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‘सैक्रामेंटल वाइन’ पर रोक, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में हस्तक्षेप और मौलिक अधिकारों का हनन-

‘सैक्रामेंटल वाइन’ पर रोक, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में हस्तक्षेप और मौलिक अधिकारों का हनन-

स्वयं के लिए खाने या पीने की चीजों का चयन निजता के अधिकार का भाग है.

इस मौलिक अधिकार को कानून बनाकर नहीं छीना जा सकता.

ग्वालियर. स्वयं के लिए खाने या पीने की चीजों का चयन निजता के अधिकार का भाग है. इस मौलिक अधिकार को कानून बनाकर नहीं छीना जा सकता. यह तर्क रखे विधि छात्रों ने एमिटी लॉ स्कूल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मूट कोर्ट कंपटीशन इंट्रा  मूट कोर्ट  कंपटीशन –2017  में .

एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी लॉ स्कूल द्वारा तीन दिवसीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें मूट प्रपोजीशन में शराबबंदी के कानून की संवैधानिक  वैधता को चुनौती दी गई . पक्ष विपक्ष की तरफ से तर्क रखते हुए 56 टीमों के छात्र अधिवक्ताओं ने संवैधानिक प्रावधानों एवं उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए उक्त कानून का विस्तृत विश्लेषण किया. ईसाई समुदाय द्वारा चर्च में श्रद्धालुओं को वितरित की जाने वाली ‘सैक्रामेंटल वाइन’ को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मानते हुए इस पर रोक लगाने को एक पक्ष ने धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मानते हुए मौलिक अधिकारों का हनन निरूपित किया. वहीं दूसरे पक्ष के छात्र-अधिवक्ताओं ने बाइबिल में प्रयोग किए गए शब्द ‘सैक्रामेंटल वाइन’ के वाइन शब्द को बाइबिल के उद्धरण के द्वारा वर्तमान वाइन अथवा शराब से पृथक बताया और कहा कि वह ‘डब्लू’ के बजाए ‘वही’ से शुरू होता है और वाइन को बाइबिल में अंगूर का ताजा रस बताया गया है. तीन दिनों तक चली इस मूट कोर्ट प्रतियोगिता में 56 टीमों ने हिस्सा लिया और प्रारंभिक दौर के नॉक आउट राउंडस में विजयी टीमें फाइनल में पहुंची. फाइनल में भारतीय सेना के पूर्व जज एडवोकेट जनरल एवं एमिटी लॉ स्कूल के निदेशक मेजर जनरल राजेंद्र कुमार (रिटायर्ड), डॉ संदीप कुलश्रेष्ठ एवं डॉ राखी चौहान जज के रूप में शामिल रहे. प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ टीम का पुरस्कार जास्मीन व श्रीलक्ष्मी के दल को मिला. जिसने फाइनल में प्रियम सेन एवं देवेशी जैन के दल को पराजित किया. हर्षित शर्मा को सर्वश्रेष्ठ  मूटर तथा पीयूष शर्मा को सर्वश्रेष्ठ रिसर्चर का पुरस्कार दिया गया. विजेताओं को पुरस्कार वितरण करते हुए प्रो-वाइस चांसलर (डॉ.) एमपी कौशिक ने छात्रों के तर्कों की प्रोफेशनलस के तर्कों के साथ तुलना करते हुए कहा कि इन्हें किसी भी तरह से कम नहीं माना जा सकता. बाइबल में प्रयुक्त वाइन एवं वर्तमान में प्रयुक्त वाइन के रासायनिक संगठन एवं उनके शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव को भी उन्होंने स्पष्ट किया. समापन समारोह में हरि ओम अवस्थी ने तीन दिनों की प्रतियोगिता एवं छात्र- अधिवक्ताओं द्वारा किए गए तर्कों को संक्षेप में प्रस्तुत किया, जबकि आभार प्रदर्शन मूट  कमेटी के छात्र समन्वयक अंकित राजपूत ने किया.


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