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‘हिन्दी महोत्सव’ का चौथा अध्याय और यूनाइटेड किंगडम के पहले अध्याय 2018 का उद्घाटन

‘हिन्दी महोत्सव’ का चौथा अध्याय और यूनाइटेड किंगडम के पहले अध्याय 2018 का उद्घाटन

ऑक्सफोर्ड | लन्दन | बर्मिंघम । (सुनित नरूला)

(पहला दिन : ऑक्सफोर्ड)। वाणी फॉउण्डेशन, यू.के. हिन्दी समिति, वातायन और कृति यू.के. द्वारा में यू.के. के संयुक्त तत्त्वावधान में तीन बड़े नगरों में भव्य हिन्दी महोत्सव सम्पन्न हुआ।

उत्सव का उद्घाटन दुनिया की अकादमिक मानी जाने वाली राजधानी ऑक्सफोर्ड शहर में ऑक्सफोर्ड बिज़नेस कॉलेज के आतिथ्य में आयोजित हुआ। ऑक्सफोर्ड बिज़नेस कॉलेज की प्रधानाचार्य श्रीमती जेरी ताकामुरा ने उत्सव के सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में हर वर्ष सैकड़ों भारतीय शब्दों के शामिल होने से भारतीय भाषाओं के विश्व में प्रचलित होने पर हर्ष व्यक्त किया। दिल्ली की चिन्मयी त्रिपाठी ने महादेवी वर्मा और अन्य भारतीय गीतकारों की रचनाओं की सुन्दर प्रस्तुति की। कार्यक्रम के उद्घाटन सम्बोधन में वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने  उत्सव के संयोजक डॉ. पद्मेश गुप्त ने पूरे उत्सव की रूपरेखा बताते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य के वैश्वीकरण में प्रवासी लेखकों का महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह महोत्सव हिन्दी भाषा, साहित्य और शिक्षण तथा भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से सम्पन्न हो रहा है।  इस महोत्सव के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हम भाषा और संस्कृति के विद्वानों और प्रतिष्ठित कलाकारों को हिन्दी के विद्यार्थियों और युवाओं से जोड़ें।  कुछ अकादमिक सत्रों में गम्भीर चर्चा होगी, कवि सम्मेलन और काव्य गोष्ठियों के द्वारा जनमानस तक साहित्य को पहुँचाया जायेगा, कुछ हिन्दी और संस्कृति की विभूतियों को सम्मानित किया जायेगा, पुस्तकों के विमोचन के साथ-साथ पुस्तक प्रदर्शनियों का आयोजन होगा,  हिन्दी शिक्षण और साधन जैसे विषयों में हिन्दी शिक्षक और विद्यार्थियों के विचारों पर मन्थन होगा और हिन्दी के छोटे -बड़े विद्यार्थियों के कवितापाठ के आयोजन होंगे। आयोजन के प्रवासी लेखन सत्र में फ़ीजी के अनिल शर्मा ‘जोशी’ की पुस्तक ‘प्रवासी लेखन:नयी ज़मीन नया आसमान’ का लोकार्पण हुआ जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ लेखिका श्रीमती नीलिमा डालमिया आधार ने की तथा दिव्या माथुर और शिखा वार्ष्णेय ने पुस्तक पर विचार रखे।

उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन करते हुए वाणी फॉउण्डेशन की मैनेजिंग ट्रस्टी अदिति माहेश्वरी-गोयल ने कहा कि ‘आज ऐसा लग रहा है कि ऑक्सफोर्ड में प्रवासी लेखन ग्रेजुएट हो गया है’।

आयोजन का दूसरा सत्र हिन्दी साहित्य और सिनेमा पर हुआ। सत्र की अध्यक्षता की लन्दन में साउथ एशियन सिनेमा के संस्थापक ललित मोहन जोशी ने और बातचीत की कुसुम अंसल, यतीन्द्र मिश्र तथा फ़िल्म निर्देशक अजय जैन ने।

उद्घाटन समारोह में इंग्लैण्ड और भारत के अलावा ऑक्सफोर्ड के अनेक देशों के प्रतिनिधियों और विद्वानों ने भाग लिया जिसमें स्पेन, ईरान, पोलैण्ड, कज़ाकिस्तान, रूस प्रमुख हैं।

दूसरा दिन :लन्दन

‘हिन्दी महोत्सव’ के तत्त्वावधान में दूसरे दिन ‘वातायन’ पुरस्कार दिए गए जिसमें पहला पुरस्कार ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ कुसुम अंसल को तथा दूसरा पुरस्कार ‘वातायन कविता सम्मान’ यतीन्द्र मिश्र को। तीसरा ‘संस्कृति सम्मान’ कृष्ण कुमार गौर को और चौथा ‘वातायन विशेष सम्मान’ सरोज शर्मा  को प्रदान किया गया । पुरस्कार प्राप्त करते हुए यतीन्द्र मिश्र  ने वाणी फ़ाउंडेशन, यू.के. हिन्दी समिति, वातायन  और कृति यू. के.  का विशेष आभार प्रकट किया और कहा कि उनके कविता कौशल को उन्होंने पहचाना और इस अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर उनको सम्मानित किया।

कुसुम अंसल का कहना था उनका जीवन ही उनका साहित्य दर्पण है और उसी कि छवि वह अपने प्रवासी भाइयों और बहनों के साथ साझा करती आयी हैं और ऐसे में वातायन शिखर सम्मान और अन्तर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान उनके जीवन की तपस्या के फलस्वरूप आज मिला है।

कृष्ण कुमार गौर और सरोज शर्मा ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए ‘हिन्दी महोत्सव’ की सफलता पर सभी विद्वानों का धन्यवाद और आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यू.के. के सांसद वीरेन्द्र शर्मा ने हिन्दी महोत्सव को बधाई देते हुए कहा कि विश्वभर के हिन्दीकर्मी खासकर यू.के. के साहित्यकार इस मंच पर इकट्ठे हैं और ये बहुत जरूरी है क्योंकि विदेश में रह रहे भारतीय बच्चों को हिन्दी भाषा और उनके देश की परम्परा भाषा सिखाने का इससे अच्छा माध्यम और कोई नहीं हो सकता। वीरेन्द्र शर्मा ने कहा कि वह आने वाले समय में अपना पूरा सहयोग हिन्दी महोत्सव को देंगे। उन्होंने अगला हिन्दी महोत्सव को करने का आग्रह भी किया है

‘वातायन’ संस्था की संस्थापक दिव्या माथुर ने कहा कि 2003 से वातायन सम्मान यू. के. में भरतीय लेखकों, कलाकारों और कवियों का सम्मान करता आया है। माथुर ने कहा इस वर्ष इस वर्ष हिन्दी महोत्सव के तत्वावधान से जुड़ कर इसका विस्तार स्वागत योग्य है।

कार्यक्रम का संचालन ऑक्सफ़ोर्ड  बिज़नेस कॉलेज के प्रबन्ध निदेशक डॉ पद्मेश गुप्त ने किया।

चौथा दिन: स्लोह

लन्दन के स्लोह सबर्ब में हिन्दी महोत्सव 2018 का हिन्दी शिक्षा और साधन पर सत्र तथा उत्सव का समापन समारोह सम्पन्न हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि लन्दन के सांसद श्री वीरेन्द्र शर्मा ने अगले हिन्दी महोत्सव को ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ कोमैन में आयोजित करने का निमन्त्रण दिया।

शिक्षा और साधन सत्र में ब्रिटेन के हिन्दी विद्यार्थियों ने हिन्दी की अनेक सुविधाओं की कमियों को रेखांकित किया। हिन्दी शिक्षकों ने उन पुस्तकों का अभाव बताया जो यहाँ के हिन्दी शिक्षण और विद्यार्थियों के हिसाब से उपलब्ध नहीं हैं।

यू.के. हिन्दी समिति की अध्यक्ष सुरेखा चौफ्ला ने कहा कि उनकी टीम ने बड़े परिश्रम और अनुभव से इंग्लैण्ड के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए सामग्री तैयार की है जिसका अनेक हिन्दी के शिक्षक लन्दन में प्रयोग कर रहे हैं। वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने हिन्दी समिति की इस पुस्तक को प्रकाशित करने को कहा जिसका सभी प्रतिनिधियों ने ज़ोरदार तालियों से स्वागत किया।

सत्र का संचालन सीमा वेदी तथा अध्यक्षता जय वर्मा ने की।

सत्र समापन के बाद कवि सम्मेलन आयोजित हुआ जिसने क़रीब 50 से अधिक प्रवासी और विदेशी हिन्दी छात्रों ने अपनी लिखी कविताओं का पाठ किया। छात्रों की उम्र 4 से 16 वर्ष की थी।

कार्यक्रम में दिव्या माथुर की पुस्तक ‘सिया-सिया’ का विमोचन भी हुआ।

भारतीय उच्चायोग के हिन्दी और संस्कृति अधिकारी तरुण कुमार ने मॉरिशस में होने वाले ग्यारहवाँ  विश्व हिन्दी सम्मेलन के विषय में विस्तार से बताते हुए सम्मेलन का प्रचार किया।

अन्त में हिन्दी महोत्सव के संयोजक डॉक्टर पद्मेश गुप्त ने पूरे उत्सव की अभूतपूर्व सफलता का विश्लेषण करते हुए कई प्रस्ताव रखे।

हिन्दी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए इन्टरनेट पर अन्तर्राष्ट्रीय फ़ोरम की स्थापना।

प्रवासी लेखन को भारत में हिन्दी साहित्य की मूलधारा से जोड़ने के लिए नये कार्यक्रमों की योजनाओं पर विचार और प्रवासी लेखकों की रचनाओं को प्रकाशन में सहयोग की व्यवस्था

हिन्दी सिनेमा के चर्चित सितारों के साथ हिन्दी विद्यार्थियों की बातचीत का अवसर।

  • इण्टरनेट के क्षेत्र में हिन्दी शिक्षण की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भारत में हिन्दी भाषा में कार्य कर रहे के इण्टरनेट एक्सपर्टस टीम और इंगलैण्ड के हिन्दी विद्यार्थियों और शिक्षकों की संयुक्त समिति का गठन।   ऑनलाइन हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता की स्थापना।
  • बारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन को लन्दन में करवाने का, भारत सरकार को प्रस्ताव।

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