भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यषाला का शुभारंभ

नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय में भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यषाला का शुभारंभ एमिटी स्कूल आफ नैचुरल रिर्सोस एंड सस्टनेबल डेवलपमेंट एंव एमिटी इंस्टीटयूट आफ ग्लोबल वार्मिंग एंड इकोलाजिकल स्टडीज द्वारा 25 भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए ‘‘ आजीविका सर्मथन एंव औद्योगिक उत्पादन में वन रोपण का सहयोग’’ पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यषाला का आयोजन एफ वन ब्लाक सभागार, एमिटी विश्विद्यालय में किया गया है। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आईजी (वन) श्री डी के सिन्हा, दिल्ली के प्रिसिंपल चीफ कंसरवेटर आफ फारेस्ट श्री ईश्वर सिंह, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला, एमिटी स्कूल आफ नैचुरल रिर्सोस एंड सस्टनेबल डेवलपमेंट के सलाहकार प्रो बी के सिंन्हा, एंव एमिटी स्कूल आफ नैचुरल रिर्सोस एंड सस्टनेबल डेवलपमेंट के निदेषक डा एस पी सिंह ने पारंपरिक दीप जलाकर किया। इस प्रषिक्षण कार्यषाला में उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गुजरात, मणीपुर, असम, मध्यप्रदेश,  महाराष्ट्र आदि राज्यों से लगभग 25 भारतीय वन सेवा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फांउडेषन की महानिदेषिका डा नूतन कौशिक भी उपस्थित थी। पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आईजी (वन) श्री डी के सिन्हा ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह कार्यशाला काफी महत्वपूर्ण है जिसके अंर्तगत दो मुख्य मुददे कार्यषाला में वन रोपण द्वारा आजिविका का विकास हो

और वह लोगों को प्राप्त हो। द्वितीय औद्योगिक उत्पादन के लिए लकड़ी की आवश्यकता को भी वन रोपण के जरीए पूर्ण करने विषय पर चर्चा करना है। लकड़ी की कमी का मुख्य कारण वनों की कमी है। इस वजह से लोगों द्वारा प्लास्टिक या स्टील से बनी वस्तुओं का उपयोग करना प्रांरभ कर दिया है। हमें इस तरह की नितियां बनानी चाहिए या वनों को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए जिससे लकड़ी का उत्पादन बढ़ सके। वनों के रोपण से उस क्षेत्र से जुड़े लोगो की आजिविका के साधन बढ़ेगे और नये रोजगार विकसित होगें।

श्री सिन्हा ने कहा कि आज लकड़ीयों के आभाव में कई औद्योगिक उत्पादनों की क्षमता कम हो रही है बिल्डिंग मैटेरियल, फर्नीचर, प्लाइवूड आदि कई उद्योगों में लकड़ीयो की आवष्यकता रहती है जिसके लिए वनों रोपण को प्रोत्साहित करना होगा इससे एक ओर हमारा पर्यावरण मजबूत होगा दूसरी ओर आजीविका के साधन विकसित होगें। हमें फार्म लैड़ों पर पेड़ को उगाने सहित औद्योगिक के लिए पौधारोपण को भी बढ़ावा देना होगा उन्होनें कहा कि कई वन क्षेत्र कटाई के कारण रिक्त पड़े है वहां भी हमें वनरोपण केा विकसित करना होगा। हम सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों को मिलकर न केवल वनों का संरक्षण करना चाहिए बल्कि वन रोपण को प्रोत्साहित करना चाहिए। इस दो दिवसीय कार्यषाला में चर्चा करके हम स्थायी समाधान प्राप्त करना चाहिए।

दिल्ली  के  प्रिसिंपल  चीफ  कंसरवेटर  आफ  फारेस्ट  श्री  ईष्वर  सिंह  ने  आईएफएस अधिकारीयों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वन रोपण को बढ़ावा देना है तो लीक से हटकर कुछा नया सोचे और नवोन्मेष को बढ़ावा दें। हमें गर्व है कि हमें वन एंव पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने का मौका मिल रहा है। उन्होनें कहा कि भारतीय वन सेवा में कार्य करने आये नव अधिकारियों को अधिक से अधिक संबधित क्षेत्र में दौरे करने चाहिए तभी वो समस्याओं को समझ कर उसका निवारण कर पायेगें। श्री सिंह ने कहा कि अपने मातहत अधिकारियों एंव काम करने वालों को प्रोत्साहित करें जिससे कार्य गुणवत्ता को बढ़ाया जा सके। जीवन में सफल होने के लिए किसी से अपेक्षा ना रखें, अपनी एंव अन्य लोगों की तुलना ना करें और आवष्यकता एंव लालच के फर्क को समझें। इस कार्यषाला में उपस्थित विषेषज्ञों से चर्चा करें और वन रोपण को बढ़ाने का मार्ग ढूंढे। एमिटी विष्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर षुक्ला ने संबोधित करते हुए कहा कि हम पर्यावरण के बगैर रहने की कल्पना भी नही कर सकते।

हम अपने इतिहास  या  प्राचीन  समय  में  देखे  तो  पायेगें  की  हमारे  आस  पास  काफी  वन  थे।  वन, पारिस्थितिकी तंत्र को पूर्ण करते है जहंा पर कई प्राणाी, पौधे, पक्षी पनपते है। आप सभी भारतीय वन सेवा के अधिकारी पर्यावरण एंव वनों के सरंक्षण का बेहतरीन कार्य कर रहे है और यह कार्यषाला आपके कार्य में निष्चित ही सहायक होगी। डा (श्रीमती) षुक्ला ने कहा कि हम एमिटी  मेें छात्रों के  अंदर  पर्यावरण को आदर एंव  संरक्षित  करने  की भावना को प्रोत्साहन देते है जिससे वे प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यों को समझ कर पर्यावरण एंव वन संरक्षण में सहायक बन सके। एमिटी स्कूल आॅफ नैचुरल रिर्सोस एंड सस्टनेबल डेवलपमेंट के निदेषक डा एस पी सिंह ने अतिथियों एंव आईएफएस अधिकारीयों का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यषाला का उददेष्य आजीविका सर्मथन एंव औद्योगिक उत्पादन में वन रोपण का सहयोग पर आपके विचारों को समझना एंव इस क्षेत्र में आ रही चुनौतियों पर चर्चा करना है। जिससे वन रोपण के दिषा में सार्थक प्रयास किया जा सके। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विषेषज्ञों द्वारा वन रोपण से जुड़े विषेष मूददों पर चर्चा की जायेगी। तकनीकी सत्र के अंर्तगत प्रथम सत्र में हरियाणा के पूर्व पीसीसीएफ डा पी पी भोजवानी ( रिटार्यड आईएफएस) ने ‘‘प्लानटेषन फारेस्ट्री इन इंडिया – पास्ट, प्रजेंट एंड फ्युचर’’ पर, द्वितीय सत्र में विमो सिडलींग यूनिट के पूर्व प्रमुख डा आर सी धिमान ने ‘‘प्रोडक्षन फारेस्ट्री एंड लाइवलीहुड इषु इन इंडिया पर अपने विचार रखे। तृतीय तकनीकी सत्र के अर्तंगत ‘‘एग्रोफाॅरेस्ट्ररी – ए टूल फाॅर लाइवलीहूड सर्पोट थू्र इंडस्ट्रीयल प्रोडक्षन ’’ पर चर्चा की गई।

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