मुसलमानों अल्लाह के वलियों के करीब हो जाओ- सैय्यद कलीम अशरफ जायसी

कानपुर। अल्लाह ताआल कुरान पाक में इरशाद फरमाता है कि खबरदार अल्लाह के वालियों को न कोई दुनिया का खौफ (डर) है और न ही उकबा (अखिरत) का गम। मुसलमानों अगर तुम अपनी भलाई चाहते हो तो अल्लाह के वलियों के करीब हो जाओ और अल्लाह के वलियों के दामन को मजबूती से थाम लो, कामयाबी तुम्हारे कदम चूमेगी। उक्त विचार हज़रत मखदूम अब्दुल लतीफ शाह चिश्ती कादरी अशरफी फैज़ाबादी रहमतुल्लाह अलैह के 50वें उर्स पाक के जलसा-ए-ईद मिलादउन नबी को सम्बोधित करते हुए हज़रत सैय्यद मोहम्मद कलीम अशरफ अशरफी साहब जीलानी सज्जादा नशीन खानकाहे आलिया अहमदिया अशरफिया जायस शरीफ अमेठी ने तकिया बिसातियान बकरमण्डी कर्नेलगंज में व्यक्त किये।
श्री जीलानी ने कहा कि अल्लाह के वलियों के ऊपर रहमत होती है अगर तुम रहमत के करीब जाओगे तो तुम भी रहमत वाले बन जाओगे। हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ भी अल्लाह के वली है। पूरी दुनिया के लोग वहां इसलिए हाजिरी देते है कि उनके ऊपर अल्लाह की रहमत है। उनके सदके में हमारे ऊपर भी रहमत हो जायेगी और अल्लाह उनके सदके में हमारी दुआओं को कबूल करेगा। अल्लाह के वलियों के बारे में यहां तक के आया है कि जिस जुबान से वह बोलते है, जबान वली की होती है लेकिन बात अल्लाह की है जिस हाथ से वह कुछ करते है हाथ वली का होता है पकड़ना अल्लाह का होता है, जिस पैर से वह चलते है पैर वली के होते है चलना अल्लाह का होता है।
हज़रत मौलाना कारी सय्यद अहमद जमाल अशरफ साहब जीलानी वली अहद सज्जादानशीन खानकाहे आलिया अहमदिया अशफिया जायस शरीफ ने कहा कि हज़रत अब्दुल लतीफ शाह रहमतुल्लाह अलैह एक एैसे बुज़ुर्ग थे जो अपने छोटे और बड़ों से हमेशा अखलाक और मोहब्बत से पेश आते थे। यह अल्लाह के वलियों का संदेश हमेशा अच्छाईयों की तरफ ले जाता है बुराईयों को रोकने के लिये अल्लाह के वलियों ने हमेशा अच्छा संदेश दिया है। मुसलमानों अल्लाह के वलियों के करीब हो जाओ बुराईयां दूर हो जायेगी और शराब, जुआ, स्मैक, हरामकारी से बचो, अल्लाह तुमसे राजी हो जायेगा और पांचो वक्त की नमाज़ को पाबन्दी से अदा करो।
श्री अशरफी ने कहा कि अल्लाह तौबा करने वाले बन्दे को बहुत पसन्द करता है। तौबा करना इन्सान का काम है और तौबा न करना शैतानी काम है। जब अल्लाह के वली तौबा करते है तो अल्लाह उनके दर्जे बुलन्द करता है और जब गुनाहगार तौबा करता है तो अल्लाह गुनाहगार के गुनाहो को मिटा देता है। हज़रत मखदूम अब्दुल लतीफ शाह चिश्ती कादरी अशरफी फैज़ाबादी रहमतुल्लाह अलैह का कुल शरीफ 7 नवम्बर बरोज़ जुमेरात सुबह 11 बजे तकिया बिसातियान बकरमण्डी कर्नेलगंज में होगा।
इससे पूर्व जलसे की शुरूआत तिलावते कुराने पाक से हाफिज़ कामिल ने की और बारगाहे रिसालत में शोएब अज़हरी, अरशद अमीन, अकमल कानपुरी, अज़हर नूरी, नईम चिश्ती, हाफिज़ सादिक, कारी कलीम नूरी ने नात शरीफ का नज़राना पेश किया। जलसे की अध्यक्षता हज़रत मौलाना सैय्यद मोहम्मद अकमल अशरफी व संचालन शब्बीर अशरफी कानपुरी ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से सज्जादानशीन शकीलुद्दीन लतीफी, नफीसुद्दीन लतीफी, मोहम्मद शाह आज़म बरकाती, मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी, मौलाना आफताब आलम, मौलाना गुलाम हसन, मौलाना तहसीन रज़ा कादरी, मौलाना गुलाम मुस्तफा, हाफिज़ कलीम, हाफिज़ इरफान, हाफिज़ साबिर, आसिफ अज़हरी, तारिक अज़हरी, सूफी अख्तर निज़ामी, मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद अनवार चिश्ती, मोहम्मद अमज़द, सैय्यद शिबली मियां, शफीक, हाफिज़ शाहरूख, शारिक वारसी, अब्दुल कलाम पूर्व पार्षद आदि लोग उपस्थित थे।

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