रमजानुल मुबारक की आमद आमद है , रोजों का करें एहतराम- मो. शाह आजम बरकाती

कानपुर । रमजानुल मुबारक का ऐहतराम करो, दिन में खाने पीने की दुकानें बन्द रखो, रोजा रखकर अल्लाह को राजी करो, रोजेदारों का ऐहतराम करो, नमाजे तरावीह पूरे महीने अदा करो, रमजान की आमद पर खूब-खूब खुशी मनाओ, रमजान की आमद पर खुषी करने वाले की मगफिरत कर दी जाती है। रमजान का महीना सब्र का है और सब्र का बदला जन्नत है, ऐ लोगों तुम्हारे पास बरकत व अजमत वाला महीना आया है इसकी कद्र करो, हाथ पैर कान आंख का भी रोजा है, रमजान का पहला अषरा रहमत, रमजान का दूसरा अषरा मगफिरत है, रमजान का तीसरा अषरा जहन्नम से आजादी है। रमजानुल मुबारक नेकियों का मौसमे बहार है, समुद्र की मछलियां रोजेदारों के लिये दुआये मगफिरत करती हैं के नारों की गूंज में मोहम्मदी इमदादी फाउण्डेषन व अल फलाह एजूकेशनल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में रैली बराए ऐहतराम रमजानुल मुबारक कर्नलगंज मस्जिद केले वाली से मौलाना मोहम्मद नौषाद रजा अजहरी प्रधानाचार्य मदरसा गुलषने बरकात मछरिया, मौलाना कारी मोहम्मद जमील बरकाती खतीब व इमाम मस्जिद केले वाली व अलफलाह एजूकेशनल सोसाइटी के महामंत्री मोहम्मद शाह आजम बरकाती के नेतृत्व में निकाली गई। यह रैली विभिन्न इलाकों से होती हुई बरगद वाला मैदान कर्नलगंज में समाप्त हुई। अल फलाह एजूकेशनल सोसाइटी के महामंत्री मोहम्मद शाह आजम बरकाती ने कहा कि पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स0) इरशाद फरमाते हैं कि रमजानुल मुबारक का पहला अषरा (चरण) एक रमजान से लेकर दस रमजान तक रहमत, दूसरा अषरा (चरण) ग्यारह से बीस रमजान तक मगफिरत, और तीसरा अशरा (चरण) इक्कीस से तीस रमजान तक जहन्नम से आजादी का है। रमजानुल मुबारक नेकियों का मौसम बहार है। हमे इसका एक-एक लम्हा (घड़ी) इबादत में गुजार कर अपने अल्लाह को राज़ी करने की कोशिश करनी चाहिये। रमजानुल मुबारक में चांद देखकर नमाज तरावीह शुरू करें और चांद देखकर नमाज तरावीह बंद करें। रैली को सम्बोधित करते हुये अल फलाह एजूकेषनल सोसाइटी के महामंत्री मोहम्मद शाह आजम बरकाती ने कहा कि पैगम्बरे इस्लाम ने शाबान की आखिरी तारीख में तवील (लम्बा) खुतबा फरमाया कि ऐ लोगों तुम्हारे पास बरकत व अजमत वाला महीना आया है। इसके दिन रोजे फर्ज किये और रात का कयाम सुन्नत है। इस महीने में जो कोई नेकी करेगा उसको आम दिनों के फर्ज के बराबर सवाब मिलेगा और जो रमजान में फर्ज अदा करेगा। आम दिनो से 70 गुना सवाब मिलेगा और फरमाया कि रमजान का महीना सब्र का महीना है और सब्र का सिला जन्नत है। रमजान में मोमिन का रिज़्क बढ़ा दिया जाता है जो सख्त रोजेदार को रोजा इफ्तार करायेगा उसको रोजा रखने वाले के बराबर सवाब मिलेगा और जो कोई रोजेदार को पेट भर खाना खिलायेगा उसको अल्लाह तआला मेरे हौज (हौजे कौसर) से पानी पिलायेगा वह कभी प्यासा न होगा। यहां तक कि वह दाखिले जन्नत हो जायेगा। सहाबा-ए-करीम ने पैगम्बरे इस्लाम से पूछा कि अगर मेरे पास कोई ऐसी चीज ने हो जिससे हम इफ्तार करा सकें तो पैगम्बरे इस्लाम ने फरमाया कि अगर तुम एक घूंट दूध, एक खुर्मा एक घूंट पानी से भी इफ्तार कराओगे तब भी रोजादार के बराबर सवाब पाओगे। पैगम्बरे इस्लाम इरशाद फरमाते है कि जो कोई रमजानुल मुबारक के महीने में अपने मजदूर से कम काम लेगा तो अल्लाह तआला उसाकी मगफिरत फरमाकर उसकी गर्दन को जहन्नम से आजाद फरमा देगा। श्री बरकाती ने कहा कि खाने पीने और मियां बीवी के एक दूसरे से न मिलने का नाम रोजा है। जबान, कान, आंख, हाथ, पैर का भी रोजा है। हम अपनी जबान से गाली गलौज ने करें। हम अपनी आंख से कोई गलत चीज न देखें। हम अपने कान से गाने वगैरह न सुनें। हमारा हाथ उठे तो कमजोरों की मदद के लिये उठे। हमारे पैर बढ़े तो मस्जिदों के लिऐ बढ़े। उन्होंने आगे कहा कि रमजानुल मुबारक में एक ऐसी रात है जिसको षबे कद्र कहा गया है जो षख्स षबे कद्र में इबादत करेगा उसे हजार महीनों की इबादत का सवाब मिलेगा। हजार महीनों के तिरासी साल चार माह होते हैं। तो अगर हमने षबे कद्र में इबादत की तो हमको तिरासी साल चार महीनों की इबादत का सवाब अल्लाह तआला अपने फजलों करम से अता करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *