धर्मक्रम समाचार

रोजा न रखने वालों का हो सामाजिक बायकाट : मौलाना अशरफी

रोजा न रखने वालों का हो सामाजिक बायकाट : मौलाना अशरफी

कानपुर (मो.अकरम)। अल्लाह तआला कुराने पाक में इरशाद फरमाता है कि ऐ ईमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किये गये हैं जैसा कि पिछली उम्मतों पर ताकि तुम मुत्तकी और परहेजगार बन जाओ। मुत्तकी का अर्थ है कि तुम्हारे अन्दर अल्लाह का डर पैदा हो जाये।इस्लामी साल के 9वें महीने का नाम है रमजानुल मुबारक। इसी महीने के तीस रोजे हमारे ऊपर फर्ज किये गये हैं जो कोई व्यक्ति रमजानुल मुबारक का एक रोजा जानबूझ कर छोड़ता है तो वह व्यक्ति सख्त गुनाहगार है। उक्त विचार मदरसा अरबिया रज्जाकिया मदीनतुल उलूम के तत्वावधान में आयोजित जलसा-ए-इस्तकबाल रमजानुल मुबारक के जलसे को सम्बोधित करते हुए मदरसा मख्दूमिया सिराजुल उलूम जाजमऊ के प्रधानाचार्य मौलाना मुफ्ती मोहम्मद जकरिया अशरफी ने बासमण्डी ने व्यक्त किये।श्री अशरफी ने कहा कि जो लोग रमजानुल मुबारक का ऐहतराम नहीं करते है। रोजा नहीं रखते हैं खुले आम सड़कों पर पान मसाला खाते हुये घूमते नजर आते हैं। एैसे लोगों का सामाजिक बायकाट करना चाहिये। उनके घर वाले उन्हें रोजे के वक्त में खाना पानी न दें और न ही दुकानदार उन्हें खाने पीने की कोई चीज दे। रोजादार जब रोजे से होता है तो वह हर तरह की बुराइयों से खुद ब खुद रुक जाता है क्योंकि वह जानता है कि हम रोजा रखकर झूठ बोलेंगे, बुराई करेंगे गलत काम करेंगे तो हमारा कीमती रोजा बरबाद हो जायेगा। इसी डर को परहेजगारी कहते हैं।श्री अशरफी ने कहा कि मौसम चाहे कैसा भी हो रोजादार का इस पर कोई फरक नहीं पड़ता है क्योंकि रोजदार तो यह जानता है कि रोजे रखने से मेरा अल्लाह हमसे राजी हो जायेगा अगर यही ख्याल हमारे अन्दर पूरा साल पैदा हो जाये तो हमसे पूरी जिन्दगी कोई गुनाह ही न हुआ करे।श्री अशरफी ने कहा कि रमजान के आने से पहले पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा और आपके सहाबा इतनी खुषी करते थे जेसे कि उनके पास बहुत अहम और कीमती मेहमान आना वाला हो और रमजानुल मुबारक के आने पर इतना अफसोस करते थे कि बहुत कीमती मेहमान हमको छोड़कर जाने वाला है। रमजानुल मुबारक की आमद पर खुषी करना कोई  नई बात नहीं है बलिक आज से 1400 साल पहले से यह सिलसिला जारी है और कयामत तक जारी रहेगा।श्री अशरफी ने कहा कि जब रोजेदार रोजा खोलने के वक्त दस्तरख्वान पर बैठता है तो वह जो भी दुआ जायज मांगता है तो अल्लाह तआला उस दुआ को कुबूल फरमाता है। मुसलमानों खुश हो जाओ और अपनी किस्मत पर नाज करो वह वक्त जल्दी आने वाला है जिस वक्त हम अपने रब से जो जो चाहेंगे हमें हमारा रब हमें अता (देगा) करेगा।हजरत मौलाना मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही ने कहा कि आप क्या समझते हैं कि रमजानुल मुबारक में शैतानों को जंजीरों में जकड दिया जाता है यह कोई छोटी बात है, हरगिज ऐसा नहीं है क्योंकि जब शैतानों को जंजीरों में जकड़ दिया जाये तो हमें नेक काम करने से कोई बहका नहीं सकता है हम जितनी नेकी करना चाहें दिल खोलकर नेकी करें।रमजानुल मुबारक में जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते हैं। इसका मतलब यह है कि राजेदार जिस दरवाजे से चाहे जन्नत में दाखिल हो जाये और जहन्नम के दरवाजे बन्द कर दिये जाते हैं। इसलिये रोजादार जहन्नुम में नहीं जायेंगे। क्योंकि रोजादार रोजा रखकर अपने गुनाहों को जलाकर बिल्कुल साफ सुथरा हो जाता है।इससे पूर्व जलसे की शुरूआत तिलावते कुराने पाक से हाफिज मोहम्मद शहनवाज ने की और बारगाहे रिसालत में मौलाना जान मोहम्मद, हाफिज शाहिद जमाल मो. असद ने नात शरीफ का नजराना पेश किया।जलसे की अध्यक्षता मौलाना सैयद मो. अकमल अशरफी व संचालन माजूर कानपुरी ने किया।जलसे में प्रमुख रूप से आल इंडिया गरीब नवाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता मो. शाह आजम बरकाती, हाफिज अब्दुल रहीम बहराइची हाजी महमूद आलम अंसारी, हाजी मो. ताहिर, आसिफ रईस, परवेज आलम गुड्डू, मो. नसीम अंसारी, मो. तालिब, मो. इमरान, मो. सलीम अंसारी, मो. अशरफी, मो. असलम सिद्दीकी, हाफिज गुलाम जिलानी, मो. मुश्तकीम, अब्दुल कलाम, मो. कैफ, हाफिज नेमतउल्ला, फिरोज अहमद अंसारी, हाजी निजामुद्दीन, मो. साबिर खां, हाफिज इमरान आलम, हाफिज नाजिम अनवर, हाफिज मो. तौसीफ, सुल्तान,, मो. सुहैल, सरताज आलम, गुलजार आलम. मो. अहमद, हाफिज मुख्तार आदि लोग उपस्थित थे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *