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पूरी दुनिया में अमनों अमान और खुशहाली के लिये दुआ करायीं

कानपुर (आजम बरकाती)। ऐ अल्लाह हमारी सुरक्षा फरमा आफतो और मुसीबतो से छुटकारा देदे। ऐ अल्लाह हम तेरे बन्दे हैं और तेरी बारगाह मे तौबा करते है। हमारी तौबा कबूल फरमा। हमें हर तरह के पाप और बुरे कामों से सुरक्षित फरमा ऐ अल्लाह तू जो चाहे छीन ले तू जो चाहे दे दे तू ही हाकिम तू ही मददगार तू ही जरूरतों को पूरा करने वाला है। पताल से लेकर आकाश तक तेरी ही बादशाहत हैं ऐ अल्लाह हमारी परीक्षा न ले। जिन बन्दों की परीक्षा तूने लिया है उनके सदके हमारी परीक्षा माफ फरमा दें। ऐ अल्लाह मुल्क से दहशतगर्दी और फिरका परस्ती को मिटा दे। और अमनो शान्ती का माहौल बना दे। ऐ अल्लाह हमारे वतन के जो लोग इराक में शहीद किये गये है। उनके घर वालों का धैर्य दे। ऐ अल्लाह हमारे मुल्क को हरा भरा करके खुशहाली प्रदान कर। ऐ अल्लाह तू हम सब से राजी हो जा। और हम से वो काम ले जिससे तू और तेरा नबी राजी हो। ऐ अल्लाह समाज में फैली हुई बुराईयों को खतम कर दे। ऐ अल्लाह हमारे समाज को अच्छा कर दें। ऐ अल्लाह जवान बेटीयों का रिश्ता देदे। ऐ अल्लाह जो निर्दाष लोग जेल मे हैं हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के सदके में उन्हें रिहायी देदे। नमाज, रोज़ा, हज, जकात आदि की तौफीक देदें। ऑल इण्डिया गरीब नवाज़ के तत्वाधान में आयोजित मरकजी कुल शरीफ कंघी मोहाल बड़ा इमाम चौक में कौन्सिल के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद हाशिम अशरफी ने नम आखों से दुआ की तो आमीन कहने वालो की आखों से आँसू बहने लगे। कुल में उपस्थित लोग भी दुआ में व्यस्त थे। हाथों को उठाये हुऐ थे। और गिड़गिड़ा कर मांग रहे थे। मौलाना अशरफी ने जब ख्वाजा गरीब नवाज की दुहायी देते हुए मुल्क की खुशहाली,तरक्की शांति की प्रार्थना की तो लोग जज़बाती होकर या ख्वाजा या ख्वाजा की गुहार लगाने लगे। और फिर प्यार भरा नारा ख्वाजा ख्वाजा कहते है हिन्दुस्तान में रहते है की आवाजें हर तरफ से आने लगी। इससे पूर्व दर्जनों ओलमा ने अपनी तकरीरों मे कहा कि हम माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से अपील करते हैं कि ख्वाजा गरीब नवाज जो पूरे देश विदेश के लिए एक महान संत पुरूष है उनके उर्स 6 रजब की छुट्टी को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करें मौलाना अशरफी ने कहा ख्वाजा गरीब नवाज का आस्ताना ऐसा आस्ताना है जहाँ मुगलिया बादशाह से लेकर अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा तक सैकड़ों शासको ने अपनी उपस्थति दी। और मुहब्बत की चादर चढ़ा कर अपनी कामयाबी की प्रार्थना की पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि दुनिया के अनेक भागों से ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह की सुरक्षा के संबध मे हजारो पत्र हमें प्राप्त हुऐ है। इसलिय में पूरी जिम्मेदारी के साथ ऐलान करता हूँ कि इस पवित्र दरगाह की सुरक्षा हर हाल में की जायेगी। और उसकी इज्ज़त आबरू पर कभी आँच नहीं आने दिया जायेगा। ये अमन का आस्ताना और शांति का केन्द्र हैं। मौलाना अशरफी ने ये भी कहा कि कौन्सिल के कार्य भारतीय स्तर पर चलाये जा रहें हैं।

भारत के कौने-कौने से छुट्टी की मांग हो रही है। जब तक छुट्टी न होगी गरीब नवाज के चाहने वाले और गरीब नवाज कौन्सिल चुप ना बैठेगी। हजरत गरीब नवाज ने पूरी दुनिया को सच्चाई का मार्ग दिखाया। आज भी आप के आस्थाने पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मो के लोग बड़े प्रेम से आते है। आज जरूरी है कि गरीब नवाज के मिशन को पूरे भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैलाया जाये। ख्वाजा गरीब नवाज का मिशन माँ बाप का दिल न दुखाओं, धुम्रपान यानी शराब गांजा, अफीम, स्मैक, चरस से बचना और बेसहारा गरीबो, मोहताजों की मदद करना है। मौलाना अशरफी ने कहा कि रमज़ान का महीना करीब है कितने अफसौस की बात है कि रमजा़न में लोग खुल्मल खुल्ला खाते पीते है। इससे मुसलमानों को बचना चाहिए। औलमा ने कहा ख्वाजा गरीब नवाज़ ने मानवता, इन्सानियत मुहब्बत भाईचारा का सदेंश दिया। इसको फैलाने की जरूरत है। कि इसके जरिये दहशतगर्दी और फिरकापरस्ती खत्म होगी। ख्वाजा गरीब नवाज़ का संदेश अपने आप में एक उदाहरण है। बे सहारा मजबूरो और अपाहिजो को बिना भेद भाव के सुबहो शाम आप के लगंर से खाना खिलाया जाता है। इससे पूर्व जलसे का आगाज़ कुरान पाक की तिलावत से कारी मुहम्मद अहमद ने किया।ं और कारी कलीम नूरी ने दरूद इ ताज पढ़ा इस जलसे का संचालन हाफिज़ नियाज़ अहमद ने किया। शायरों ने गरीब नवाज की बारगाह में मनकबत पढ़ी। कुल शरीफ का आयोजन बड़े ही हर्ष और उल्लास से प्रारम्भ हुआ। शब्बीर भईया, मुहम्मद समी कुरैशी मैराज वारसी, जु़बैर वारसी, सई उर्फ गुडडू, मुहम्म्द,शारिकए मुहम्मद फकरू, मुहम्मद वासिफ अशरफी ने मेहमानों का हार फूल से इस्तकबाल व स्वागत किया। इस अवसर पर खास तौर पर मौजूद रहें। मौलाना कासिम हबीबी सहाब, मौलाना मेहताब आलम मिसबाही शहरी सदर, मुहम्मद शाहआलम बरकाती, मिडिया प्रभारी डा. सैयद सुल्तान हाशमी, अतीक बरकाती असगर बिन याकूब, अब्दुल माबूद, हाजी मुज्मिल हुसैन, हाफिज कमरूद्दीन, हाजी मुमताज, हाफिस अब्दुल अहद, मास्टर नौशाद आलम मन्सूरी, मौलाना मोइन उद्दीन अशरफी, हाफिज मिन्हाजउद्दीन क़ादरी, कारी उस्मान बरकाती, हाफिज़ मुहम्मद अरशद अशरफी।

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