समाचार

मेवात में सगाई की रस्म खत्म, दहेज में लेन-देन पर पाबंदी, शरियत से होगा निकाह

मेवात में सगाई की रस्म खत्म,  दहेज में लेन-देन पर पाबंदी, शरियत से होगा निकाह
गुरुग्राम, (डीएल तिवारी)। मुस्लिम समाज में रविवार को एक महामंचायत में निर्णय लिया गया है कि मेवात समाज के लोग शरियत से होगा, गैर इस्लामी रस्मे बन्द होंगी। दहेज पर पाबंदी होगी। यह महापंचत रविवार को बीसरू रोड स्थित इस्लामी मरकज के सामने हुई।
महापंचायत में हरियाणा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के उलेमा, समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान समाजिक बुराईयों को खत्म करने के लिए दर्जनों फैसले लिए गए। महापंचायत की अध्यक्षता मौलाना रशीद मीलखेडा ने की, इसमें आम जनता के साथ-साथ स्थानीय धार्मिक उलेमा, नेतागण, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, कर्मचारी, युवा, व्यापारी, जिला परिषद, ब्लॉक समिति और अलग-अलग पंचायतों के पदाधिकारी शामिल हुए।
इस दौरान पंचायत में दहेज को समाज की बड़ी बुराई मानते हुए इस पर प्रतिबंध के लिए चर्चा की गई। महापंचायत में आए सभी लोगों ने अपना समर्थन देते हुए शादियों में दहेज पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की।
महापंचायत मौजूद लोगों ने कहा कि दहेज के कारण न जाने कितने परिवार उजड़ गए। कर्ज लेकर अपनी लड़कियों की शादी करने वाले परिवार की पूरी जिंदगी कर्ज उतारने में लग जाती है। मौजिज लोगों ने कहा कि शादियों में अपनी हैसियत के ज्यादा खर्च करना, शादी से पहले सगाई की रस्म अदा करना इस्लाम के खिलाफ है और इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए।
इस दौरान फैसला लिया गया कि जल्द ही ग्राम स्तर पर कमेटियों का गठित किया जाएगा जो ऐसी शादियों पर नजर रखेंगी। इस मौके पर मुफ्ती सईद, मुफ्ती मौहम्मद, विधायक रहीशा खान, हबिबुर्ररहमान पूर्व विधायक के अलावा पूर्व विधायक शहीदा, पूर्व विधायक जलेब खान, समशुदीन चेयरमेन सहित तमाम लोग मौजूद थे।
महांपचायत में लिए गए अहम फैसले
सगाई की रस्म को खत्म करने के अलावा सीधा निकाह किया जाए क्योंकि इस्लाम में सगाई की कोई अहमियत नहीं है।
लड़की के सरपरस्त स्वंय लड़की को लड़के के घर छोड़कर आएं।
बारात बुलाने का रिवाज खत्म हो। बारात की जगह मेहमान कहा जाए, जिनकी संख्या ज्यादा से ज्यादा 10 हो।
शादी की चिटठी ना भेजी जाए दोनों तरफ से सलाह मश्वरा करके तारीख तय की जाए।
शादी में मेहर की मिकदार शरियत में कम-से-कम तकरीबन साढ़े तीन तोला चांदी बनती है। मेहर को नगदी में देने की कोशिश की जाए जिसकी रकम कम-से-कम तकरीबन 2000 रुपए बनती है।
शादी में मांढा, जूडा घिराई, सलाम और पंचायती और मस्जिद वगैरा का सामान मंगवाने की रस्म बंद की जाए।
आतिशबाजी और डीजे वगैरा बिल्कुल बंद किया जाए।
शरियत के खिलाफ जो शादी हो उसमें उलेमा, लीडरान और कौम के जिम्मेदारान शिरकत न करें।
जिन लोगों ने दहेज ले लिया है। उलेमा और जिम्मेदार हजरात खास तौर पर हिसाब लगा कर दहेज की कीमत वापस करें।
दहेज नाम का लफ्ज को खत्म किया जाए और इसकी जगह शरियत की रोशनी में बेटी का जो हक बनता है उसे उसको दिया जाए।
गांव के सभी जिम्मदार लोगों का फर्ज बनता है कि जिन गरीबों की बेटियां बिना शादी के घर बैठी है उनका रिश्ता कराने में मदद करें।
जो फैसला बिरादरी ने किया है अगर उसकी कोई उसे नहीं मानता है तो उसे शरियत की हद में रोका जायगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *