमार झा एवं बक्सर जिले के शैलेन्द्र कुमार को नक्सली गतिविधियों से क्लीनचिट दे दी है। दोनों के खिलाफ सूबे में किसी तरह का आपराधिक रिकार्ड नहीं है। हालांकि, पुलिस का मानना है कि उक्त दोनों अपराधी नोएडा में लूटपाट एवं अपहरण जैसी वारदात में सक्रिय हो सकते हैं, लेकिन इस आधार पर उन्हें नक्सली नहीं कहा जा सकता है।
बिहार पुलिस के आईजी ऑपरेशन कुंदन कृष्णन बताते हैं कि नोएडा में गिरफ्तार लोगों को बिहार पुलिस नक्सली नहीं मानती है। बैंक लूट, अपहरण व फिरौती जैसी वारदात करने वालों को नक्सली नहीं कहा जा सकता। किसी को नक्सली बताने से पहले नक्सलवाद को समझना जरूरी हो जाता है।
कुंदन कृष्णन कहते हैं कि नक्सलवाद एक विचारधारा है, जो 1957 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुई थी। चारू मजूमदार एवं अन्य ने इस विचारधारा को पूरे देश में फैलाया। लोग प्रभावित होकर उससे जुडने भी लगे, लेकिन अब ऐसी कोई बात नहीं।
बिहार पुलिस के अनुसार
ये हैं संदिग्धों के आपराधिक रिकार्ड
 कृष्णा कुमार राम
गरीबी में दिन गुजार रहा 48 वर्ष का कृष्णा दुर्गावती जलाशय योजना में गार्ड का काम करता है। दो बार जेल जा चुका है। 2005 से पहले सीपीआई माओवादी से जुड़ा हुआ था। बाद में लेवी वसूली के लिए टीपीसी से जुड़ गया। पिता गांव में दुकान चलाते हैं। मां की याद में गांव में मंदिर बनाने की बात करता था। वह हफ्तेभर पहले दिल्ली गया था।
सुनील कुमार यादव
कृष्णा के ही गांव का निवासी सुनील करीब चार साल पहले पढऩे के लिए दिल्ली गया था। उसके खिलाफ सूबे में कोई नक्सली वारदात में शामिल होने का आरोप नहीं है, लेकिन छोटे-मोटे अपराध में मुकदमे दर्ज हैं। सुनील ने अपने गांव वालों से कह रखा था कि दिल्ली में उसकी नौकरी हो गई। पिता जमीन के छोटे कारोबारी हैं। उन्होंने एक मकान भी बनवाया है।
 पवन कुमार झा
25 वर्ष के पवन के सात सदस्यों वाला परिवार मधुबनी जिले के रुद्रपुर में एक कमरे के मकान में रहता है। उसके पिता भैंस-गाय पालकर परिवार का गुजारा करते हैं। मधुबनी से बीए करने के बाद पवन सिलीगुड़ी चला गया था। दो वर्षों से वह नोएडा में रह रहा है। पवन ने गांव वालों को बता रखा था कि नोएडा में कोचिंग संस्थान चलाता है। अपराध का कोई रिकार्ड नहीं।
 शैलेंद्र कुमार
सेवानिवृत पुलिस इंस्पेक्टर हीरामन राम के पुत्र शैलेंद्र के खिलाफ भी बिहार में किसी तरह के आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं हैं। बेरोजगार शैलेंद्र के दो बच्चे हैं, जो निजी स्कूल में पढ़ते हैं। बक्सर के चीनी मिल मोहल्ले में पिता के बनाए मकान के किराए से परिवार का गुजारा होता है। शैलेंद्र दो दिन पहले ही दिल्ली गया था। कहा जा रहा है कि कृष्णा ने ही इसे बुलाया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *