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हम कश्मीरियों की मदद के लिए हैं लेकिन लोग पत्थर मारते हैं : सीआरपीएफ

हम कश्मीरियों की मदद के लिए हैं लेकिन लोग पत्थर मारते हैं : सीआरपीएफ
नई दिल्ली। हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद से ही पूरे कश्मीर में अशांति है।
बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिसमें अब तक 40 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और बड़ी संख्या में सुरक्षा बल के जवान भी घायल हुए हैं।
मीडिया ने सुरक्षा बल के कई जवानों से बातचीत की और जाना कि ये जवान किस तरह के दबाव में काम करते हैं।
एक जवान ने बताया 11 जुलाई को लोग सुरक्षा बल के जवानों पर पत्थर फेंक रहे थे। तभी भीड़ में से किसी ने ग्रेनेड फेेंका जिसमें 22 जवान घायल हो गए. अब तक ग्रेनेड फेंकने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक जवान ने हमें बताया कि कश्मीर में फोन लाइन वगैरह बंद होने से घर-परिवार वालों से बातचीत ही नहीं हो पाती। लंबे समय तक पत्नी और बच्चों से संपर्क ही नहीं हो पाता जिससे काफी भावनात्मक दबाव झेलना पड़ता है।
ग्रेनेड हमले में घायल एक और जवान ने कहा कि हम कश्मीर के लोगों की मदद के लिए ही हैं और लोग हम पर पथराव करते हैं। कुछ पढ़े लिखे लोग हैं जो समझते हैं लेकिन बाकी लोग पत्थर मारते हैं।
सीआरपीएफ पर आरोप लगते हैं कि वो कश्मीर के लोगों पर जरूरत से ज़्यादा बल प्रयोग करती है?
इस आरोप पर इन जवानों ने कहा, हम लोग जब तक मुमकिन हो एक्शन नहीं लेते, लेकिन एक सीमा के बाद एक्शन लेना ही पड़ता है।
सीआरपीएफ के ही एक और घायल जवान ने कहा, सब कुछ पाकिस्तान की शह पर हो रहा है लेकिन कश्मीर को पाकिस्तान, भारत से छीन नहीं पाएगा।
सुरक्षा बल के घायल जवान बता रहे हैं कि वे काफी दबाव में रहते हैं। लोग उन्हें समझ नहीं पाते और पथराव करते हैं।

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