समाचार स्वास्थ्य

18वां विश्व वेट्रिनरी डे पर पशुओं की स्थितियों पर हुई चर्चा

 

नई दिल्ली। दुनिया भर के पशुचिकत्सकों ने यहां 18वां विश्व वेट्रिनरी डे मनाया। इस में विदेशी मेहमानों समेत करीब 300 पशु चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। इन लोगों ने देश में पशु चिकित्सकों के अनुभवों और दृष्टि की जानकारी दी।इनमें वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ (ओआईई) के प्रतिनिधि भीशामिल थे। इनमें कई लोग 80 साल से भी ज्यादा के थे और पूरे आयोजनतथा सभी गतिविधियों में उत्सुकता से हिस्सा लिया।ओआईई पीवीएस टीम कई संगठनों / संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से चर्चाकरती रही है और पशुचिकित्सा पेशेवरों के साथ काम करती है। इनमें पशुफार्म, चारा मिल, पशु वधशाला, सीमा पर चेक पोस्ट आदि शामिल हैं।मूल्यांकन करने वाली पीवीएस टीम को खुशी है कि भारतीय आबादी पशुओं के कल्याण को लेकर काफी चिन्तित है और भारत में पशु चिकित्साके क्षेत्र में अच्छा काम हो रहा है।वक्ताओं में एक सुश्री बबीता लोचब ने देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक-आर्थिक विकास में  पशुचिकित्सकों के योगदान के बारे मेंबताया। उन्होंने इस बात पर भी रोशनी डाली कि ग्रामीण भारत में जहां 15-20 प्रतिशत परिवार भूमिहीन हैं और करीब 80 प्रतिशत भूस्वामी छोटेऔर सीमांत किसान हैं, ऐसे में पशुपालन उनकी आय का मुख्य स्रोत है। इस तरह 25.6 प्रतिशत के कृषि जीडीपी में पशुओं से नेशनल जीडीपी  कायोगदान 4.11 प्रतिशत है। पशुपालन कृषि का अभिन्न भाग है और ग्रामीण भारत की दो तिहाई सेज्यादा आबादी को इससे सहायता मिलती है। आज के पशु चिकित्सकअकेले ऐसे चिकित्सक हैं जो पशुओं और लोगों दोनों के स्वास्थ्य की रक्षाके लिए शिक्षित हैं। ये लोग जानवरों की प्रत्येक प्रजाति केस्वास्थ्य औरकल्याण की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *