समाचार

प्रो. ताहिर महमूद की लिखी पुस्तक ‘माइनॉरिटीस कमीशन’ का विमोचन

नोएडा। भारतीय संविधान के निर्माता श्री बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करते हुए अल्पसंख्यक आयोग की सन 1978 से 2015 तक मुख्य कार्यो की भूमिका के बारे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन एंव एमिटी इंस्टीटयूट आॅफ एडवांस लीगल स्टडीज के वर्तमान चेयरमैन द्वारा लिखी पुस्तक ‘माइनॉरिटीस कमीशन’ 1978 . 2015 माइनर रोल इन मेजर अफेयर का विमोचन किया गया। इस पुस्तक का विमोचन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जनाब नसीम अहमद, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चैहान, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीष जसपाल सिंह एंव यूनीवर्सल लॉ पब्लिषिंग के मनीष अरोरा ने किया।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन नसीम अहमद ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रो ताहिर महमूद एक प्रसिद्ध शिक्षक है, जो विधी के प्रति प्रतिबद्ध है और आने वाली पढ़ीयों के मार्गदर्शक एंव प्रेरक है। यह पुस्तक बीते चार दशकों मे भारत मे अल्पसंख्यकों की बदलती स्थिती एंव अल्पसंख्यकों को उनके संवैधानिक अधिकारों एंव सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने वाले सरकार के प्रयासों की सफलता एंव असफलता को बताती है। नसीम अहमद ने कहा कि पुस्तक लिखना हर किसी के बस की बात नही है इसके लिए गूढ़ ज्ञान की आवष्यकता होती है। इस पुस्तक में लेखक का दशकों का शोध, अनुभव एंव ज्ञान प्रतिबिंबित होता है।
एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा. अशोक कुमार चैहान ने संबोधित करते हूए कहा कि हमारे संविधान ने देष के सभी व्यक्तियों को एक समान अधिकार प्रदान किये है, कानून की नजर मे सभी बराबर है लेकिन यह देखकर बेहद निराशा होती है कि समाज अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक मे बंट गया है। संविधान ने कभी भी किसी को धर्म, जाती, लिंग या भौगोलिक आधार पर नही बांटा। देश एंव समाज के विकास मे पूर्ण सहयोग करने हेतु अल्पसंख्यकों को मुख्य धारा मे एकीकरण की जरूरत है। यह पुस्तक इस संर्दभ में समस्याओं एवं चुनौतियों को समझने मे सहायक होगी। प्रो ताहिर जो कि स्वयं आयोग के चेयरमैन रह चुके हैं ने गहन अध्ययन एंव बृहद अनुभव के आधार पर यह पुस्तक लिखी है। अगर पुस्तक में लिखी सलाहों को कार्यान्वित किया तो निश्चित ही अल्पसंख्यकों को अवश्य लाभ होगा। यह पुस्तक आंखें खोलने वाली पुस्तक है इसलिए सभी राजनैतिज्ञों, अधिकारियों एंव निती निर्धारकों को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए। देष का विकास सभी के विकास मे ही निहित है।
दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जसपाल सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रो ताहिर ने अल्पसंख्यकों पर ध्यान दिलाया है जो एक लंबे समय से समान अधिकार एंव न्याय की मांग कर रहे है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में अल्पसंख्यक के विकास मे आयोग की भूमिका एंव कुछ अन्य क्षेत्र जिस पर विषेष ध्यान देने की आवश्यकता को भी बताया गया है। सिंह ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता के ढांचे की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला है।
पुस्तक के लेखक प्रो ताहिर महमूद ने पुस्तक विमोचन में आये व्यक्तियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पुस्तक तथ्यात्मक अवलोकन पर आधारित है। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि अगर अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन के पद पूर्व न्यायाधीषों को नियुक्त किया जाये तो अल्पसंख्यकों को उनके विधी ज्ञान का अवष्य लाभ होगा।
आप को याद दिलाते चलें कि प्रो ताहिर महमूद एक प्रख्यात विधि शिक्षक एवं षोधार्थि है जिन्होंने कई पुस्तके लिखी हैं। प्रो महमूद सन 1996 -1999 तक तीन वर्षो तक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन भी रह चुके है। इसके अतिरिक्त वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं नेशनल कमीशन फॉर रिलिजिशयस एंड लिंगुस्टिक माइनॉरिटीस एंव लॉ कमीशन आॅफ इंडिया के सदस्य भी रहे हंै। वर्तमान में प्रो ताहिर महमूद एमिटी इंस्टीटयूट आॅफ एडवांस लीगल स्टडीज के चेयरमैन है। इस विमोचन समारोह एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की चेयरपरसन डा अमिता चैहान, एमिटी लॉ स्कूल नोएडा के निदेशक मेजर जनरल निलेन्द्र कुमार सहित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *