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वैश्विक आर्थिक हालात गंभीर और चिंताजनक : जेटली

न्यूयॉर्क। भारत अपनी प्रणालियों के लिए सुरक्षात्मक उपाय कर रहा है। जिससे अपने-आपको नरमी से बचाया जा सके। अपनी सीमा में वृद्धि दर्ज की जा सके। यह कहना है वित्त मंत्री अरुण जेटली का।
वित्तमंत्री मंगलवार कोे एशिया सोसायटी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि आप मुझसे पूछें कि वैश्विक स्थिति कैसी है तो मुझे लगता है कि यह गंभीर और चिंताजनक है। अगले दो-एक साल में कैसी स्थिति होगी? इसके बारे में मुझे नहीं लगता है कि कोई भी इस मामले में अंदाजा लगाने में कामयाब हुआ है। वित्तमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्थिति चुनौतीपूर्ण है। वैश्विक कारकों ने भारत को भी प्रभावित किया है। वे विशेष तौर पर निर्यात के लिहाज से हमें प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीन उल्लेखनीय रूप से आशावादी है क्योंकि पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि शेष दुनिया की तरह चीन की भी अपनी चुनौतियां हैं क्योंकि चीन में बदलाव हो रहा है। वे अब घरेलू खपत और सेवा पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। जेटली ने कहा कि विश्व का हर क्षेत्र अपनी सीमाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कम जिंस मूल्य से कुछ लोग प्रभावित हुए हैं और कुछ को मदद मिली है। कच्चे तेल में नरमी से कुछ लोगों को मदद मिली है जबकि कुछ प्रभावित हुए हैं। हर कोई अपनी प्रणालियों के इर्द-गिर्द सुरक्षा दीवार खड़ी करने की कोश्शि कर रहा है ताकि नरमी से अपने-आपको बचाने के लिए उन सीमाओं में अच्छा प्रदर्शन कर सके जिनका निर्माण विश्व ने किया है। जेटली ने पिछले सप्ताह वॉशिंगटन में विश्वबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की सालाना बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने यहां कल सीआईआई और एशिया सोसायटी पालिसी इंस्टीच्यूट द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में आर्थिक विशेषज्ञों, विश्लेषकों और कारोबारी कार्यकारियों को संबोधित किया।
वह शहर में अपने प्रवास के दौरान निवेशकों तथा शीर्ष उद्यमियों से भी मिलेंगे और संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करेंगे। संरक्षणवाद के संबंध में जेटली ने कहा, मैं आपको बता सकता हूं कि विकासशील अर्थव्यवस्थाएं यदि संरक्षणवादी हों तो यह उससे कम चिंता की बात है जो आप सबसे विकसित देशों में संरक्षणवाद का शोर-शराबा सुनते हैं।
उन्होंने कहा, व्यापार ऐसा क्षेत्र है जिसमें हर देश अपने हित देखता है और इसकी स्वतंत्रता हम एक-दूसरे को देते हैं। यह पूछने पर कि क्या भारत का हित प्रतिस्पर्धी होने की दिशा में प्रशांत-पारीय भागीदारी और एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) जैसे व्यापार समझौतों से जुडने में है, जेटली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच से जुड़ी हर अर्थव्यवस्था अपने हितों के बारे में जागरूक होगी लेकिन भारत में व्यापार को लेकर रूख में बहुत बदलाव हुआ है।

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