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वरमाला डाल भगवान राम की हुईं सीता

वरमाला डाल भगवान राम की हुईं सीता
नोएडा। श्रीराम मित्र मंडल के तत्वावधान में भगवन श्रीराम की बारात बुधवार को सेक्टर 20  के हनुमान मंदिर से बड़े धूमधाम से निकाली गयी। बारात में हिंदुओं के साथ मुस्लिमों ने भी जय श्रीराम के नारे लगाकर आपसी भाईचारे एवं सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिशाल पेश की। सेक्टर 20 से निकली भगवन श्रीराम की बारात में शहर के मुसलमानों के आलावा अन्य धर्म के लोगों ने शामिल होकर सामाजिक समन्वय की अनूठी मिसाल पेश की। सैकडों की संख्या में मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाकर वातावरण को राममय कर दिया। बेंड बाजा व् रथों के साथ निकली राम बारात का जगह

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जगह फूल मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया गया।
गणेश जी, दशरथ जी ,राम लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न, वशिष्ठ जी अपने अपने रथों पर सवार होकर निकले। उनके साथ घोड़ों पर सवार होकर राजा भी निकले। सेक्टर 20 से बारात सेक्टर 26 पहुंची जहां पर अशोक चौहान व राजेंद्र भाटी ने स्वागत किया। इसके बाद डीएम चौक, सेक्टर 19, हरौला ,सेक्टर 9 बारात पहुंची जहां पर अध्यक्ष  डीपी गोयल एवं मुकेश गुप्ता द्वारा स्वागत किया गया। सेक्टर 11 ,12 -22 में सूबे यादव ने स्वागत किया। सेक्टर 55 में एस एन गोयल, सेक्टर 57 ,सेक्टर 22 में रविन्द्र चौधरी ने स्वागत किया। चौड़ा मोड़ होते हुए बारात सेक्टर 21 ए स्थित नोएडा स्टेडियम के रामलीला मैदान में पहुंची जहां पर बारातियों का स्वागत राजा जनक द्वारा किया गया। इसके उपरांत चार मंडपों में चारों भाइयों का विधि विधान से  विवाह संपन्न हुआ। हापुड़ पिलखुआ विकास  प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आर के सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके अलावा गौतम चरित्र, गौतम तपस्या, अहिल्या जन्म एवं अहिल्या विवाह आदि प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया।  प्रथम दृश्य में भगवान राम दशरथ जी से आज्ञा लेकर वशिष्ठ जी एवं अरुन्धती से आर्शीवाद लेने उनके आश्रम पहुंचते हैं। जहां मां अरुन्धती सीता को नारी धर्म के बारे में बताती हैं। राम जी गुरु वशिष्ठ से अहिल्या के बारे में जानना चाहते हैं। वशिष्ठ जी कहते हैं हे राम गौतम ऋषि तपस्वी एवं कर्मकांडी ऋषि थे। वह और विभांडक मुनि कठिन तपस्या कर रहे थे। इधर गौतम जी तप करते हैं, उधर ब्रह्मा जी देवताओं को यज्ञशाला बनाने का आदेश देते हैं। देवता जब यज्ञशाला की भूमि को खोदते हैं, उससे एक कन्या प्रकट होती है। सभी देवता ब्रह्मा जी को इस घटना के बारे में बताते हैं तब ब्रह्मा जी ने कहा कि यह कन्या मेरी मानस पुत्री होगी और इसका नाम अहिल्या होगा। ब्रह्मा जी ने कहा कि जो पृथ्वी के साथ परिक्रमा करेगा, उसके साथ मैं अपनी पुत्री अहिल्या का विवाह करूंगा।
श्री आदर्श रामलीला कमिटी की रामलीला में सीता की विदाई के साथ मंचन शुरू हुआ। सीता जी का कन्यादान व सीता की विदाई का भावुक दृश्य दिखाया जाता है। उधर अयोध्या पहुंचने पर नगरवासी राम और सीता का स्वागत करते हैं। राम वनवास पर दशरथ कैकेयी संवाद, राम-कौशल्या संवाद, राम-सीता संवाद और कौशल्या-सीता संवाद तक की लीला का मंचन किया गया।
वही, श्री धार्मिक रामलीला, पाई में शिव-पार्वती संवाद के साथ मंचन शुरू होता है। शिव पार्वती जी को रामकथा सुनाते हैं। उसके बाद रावण और मारीच पुष्पक विमान से कैलाश पर्वत से गुजरते हैं। इस दौरान रावण कैलाश पर्वत को उठाते हैं। यहां नंदी और रावण संवाद होता है। नंदी रावण को कैलाश पर्वत उठाने से रोकते है और बाद में रावण शिव की अराधना करते है। रावण की पूजा से खुश होकर शिव उन्हें वरदान देते है। अयोध्या में श्री राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघन के जन्म और खुशी मनाने व इनके नामकरण का मंचन दिखाया जाता है। वहीं अन्य दृश्य में बाली दरबार में नृत्य होना व बाली-रावण के बीच में युद्ध तक की लीला का मंचन किया जाता है।
उधर, ग्रनो में चल रही श्री रामलीला कमिटी की रामलीला में बुधवार को जनक की प्रतिज्ञा से मंचन की शुरुआत हुई। इस दौरान अहल्या उद्धार से गौरीपूजन तक की रामलीला का मंचन किया गया। पाई-1 में चल रही श्री धार्मिक रामलीला में शिव पार्वती संवाद से लेकर राम-सीता जन्म तक की लीला का मंचन किया गया। महल में सफाई करते हुए सीता धनुष उठाती हैं, जिसे देखकर जनक प्रतिज्ञा करते है कि जो भी धनुष को उठाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। दूसरे दृश्य में ऋषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को शस्त्र विद्या सिखाते हैं। उसी दौरान आश्रम में जनक का दूत उन्हें सीता स्वयंवर का निमंत्रण देता है। विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को स्वयंवर के लिए लेकर चल देते हैं। विश्वामित्र रास्ते में गौतम ऋषि और अहल्या के पत्थर बन जाने की कहानी सुनाते हैं।

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