होम

वास्तुकला नवीनता और रचनात्मकता से निर्मित पर्यावरण का सृजन करने की कला- लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा

वास्तुकला नवीनता और रचनात्मकता से निर्मित पर्यावरण का सृजन करने की कला- लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा

ग्वालियर (सुनील गोयल) । एमिटी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के एमिटी स्कूल ऑफ़ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग में इमर्जिंग ट्रेंड्स ऑन आर्किटेक् डेवलपमेंट इन इंडिया  विषय पर एक दिवसीय नेशनल सेमिनार के राष्ट्रीय व्‍याख्‍यान सत्र के उद्घाटन के अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा एवीएसएम(रिटायर्ड) ने  सिविल इंजीनियरिंग के इतिहास और तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था में इसके महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि `वास्तुकला नवीनता और रचनात्मकता से निर्मित पर्यावरण का सृजन करने की कला है यह समयस्थान और संस्कृति के साथ महत्वपूर्ण रिश्तों को बरकरार रखती है। उन्होंने कहा कि आबादी बढ़ रही हैसंसाधन सीमित हैंइन परिस्थितियों में समाज की मूलभूत आवश्यकताओं (आवासीय) को पूरा करने का जिम्मा भावी आर्किटेक्टस के कंधों पर है। भवन निर्माण सामग्री और निर्माण शैली की पारम्परिक व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और उन्हें समयानुसार संशोधित करने का समय आ गया है। उन्होंने सोलर एनर्जी और वाटर हार्वेस्टिंग के महत्व और उपयोगिता पर चर्चा करते हुए बताया कि आर्किटेक्चर और टेक्नॉलॉजी हमेशा ही एक दूसरे के सहायक रहे हैं सेमिनार के मुख्य अतिथि आर्किटेक्ट प्लानर रविंद्र पुंडे ,फाउंडर ट्रस्टी एंड डायरेक्टर ऑफ़ द स्कूल ऑफ़ एनवायरनमेंट एंड आर्किटेक्चरमुंबईको-फाउंडर ऑफ़ द लैंडस्केप एंड प्लानिंग प्रैक्टिस डिज़ाइन सेल‘ मुंबई एंड गुरुग्राम ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा ” आर्किटेक्चर  हमेशा  स्थान और समय  का प्रतिबिंब  रहा है  जैसे जैसे समय बदल रहा है आर्किटेक्चर भी समय के साथ बदल रहा है आज का युग टेक्नोलॉजी का युग है और आर्किटेक्चर टेक्नोलॉजी से अछूता नहीं रह सकता और यह जरूरी भी है कि समकालीन निर्माण कार्य टेक्नोलॉजी की सहायता से उच्च गुणवत्ता एवं तकनीकी कुशलता के साथ किए जा रहे हैं जिनमें कि गलती की गुंजाइश कम है बीते समय के अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज से 15 से 20 वर्ष पहले यह संभव नहीं था। जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी ने आज चीजों को बदला है मुझे लगता है कि आने वाला समय आर्किटेक्चर एवं टेक्नोलॉजी का है। इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन किया गया ।मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संदीप संकटएसोसिएट प्रोफेसरहेड ऑफ़ सेंटर फॉर ह्यूमन सेंट्रिक रिसर्च (CHCR) सेंटर,डिपार्टमेंट ऑफ़ आर्किटेक्चरस्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चरभोपाल, ‘बैरियर – फ्री डिज़ाइन: “ए डेली लाइफ नीड” इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ मेकिंग इंडिया एक्सेसिबल थ्रू  सुगम्य भारत अभियान  विषय पर सेमिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि सुगम्य भारत अभियान दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा शुरू किया गया एक देशव्यापी अभियान है। उन्होंने कहा किअभियान का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को जीवन के सभी क्षेत्रों में भागीदारी करने के लिए समान अवसर एवं जीवन में आत्मनिर्भरता प्रदान करना है। सुगम्य भारत अभियान सुगम्य भौतिक वातावरणपरिवहनसूचना एवं संचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है। वहीँ दिव्यांग व्यक्तियों के सामाजिक-आर्थिक बदलाव के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ भारत सरकार सार्वभौमिक पहुँच के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करने हेतु प्रयास कर रही है।सब्जेक्ट एक्सपर्ट डॉ. अजय विनोदियाएसोसिएट प्रोफेसरडीन ऑफ़ स्टूडेंट अफेयर्सएसोसिएट डीन ऑफ़ प्लानिंग एंड डेवलपमेंटइंस्टिट्यूट आर्किटेक्टडिपार्टमेंट ऑफ़ आर्किटेक्चरस्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल, ‘हाउ मच आर्किटेक्चर एंड हाउ मच टेक्नोलॉजीसिनेरियो ऑफ़ आर्किटेक्चरल एजुकेशन एंड  प्रैक्टिसेज इन इंडिया’ विषय पर सेमिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हम लोग टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर की दुनिया में हैंसारी दुनिया एक मोबाइल में सिमट कर लोगों की हथेली पर आ गयी है। वास्तव में हम लोग टेक्नोलॉजिकल रेवोलुयुशन को महसूस कर सकते हैं जो कि आज से तक़रीबन 15 साल पहले शुरू हुआ थाटेक्नोलॉजी का बढ़ता हुआ प्रभाव सभी क्षेत्रों में महसूस किया जा सकता है ।जहाँ पर पठन पाठन के ट्रेडिशनल माध्यमों की जगह अब ऑन लाइन कोर्सेस और टुटोरिअल्स  ने ले ली है वहीँ इंटरनेट के माध्यम से आर्किटेक्चर या किसी भी विषय पर जानकारी सहज और सुलभ हैआर्किटेक्चर और डिज़ाइन टूल्स पेंसिल और पेपर की जगह कम्प्यूटर प्रोग्रामस और सॉफ्टवेयर ने ले ली है इनकी सहायता से डिज़ाइन और थ्री- डी वर्चुअल मॉडल बड़ी आसानी से डेवेलप किये जा सकते  हैंटेक्नोलॉजी जिस तरह से आर्किटेक्चर पाठ्यक्रम एवं प्रोफेशन में समाहित होकर पाम्परिक तौर तरीकों को  बदल रही है। उन्होंने कहा कि इस ट्रांसफॉर्मेशन की गतिदिशा  और उन नए आयामों को समझने की महती आवश्यक्ता है जिनकी ओर हम लोग अग्रसर हैं।सेमिनार में भारत के विभिन्न भागों से आये प्रतिभागियों ने 30 शोधपत्र प्रस्तुत किये। आभार प्रदर्शन एमिटी स्कूल ऑफ़ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग के निदेशक प्रोफेसर वाई.पी. सिंह ने किया। इस अवसर पर एमिटी के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) एमपी कौशिकरजिस्ट्रार श्री राजेश जैन सहित सभी विभाग प्रमुखप्राध्यापकगण और विद्यार्थी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *