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‘भारत माता की वंदना गैर इस्लामी : देवबंद

देवबंदख। इस्लामी मंरकज दारुल-उलूम के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने बताया कि जिस शाखा से फतवा जारी किया जाता है। वहां पर भारत के कई हिस्से से लोगों के सवाल आ रहे थे कि क्या ‘भारत माता की जय’ बोला जा सकता है? लोगों के सवाल के जवाब में ये फतवा जारी किया गया है।
क्या जय कहना पूजा करने के बराबर है? इस पर उस्मानी ने कहा कि कल को आप कहेंगे कि जय हनुमान कहिए।
इससे पहले महाराष्ट्र में एमआईएम के विधायक वारिस पठान को भारत माता की जय नहीं बोलने पर निलंबित कर दिया गया था।
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए एमआईएम नेता असदउद्दीन ओवैसी ने कहा था कि उनकी गर्दन पर चाकू रख दिया जाए तो भी वे भारत माता की जय नहीं बोलेंगे।
ओवैसी ने कहा था कि ऐसा करने के लिए देश का संविधान उन्हें इजाजत देता है।
दारुल-उलूम के फतवे पर भाजपा नेता और केंद्र सरकार में मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि ये फतवा शहीदों का अपमान है और ये इस्लाम के कट्टरपंथी चेहरे को दर्शार्ता है।
लेकिन अशरफ उस्मानी ने कहा कि लोगों ने अपने सवालों के साथ भारत माता की तस्वीर भी भेजी थी कि क्या इस तस्वीर की जय या इसकी वंदना की जा सकती है।
उस्मानी ने कहा कि इस्लाम में किसी तरीके से मूर्ति पूजा नहीं की जा सकती। भारत माता को अगर देवी की शक्ल में पेश कर दिया जाए और कहा जाए कि इसकी जय बोली जाए या वंदना की जाए तो इस्लाम में ये मना है, नाजायज है। उन्होंने कहा कि भारत माता की संकल्पना देवी के रूप में की गई है जिनके हाथ में एक झंडा है, इसलिए उसकी पूजा नहीं की जा सकती है।
उस्मानी ने कहा कि ये सवाल मुसलमानों से ही नहीं सिखों, ईसाइयों और आर्य-समाजियों से पूछा जाना चाहिए कि क्या वो मूर्ति पूजा कर सकते हैं। अशरफ उस्मानी का कहना था कि हमारे पास इस अंदाज कभी ये मामला नहीं आया कि हमने तो हिंदुस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ी है, हिंदुस्तान जिदाबाद के नारे लगाए हैं, क्या जरूरत है कि उसको माता कहा जाए?

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