धूम्रपान बढ़ाता है ब्रेन हेमरेज का खतरा

धूम्रपान बढ़ाता है ब्रेन हेमरेज का खतराrahul gupta - S
नौएडा। आधुनिक महिलाओं में सिगरेट पीने का चलन बढ़ रहा है लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट पीने वाली महिलाओं को मस्तिष्क में रक्त स्राव (ब्रेन हैमरेज) का खतरा बहुत अधिक होता है। महिलाओं के लिए कभी – कभार और पार्टियों में कश लगाना भी भारी पड़ सकता है। वैसे तो सिगरेट पीने से पुरुषों एवं महिलाओं – दोनों को ही ब्रेन हैमरेज का खतरा होता है लेकिन महिलाओं को यह खतरा पुरुषों की तुलना में काफी अधिक होता है।
नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन डॉ. राहुल गुप्ता ने आज बताया कि जो महिलाएं दिन में केवल एक बार सिगरेट पीती हैं उन्हें सिगरेट नहीं पीने वाली महिलाओं की तुलना में ब्रेन हैमरेज होने का खतरा करीब तीन गुना होता है जबकि पुरुष दिन में एक सिगरेट पीते हैं उन्हें सिगरेट नहीं पीने वाले पुरूषों की तुलना में ब्रेन हैमरेज होने का खतरा दोगुना होता है। गंभीर किस्म के ब्रेन हैमरेज, जिसे सबरैकनॉयड हैमरेज कहा जाता है, वह दिन भर में एक पैक सिगरेट पीने वाली महिलाओं में आठ गुना अधिक व्याप्त है। जो पुरूष दिन भर में एक पैक सिगरेट पीते हैं  उनमें यह खतरा तीन गुना अधिक होता है।

 

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डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि धूम्रपान सबरैकनॉयड हैमरेज का प्रमुख जोखिम कारक है। हालांकि यह पाया गया है कि सिगरेट छोड़ देने के छह माह बाद ब्रेन हैमरेज होने का खतरा घट जाता है। ब्रेन हेमरेज मस्तिष्क में रक्त वाहिनियों के फटने के कारण मस्तिष्क के ऊतकों में या इसकी सतह पर रक्तस्राव के कारण होता है। यह अचानक हो सकता है या सिर में चोट की वजह से हो सकता है।
डा. राहुल गुप्ता के अनुसार कई बार ब्रेन हैमरेज अनायास (स्पांटेनियस) होता है जो आमतौर पर उच्च रक्तचाप (बीपी) के कारण होता है। अलग-अलग ब्रेन हेमरेज विभिन्न कारणों से होता है। स्पांटेनियस ब्रेन हेमरेज बहुत आम है और करीब 50 प्रतिशत मरीज की किसी टर्शियरी केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराने से पहले ही मौत हो जाती है। सर्जरी से पहले बेहोश हो चुके रोगियों को ठीक होने में कई महीने का समय लग जाता है। दुर्भाग्य से, भारत में पुनर्वास के लिए कुछ ही केंद्र हैं और मरीज को निश्चित उपचार के बाद घर भेज दिया जाता है। इसलिए, रोकथाम और समय पर इलाज के साथ- साथ पुनर्वास पर भी जोर दिया जाना चाहिए।
न्यूरो एवं ब्रेन सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ. राहुल गुप्ता बताते हैं कि सभी ब्रेन स्ट्रोक के 10 प्रतिशत मामले स्पांटेनियस ब्रेन हेमरेज के होते हैं और करीब 50 प्रतिशत मामलों में ये घातक साबित होते हैं। इस प्रकार के ब्रेन हेमरेज के करीब आधे मामलों में उच्च रक्तचाप जिम्मेदार होता है और बाकी ट्यूमर, एन्युरिज्म और वैस्कुलर मालफॉर्मेशन, इंफ्लामेट्री और डीजेनेरेटिव वास्कुलोपैथीज और कोगुलेशन के हीमैटोलॉजिक और एट्रोजेनिक डिसआर्डर के कारण होता है।
डा. राहुल गुप्ता की सलाह है कि सबसे महत्वपूर्ण लगातार निगरानी रखना और दवा और जीवन शैली में परिवर्तन लाकर रक्तचाप को नियंत्रित रखना है। ब्रेन हेमरेज अलसुबह विशेष रूप से सर्दियों में अधिक होता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और समय पर दवा लेना बहुत आवश्यक है। यहां तक कि हल्के सिर दर्द की भी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए और किसी न्यूरोसर्जन/न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।
ब्रेन हैमरेज मस्तिष्क के भीतर होने वाला रक्त स्राव है। यह कई तरह का होता है। इंट्राक्रेनियल हेमरेज में खोपड़ी (स्कल) के भीतर रक्तस्राव होता है, सेरेब्रल या इंट्रासेरेब्रल हेमरेज में मस्तिष्क के भीतर या उसके चारों तरफ रक्त स्राव होता है तथा सबरैकनॉयड हेमरेज में मस्तिष्क तथा मस्तिष्क को घेरने वाले पतले उतकों के बीच रक्त स्राव होता है। इंट्राक्रैनियल हैमरेज या हीमैटोमा (आईसीएच) अक्सर अनियंत्रित उच्च रक्तचाप वाले लोगों में देखा जाता है। कभी कभी, यह धमनी की दीवार में गड़बड़ी (जैसे – एन्युरिज्म, एवीएम) के कारण हो सकता है। सुबरैकनॉयड हेमरेज (एसएएच) एन्युरिज्म के फटने के कारण हो सकता है। ब्रेन हेमरेज का एक अन्य प्रकार सबड्युरल हीमैटोमा (एसडीएच) है जो सिर में चोट लगने के कारण होता है।

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