श्रीराम ने तोड़ा शिव का धनुष, क्रोधित हुए परशुराम

नोएडा। श्रीराम मित्रमंडल की रामलीला में चौथे दिन मुनि विश्वामित्र जनकपुर पहुंचने के बाद रात को भोजन के बाद राम-लक्ष्मण को एक प्राचीन कथा सुनाते हैं। महाराज जनक स्वयंवर में मुनि विश्वामित्र को आमंत्रित करने के लिए शतानंद को भेजते हैं। वहीं मुनि विश्वामित्र, राम-लक्ष्मण के साथ धनुष को देखने यज्ञशाला जाते हैं। जब राम के आने की सूचना नगर के लोगों को होती है तो वह अपने काम छोड़कर उन्हें देखने लगते हैं। जनक सबसे आकर्षक मंच पर राम-लक्ष्मण और मुनि को बिठाते हैं। फिर सीता स्वयंवर शुरू होता है। रावण और बाणासुर जैसे कई योद्धा धनुष को उठाने में नाकाम रहते हैं। यह देखकर जनक व्याकुल होते हैं और कहते हैं कि यह धरा वीरों से खाली हो गई है।
उनकी बात सुनकर लक्ष्मण क्रोधित होते हैं और कहते हैं कि अगर भैया राम आज्ञा दें तो धनुष क्या पूरा ब्रह्मांड तोड़ डालू। राम, लक्ष्मण को शांत करते हैं। इसके बाद विश्वामित्र राम को आदेश देते हैं कि वह धनुष को उठाएं। जब भगवान राम धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाते हैं तो धनुष टूट जाता हैं। सभी जनकपुरवासियों में खुशी दौड़ जाती हैं सीता श्री राम को वरमाला डालती हैं। शिव धनुष टूटने से परशुराम क्रोध में आते हैं और जनक से पूछते है कि धनुष किसने तोड़ा है। इसके बाद लक्ष्मण व परशुराम का संवाद होता हैं। बाद में परशुराम भगवान राम को पहचान लेते हैं और उनके सामने आदर प्रकट कर महेंद्र पर्वत की ओर लौट जाते हैं।
नोएडा में भी बारिश के कारण मंगलवार रात 10 बजे के बाद रामलीला शुरू हुई। साथ ही मंचन होने वाले सभी दृश्यों को छोटा कर दिया गया। मंगलवार को हुई रामलीला में कहीं सीता स्वयंवर हुआ तो कहीं प्रभु श्री राम ने अहल्या का उद्धार किया।
वहीं विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण रास्ते में रुकते हैं। वहां उन्हें देवी अहल्या और उनके शाप की जानकारी होती है। इसके बाद राम के चरणों को छूकर अहल्या को पत्थर के शाप से मुक्ति मिलती है। इसके बाद विश्वामित्र और राम-लक्ष्मण जनक नगरी रवाना होते हैं। जनक में सीता और राम पहली बार मिलते हैं। सीता यहां राम के रूप पर मोहित होती हैं। राम को पाने के लिए सीता गौरी पूजा करती हैं। इसके बाद सीता स्वयंवर की तैयारियां होती हैं।

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ग्रेटर नोएडा के साइट-4 में श्री रामलीला कमेटी की रामलीला में राजा दशरथ संतान के लिए व्याकुल दिखते हैं और पुत्रेष्ठी यज्ञ का आयोजन करते हैं। शहर में मंगलवार को हुई रामलीला पर बारिश का असर साफ नजर आया। शाम को हुई, जिस कारण रामलीला का मंचन देरी से शुरू हुआ। पाई-1 में  होनी वाली रामलीला को तो रद्द कर िदया गया।
श्री रामलीला कमिटी की तरफ से आयोजित रामलीला में श्री राम, लक्ष्मण, सीता जन्म से लेकर ताड़का व सुबाहु वध तक का मंचन किया गया। वहीं श्री धार्मिक रामलीला में रावण दरबार, देवासुर संग्राम व राम की बाल लीला तक का मंचन किया गया।
साइट-4 में श्री रामलीला कमिटी की तरफ से आयोजित रामलीला का मंचन वेदमती और रावण संवाद से शुरू हुआ। वेदमती एक तपस्नी होती है। जंगल में वेदमती और रावण का मिलन का होता है। रावण वेदमती को देखकर उसकी खूबसूरती की तारीफ करता है। यह सुनकर वेदमती नाराज होती है और उसे कहती है कि वह जनकपुरी में जन्म लेकर उसकी मौत का कारण बनूंगी।
दूसरे दृश्य में दशरथ संतान के लिए व्याकुल दिखाई देते हैं और पुत्रेष्ठी का यज्ञ कराते हैं। राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न का जन्म होता है। अयोध्या में खुशी मनाई जाती है। उधर जनकपुरी में सीता जन्म का मंचन दिखाया जाता है। राजा जनक हल चलाते हैं, जहां सीता का जन्म होता है। अयोध्या में राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को ऋषि वशिष्ठ शिक्षा देने के लिए वन ले जाते हैं। इस दौरान वन में ऋषि वशिष्ठ यज्ञ करते हैं। यज्ञ के दौरान राक्षस ऋषियों पर अत्याचार करते है। यहां ताड़का और सुबाहु वध तक की रामलीला का मंचन किया जाता है।

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