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भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या 6 करोड़ 30 लाख : डब्ल्यूएचओ

शहरी जीवन शैली ने बढ़ाई शुगर की बीमारी
नौएडा, (सलीम) । बीमारियों की जननी मानी जाने वाली शगर की बीमारी मौजूदा समय में प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बन रही है और हमारे देश में, खास तौर पर शहरों में इसका प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुऐ विश्व स्वस्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस साल सात अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस को मधुमेह पर केन्द्रित किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2000 में भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या 3 करोड़ 20 लाख थी जो 2013 में बढ़कर करीब दोगुनी 6 करोड़ 30 लाख हो गई तथा अगले 15 वर्षों में मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़कर 10 करोड़ 10 लाख हो जाने का अनुमान है। हमारे देश में युवा वयस्कों और बच्चों में मधुमेह में खतरनाक ढंग से वृद्धि हुई है।
नौएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के ब्रेन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. राहुल गुप्ता बताते हैं कि शहरी जीवन शैली का के बढ़ते प्रकोप से गहरा संबंध है। भारत में व्यस्त एवं भागमभाग वाली जिंदगी, तनावपूर्ण जीवन, स्थूल जीवन षैली, षीतल पेय का सेवन, धूम्रपान, व्यायाम कम करने की आदत और जंक फुड का अधिक सेवन, मोटापा के कारण मधुमेह का प्रकोप बढ़ रहा है।
जाने माने मनोचिकित्सक तथा नई दिल्ली स्थित कास्मोस इंस्टीच्यूट आॅफ मेंटल हेल्थ एंड बिहैवियरल साइंसेस (सीआईएमबीएस) के निदेशक डॉ. सुनील मित्तल बताते हैं कि मानसिक तनाव अगर लंबे समय तक बना रहे तो इससे रक्त षुगर बढ़ता है इसलिए मधुमेह के मरीजों को तनाव को नियंत्रण में रखना चाहिए। उनके अनुसार तनाव बढ़ने पर इपिनेफरिन और कार्टिसोल जैसे तनाव जनित हार्मोन बढ़ जाते हैं और इसके कारण रक्त में शुगर का स्तर बढ़ता है।
नौएडा स्थित मेट्रो हास्पीटल्स एंड हार्ट इंस्टीच्यूट के निदेशक तथा प्रमुख इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पुरूषोत्तम लाल के अनुसार मधुमेह का शरीर के जिन महत्वपूर्ण अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है उनमें हृदय प्रमुख है। मधुमेह के कारण हृदय को रक्त एवं आॅक्सीजन की आपूर्ति करने वाली धमनियों में जमाव की प्रक्रिया तेज हो जाती है। सामान्य लोगों की तुलना में मधुमेह के मरीजों की रक्त धमनियों में चर्बी जमने की प्रक्रिया (एथिरोस्किरोसिस) अधिक तेज होती है। इससे धमनी का रास्ता तंग हो जाता है और उसमें रक्त प्रवाह कम हो जाता है। इससे कोरोनरी हृदय रोग पैदा होते हैं। इस प्रक्रिया की परिणति एंजाइना अथवा दिल के दौरे के रूप में भी हो सकती है।
हालांकि मधुमेह के लक्षणों से जीवन को कोई खतरा नहीं होता है लेकिन मधुमेह स्ट्रोक, हृदय रोग, अंधापन, गंभीर रीनल बीमारी (ईएसआरडी), गैंगरीन, किडनी की खराबी तथा नसों की बीमारियों के मुख्य कारण हैं। मधुमेह के कारण कोरोनरी हृदय रोग और ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा चार गुना अधिक होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं तथा उनके गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु के लिये गेस्टेशनल मधुमेह अधिक खतरनाक होता है। ऐसे में मधुमेह पर नियंत्रण रखना आवष्यक हो जाता है ताकि अधिक गंभीर एवं जानलेवा बीमारियों के होने के खतरे को टाला जा सके।
डॉ. राहुल गुप्ता बताते हैं कि मधुमेह से पूरे शरीर में रक्त का संचार करने वाली नसों के अलावा संवेनदनाओं का संचार करने वाली नसें (नर्व) भी प्रभावित होती हैं। मधुमेह के कारण रक्त की नलिकाओं में चर्बी के जमने (एथरोस्क्लोरोसिस) की प्रक्रिया तेज हो जाती है जिससे मस्तिष्क, हृदय और शरीर के अन्य अंगों में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है इससे ब्रेन स्ट्रोक, दिल के दौरे तथा अन्य अंगों में स्ट्रोक पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा मधुमेह के कारण संवेदनाओं का संचार करने वाली नसें (नर्व) भी प्रभावित होती है जिसके कारण हाथ, पैर और उंगलियां जैसे शरीर के विभिन्न अंगों में सनसनाहट होती है, उनमें संवदेनाओं में कमी आ सकती है तथा वे काम करना बंद कर सकते हैं।
डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि मधुमेह के कारण स्पाइन की समस्याएं भी बढ़ जाती है जिनमें डिस्क में संक्रमण तथा स्पाइन की टीबी भी शामिल है। मधुमेह हमारे शरीर की रोग प्रतिरक्षण क्षमता को घटा देता है जिसके कारण मधुमेह रोगियों का आॅपरेषन करने पर संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है और इसलिए मधुमेह को नियंत्रण में रखना जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि मधुमेह के कारण आंखों, उंगलियों, किडनी, स्नायु तंत्र, हृदय और मस्तिष्क जैसे अंगों की पतली रक्त नलिकायें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और इसके कारण संबंधित अंग काम करना बंद कर देते हैं।
नई दिल्ली के दिल्ली मधुमेह अनुसंधान केन्द्र के अध्यक्ष डॉ. ए. के. झिंगन बताते हैं, ह्यह्यभारत को मधुमेह की महामारी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में, भारत में साढ़े छह करोड़ मधुमेह रोगियों की पुष्टि हुई है जबकि अन्य तीन करोड़ लोग प्रीडायबिटीज समूह में है। 2030 तक, भारत में मधुमेह के सबसे अधिक रोगी होंगे। मधुमेह सिर्फ शुगर की समस्या नहीं हैdiabetes, बल्कि यह इसके साथ अन्य जटिलताएं भी पैदा करता है।
डा. बी. सी. राय राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित डा. पुरूषोत्तम लाल ने कहा कि मधुमेह की रोकथाम तथा इसके बारे में जागरूकता कायम करने के लिए गंभीरता के साथ कार्यक्रम बनाने की आवश्यकता है क्योंकि यह मूक हत्यारा विकासशील देशों, खासकर भारत में आक्रामक हो रहा है। विकासशील देशों में, मधुमेह ग्रस्त आधे से भी कम लोगों की पहचान हो रही है। समय पर पहचान न होने और पर्याप्त चिकित्सा के अभाव के कारण मधुमेह के कारण होने वाली जटिलताएं और रुग्णता तेजी से बढ़ जाती हैं।

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