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मदरसे दहशतगर्दी के अड्डे नहीं, देश के लिए शहीद होने वाले इस्लामिक धर्म गुरुओं की शिक्षा के केेंद्र हैं : मौलाना हाशिम अशरफी

मदरसे दहशतगर्दी के अड्डे नहीं, देश के लिए शहीद होने वाले इस्लामिक धर्म गुरुओं की शिक्षा के केेंद्र हैं : मौलाना हाशिम अशरफी
कानपुर (आजम बरकाती)। देश को आजाद कराने के लिए सभी धर्मों के लोगों एक साथ मिलकर कुर्बानियां दीं और देश को गुलामी से आजाद कराया। जो लोग यह कहते हैं कि मदरसे दहशतगर्दी के अड्डे हैं। मैं उन्हें बता दूं कि मदरसे दहशतगर्दी के अड्डे नहीं, देश के लिए शहीद होने वाले इस्लामिक धर्म गुरुओं की शिक्षा के केेंद्र हैं। यह कहना था मौलाना हाशिम अशरफी का। मौलाना गणतंत्र दिवस के अवसर पर आल इन्डिया गरीब नवाज कौन्सिल के बैनर तले बांसमंडी में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस कौम ने मुल्क की आजादी के लिए कुबानियां दींं आज उसी को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। बल्कि उनकी तालीमगाहों को आतंकवादियों का अड्डा कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मदरसे हमेशा अमन का पैगाम देते आए हैं। दहशतगर्दी के खिलाफ लड़ाई की है। इसके साथ ही मौलाना देश की आजादी के लिए शहीद होने वालों लोगों को खिराज-ए-अकीदत पेश की
इससे पूर्व हाफिज निजामुद्दीन को कुरआन की तिलावत कर जलसे का आगाज किया। इस अवसर पर हाफिज अब्दुल रहीम बहराइची, मौलाना नजमुद्दीन, कारी कासिम हबीबी, मिकाइल जियाई, मौलाना गुलाम मुर्तुजा शरीफ, कारी इकबाल बेग, कारी कलीम नूरी, मौलाना फतेह मोहम्मद, मौलाना मुइन उद्दीन, मौलाना कलीम, मौलाना गुलाम हसन, इकबाल नूरी और हसमत अली नूरी आदि ने भी जलसे को खिताब किया।

 

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