बीएसएफ से निष्कासित जवान तेज बहादुर का क्यों हुआ नामांकन रद्द जानिए पूरी वजह

नई दिल्ली (वीटीएन)। वाराणसी के ज़िला निर्वाचन कार्यालय ने सीमा सुरक्षा बल निष्कासित जवान तेज बहादुर यादव का वाराणसी लोक सभा सीट से नामांकन रद्द कर दिया है बता दे तेज बहादुर ने दो वाराणसी से लोकसभा चुनाव के लिए दो पत्रे भरे थे.. एक पर्चा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 24 अप्रैल को और दूसरा 29 अप्रैल को सपा- बसपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में.जमा किया था..इसे आज निर्वाचन अधिकारी खारिज कर दिया….इस पर तेजबहादुर यादव ने कहा है कि वो इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे..
आप को बता दें वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,बीजेपी के मौजूदा सांसद हैं और इस बार भी वाराणसी से ही चुनाव लड़ रहे हैं… मोदी 26 अप्रैल को यहां से अपना नामांकन भरा चुके हैं आप को बताते चलें सपा बसपा गठबंधन से एक और उम्मीदवार शालिनी यादव ने भी अपने पर्चे भरा है..तेजबहादु के पहला पर्चा भरने के बाद 30 अप्रैल को ज़िला निर्वाचन अधिकारी का पहला नोटिस दिया. नोटिस में तेजबहादु से पूछा गया कि वो बीएसएफ़ से एक चिठ्ठी लेकर आएँ जिससे पता चले कि उन्हें क्यों बर्ख़ास्त किया गया था…नोटिस में उन्हें ज़िला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष 1 मई 2109, 90 सालों के बाद उपस्थित होने को कहा गया था…बाद में दूसरा नोटिस जारी किया गया जिसमें पहले नोटिस में बताई गई तारीख़ को ‘क्लेरिकल मिस्टेक’ बताया गया और उन्हें 1 मई, 2019 को सुबह 11 बजे तक सीमा सुरक्षा बल से चिठ्ठी लाकर देने को कहा गया…ज़िला निर्वाचन अधिकारी और वाराणसी के रिटर्निंग अफसर सुरेंद्र सिंह ने भेजे गए नोटिस में कहा है कि जब तेज बहादुर यादव ने बतौर निर्दलीय अपना नामांकन भरा था तो पर्चे दिए गए प्रावधान – “क्या आपको सरकारी सेवा से भ्रष्टाचार या देशद्रोह के आरोप में कभी बर्ख़ास्त किया गया है ?” इस सवाल के जवाब में तेज बहादुर ने पहले नामांकन पत्र में ‘हाँ’ लिखा था..ज़िला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार तेज बहादुर ने जब 29 अप्रैल को दूसरा नामांकन भरा तो उसके साथ उन्होंने एक शपथ पत्र दायर किया. इस हलफ़नामे में उन्होंने कहा कि 24 अप्रैल को जो नामांकन पत्र दाखिल किया था उसमे ‘हाँ’ ग़लती से लिख दिया था. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में प्रावधान है कि हर वो केंद्र या राज्य सरकार का कर्मचारी जिसकी सेवा किसी भी आरोप में बर्खास्त की गयी हो, वो पांच सालों तक चुनाव नहीं लड़ सकता है..वाराणसी लोक सभा की सीट से कुल 101 नामांकन दाख़िल किए गए हैं जिनमे से 71 नामांकन पत्रों को ख़ारिज कर दिया गया है.. तेज बहादुर यादव ने वाराणसी में अपना चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था जहाँ बाँटे गए पोस्टरों में लिखा था कि देश के असली चौकीदार वो हैं.

याद रहे दो साल पहले बीएसएफ़ जवान तेज बहादुर यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इस वीडियो में तेज बहादुर फ़ौजियों को मिलने वाले खाने की शिकायत कर रहे थे. वो बता रहे थे कि उन्हें कैसी गुणवत्ता का खाना दिया जाता है.तेज बहादुर ने बताया था कि  अधिकारियों से शिकायत करने पर भी कोई सुनने वाला नहीं है ….यहां तक कि गृहमंत्रालय को भी चिट्ठी लिखी लेकिन कुछ नहीं हुआ. बीएसएफ़ ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे और बाद में तेज बहादुर को बीएसएफ़ बर्खास्त दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *