संक्रामक रोग के 3 पक्ष एजेंट, होस्ट और वॉयरस- प्रो. डॉ सरमन सिंह, एम्स दिल्ली

संक्रामक रोग के 3 पक्ष एजेंट, होस्ट और वॉयरस- प्रो. डॉ सरमन सिंह, एम्स दिल्ली
एमिटी विश्वविद्यालय के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित
ग्वालियर। संक्रामक रोग जानलेवा होते हैं लेकिन क्या सभी जानते हैं कि आखिर ऐसे रोग कब, कहां और कैसे पैदा हुए। इन सवालों का जवाब एमिटी विश्वविद्यालय के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा गुरूवार को आयोजित लेटेस्ट टेक्नीक इन मोलिक्यूलर बायोलॉजी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी व बॉयोइन्फोरमेटिक्स एंड इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी पर राष्ट्रीय कार्यशाला में एम्स के ख्यातनाम चिकित्सा विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ सरमन सिंह ने दिया। उन्होंने बताया कि विकसित राष्ट्रों में रोस्टोरेंट में परोसे गए कुछ व्यंजनों में साल्मोनेला की पुष्टि हुई और यही संक्रामक रोगों का कारण माना गया। इसी प्रकार उन्होंने एड्स रोग के इतिहास की पड़ताल करते हुए बताया कि 1960 के एक सैंपल की गहन जांच में ज्ञात हुआ कि कॉंगो के किनसासा क्षेत्र के चिंपाजियों से यह रोग इनसानों तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि संक्रामक रोग के तीन पक्ष हैं एजेंट, होस्ट और वॉयरस। इस मौके पर एमिटी विश्वविद्यालय के प्रो-वीसी प्रोफेसर डॉ एम पी कौशिक, कार्यशाला के संयोजक व एमिटी जैव प्रौद्योगिकी संस्थान डॉयरेक्टर और डीन एकेड्मिक्स प्रोफेसर डॉ राजेश सिंह तोमर सहित डॉ सरमन सिंह ने एमिटी इंस्टीट्यूट आॅफ बॉयोटेक्नोलॉजी द्वारा प्रकाशित दो प्रयोगशाला मैनुअल्स का विमोचन किया।
एम्स नई दिल्ली में माइक्रोबायलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ सरमन सिंह ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में किसी रोग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का बड़ा महत्व है और रोग कहां पैदा हुआ इसका पता लगाने के लिए कई देश भारी भरकम धनराशि खर्च करते हैं साथ ही वर्षों तक प्रयोगशालाओं में उसपर शोध और गहन परीक्षण करते हैं ताकि उसका निदान किया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों को व्होल जीनोम, स्पोलिगोटाइपिंग और मॉलीक्युलर तकनीक सहित रोग की पहचान की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराया। सात दिवसीय इस कार्यशाला में हैंड्स आॅन ट्रेनिंग सत्र के दौरान एआइबी के शिक्षकों डॉ राघवेंद्र मिश्रा, डॉ विकास श्रीवास्तव, डॉ सुष्मिता श्रीवास्तव, डॉ अनुराग ज्योति, डॉ राघवेंद्र सक्सेना, शमिष्ठा बैनर्जी, डॉ प्रतिष्ठा द्विवेदी और डॉ मनीष कुमार ने जांच और परीक्षण की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि शोधार्थी मिस मरसी इस अनूठी कार्यशाला में शामिल होने के लिए ही घाना से भारत पहुंची।

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