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नोएडा में महिला संगठनों द्वारा धूमधाम से मनाया गया महिला दिवस

नोएडा, अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन, घरेलू कामगार महिला संगठन एवं सीटू जिला कमेटी गौतमबुद्ध नगर ने संयुक्त रूप से सेक्टर 62 नोएडा बी ब्लाॅक पार्क में धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम के लिए महिलाएं नवादा गांव के पास मार्किट पर इकट्ठा हुई और सेक्टर-62 नोएडा की आवासीय सोसाइटी में जलूस निकालते हुए कार्यक्रम स्थल सेक्टर-62 नोएडा पार्क पर पहुंची और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सभा शुरू हुई।

सभा को अनुराग सक्सेना, लक्ष्मी नारायण, आशा यादव, रोमा शर्मा, लता सिंह, अशीमा घोष, मामुनी घोष, रेखा शर्मा, रीमा देवी, गंगेश्वर दत्त शर्मा, राम सागर, डाॅ. रूपेश वर्मा एडवोकेट, मदन प्रसाद, भरत डेन्जर, भीखू प्रसाद, विवेकानन्द त्रिपाठी, पवित्रा घोष, शैलीना बीवी, पिंकी, मिथलेश, सुमति, सुनीता, राखी, चन्दा बेगम, मुफ्ती हैदर एडवोकेट लायक हुसैन, धर्मपाल चैहान, सपना, सुमन चैहान, रीमा देवी, सावित्री, अर्चना विमलेश। आदि विभिनन जन संगठनों के वरिष्ठ नेताओं ने सम्बोधित करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के क्रान्तिकारी इतिहास को रेखांकित किया और महिलाओं के साथ भेदभाव, अत्याचार, दहेज, उतपीड़न छेड़छाड, यौन शोषण व घरेलू हिंुसा के खिलाफ अपनी आवाज को बुलन्द करते हुए हक अधिकारों और बेहतर जिन्दगी बनाने के लिए संघर्षों को तेज करने का आह्वान किया और कहा कि जब हम वर्तमान हालात, स्थिति पर नजर डालते हैं तो दिखाई देता है कि वर्तमान सरकार द्वारा संरक्षण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसेे नारे जितने जोर-शोर से दिये जा रहे हैं, महिलाओं का उत्पीड़न उतना ही बढ़ रहा है। लाखों स्कीम वर्कर्स महिलाओं जो आंगनबाड़ी आशा आदि में काम करती है उन्हें अभी तक कर्मचारी घोषित नहीं किया है और वे आज भी आधे-पौने पगार पर काम करने को मजबूर हैं। इसी तरह घर-घर जकर काम करने वाली महिला मजदूरों की स्थिति आज बहुत खराब है उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए आज तक कोई भी कानून नहीं बना है। कई-कई घरों में काम करने के बाद भी परिवार के गुजारे लायक वेतन नहीं मिल पाता है। संसद व विधानसभाओं में महिला आरक्षण बिल आज तक कानून का रूप नहीं ले पाया है तथा कार्य स्थलों पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए बने कानून व सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन नहीं हो पा रहा है और समान काम का समान वेतन देने के लिए बने कानून व सुप्रीम कोर्ट के आदेश देने के बाद भी सरकार उसे लागू नहीं करा रही है तथा सरकार की गलत उदारीकरण की नीतियों से बढ़ती महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी ने महिलाओं की परेशानियों को और बढ़ा दिया है तथा अनेक क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं को गैर बराबरी, उत्पीड़न दमन, अत्याचार व शोषण जैसी विकराल समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

 

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