नारी का उत्थान: कन्या भ्रुण हत्या की जिम्मेदार औरतें

नारी का उत्थान: कन्या भ्रुण हत्या की जिम्मेदार औरतें
आज समाज में नारी का महत्तवपुर्ण स्थान है , लेकिन जो उसे मिलना चाहिए, क्या समाज में उसी अवस्था में मिल रहा है । नही आज भी नारी काफी हद तक पिछडी हुई है । कहने को तो आज महिलाएं – पुरूषों  के साथ कंधा मिलाकर चलने में सक्षम हैं । परंतु जो अधिकार पुरूषों  को मिलते हैं वही अधिकार महिलाओं को क्यों नही दिए जा रहे । यदि नही तो क्यों ?  क्या आज के समय में महिलाएं पुरूषों  से किसी भी क्षेत्र में कम हैं  ? पुरूष नारी पर अत्याचार करते समय यह क्यों भुल जाता है कि उसने भी एक नारी के गर्भ से ही जन्म लिया है । वह क्यो भुल जाता है कि जिसने जीने की राह दिखाई वह भी एक नारी ही थी । नारी ने कई रूपों में पुरूषों के लिए कुर्बानी दी हैं । चाहे वह एक मां के रूप में हो, चाहे वह एक बहन के रूप में हो लेकिन पुरूष कभी भी उसकी कुर्बानी समझ नही पाएं । वह हर रूप में नारी पर अत्याचार करता रहा है कई स्थानों पर तो कन्या को पैदा होते ही उसका गला दबा दिया जाता है । वे क्यों भुल जाते हैं कि यदि इसी तरह लड़की का समाज में पैदा होना बंध हो गया तो यह सृष्टि यहीं समाप्त हो जाएगी । आजकल समाज में भ्रुण हत्या बहुत हद तक फैल गई है जिसके लिए काफी हद तक औरत ही जिम्मेदार है । जब सास को पता चलता है कि उसकी बहु को बेटी पैदा होने वाली है तो वह उसकी गर्भ में ही हत्या करवा देती है और वहीं क्यों भुल जाती है कि वह कभी वह भी एक बेटी  ही थी। यदि उसकी मां ने भी उसकी हत्या पेट में ही ऊ करवा देती तो वह इस संसार को कभी नही देख पाती । हम क्यों भुल जाते हैं कि हमें कोई हक नही हैं , कि हम किसी की जिंदगी के साथ खिलवाड करे । यह सृष्टि औरत और पुरूष के संयोग से ही बनी है और वही दोनो के सहयोग से ही चलती है । यदि इन दोनो में से नारी निकाल दी जाए तो क्या सृष्टि आगे बढ़ सकेगी नहीं यदि समाज में भ्रुण हत्या इसी तरह होती रही तो इस सृष्टि का अंत हो जाएगा। वैसे तो समाज में भ्रुण हत्या पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं परंतु आज भी लोग चोरी-छिपे भ्रुण हत्या करने में पीछे नहीं
हैं। हमें भ्रुण हत्या रोकने के लिए प्रतिबंध लगाने की कोई आवष्यकता नहीं हैं। यदि हमारे समाज में पुरूष और स्त्री वर्ग को यह बात समझ में आ जाए तो इस समाज में नारी का अपना एक स्थान हैं। उसे भी जीने का हक है। उसकी यह जिंदगी भगवान की देन हैं। जिसे उससे छिनने का हक इंसानों को नहीं है। तो समाज में भ्रुण हत्या अपने आप ही समाप्त हो जाएगी । पुरूष वर्ग को इस बात का एहसास कराने के लिए हमें बचपन से ही उसके अंदर यह बात डालनी होगी कि उसकी बहन का भी घर की हर चीज पर उतना ही हक जितना की उसका। यदि हम बचपन से ही उनके अंदर ये भेदभाव की भावना निकाल दें तो षायद नारी की समाज में अपनी स्वतन्त्र स्थान मिल सकेगा ।
‘अबला जीवन हाय ! तेरी यही कहानी ।
आंचल में है दूध और आंखों में पानीं।।
हमारा पुरूष प्रधान समाज में नारी को बला कहता है, जबकि यह बात नहीं है। वो यह नहीं जानता की आज वह जो कुछ भी है जिस पद पर भी है वह नारी के बल से ही है । वास्तव में नारी ने पुरूष से कई गुना ऊंची है । परंतु पुरूष उसे अपने समान खड़े होने का हक भी नहीं देना चाहता ।
‘नारी निंदा न करो ,नारी नर की खान ।
नारी से नर होत है ध्रुव प्रहलाद समान ।।
लेखक (किरण बाला)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *