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निशान-ए-पैक का जुलूस

निशान-ए-पैक का जुलूस
कानपुर। मोहर्रम के मौके पर लोग अपनी मन्नते भी मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर अकीदतमन्द उसे पूरी करते हैं। इसी तरह की मन्नत पैकी बन्ने के रूप में मानी जाती है। मन्नत पूरी होने पर मोहर्रम की पांच तारीख को लोग अपनी कमर में घंटी बांधते हैं नंगे पैर रहते हैं और मोहर्रम की 9 तारीख तक इमाम बाड़ों पर जाकर फातहा पढ़ते है। 10 मोहर्रम को ताजिये के साथ कर्बला जाकर अपनी कमर में बंधी घंटी उतारते हैं। इसे कमर खुलवाना करते हैं। बताया जाता है कि मैदाने कर्बला में जंग के दौरान कमर में घंटी बांध कर संदेश लाने लेजाने का काम करते थे। कानपुर इस तरह की मन्नत का रिवाज काफी समय से चला आ रहा है। इस प्रथा को कानपुर में निशान-ए-पैक के नाम से जाना जाता है।

 

 

 

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