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देश में निजी विश्वविद्यालयों की बहुत सफल, उत्पादक और सकारात्मक भूमिका : लेफ्टिनेंट जनरल वी.के.शर्मा

देश में निजी विश्वविद्यालयों की बहुत सफलउत्पादक और सकारात्मक भूमिका : लेफ्टिनेंट जनरल वी.के.शर्मा

एमिटी विश्‍वविद्यालय में फैकल्‍टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का पहला दिन

एमिटी में पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला

 ग्वालियर। भारतीय विश्‍वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पर केन्द्रित पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ एमिटी विश्‍वविद्यालय के वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा एवीएसएम ने सरस्वती वंदना के साथ की। इस अवसर पर एमिटी के वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल वी.के.शर्मा एवीएसएम  ने कहा कि देश में निजी विश्वविद्यालयों की बहुत सफलउत्पादक और सकारात्मक भूमिका है। जिसे स्थाई रखने के लिए शिक्षकों को शिक्षण में गुणवत्ताविद्यार्थियों में मजबूत चरित्र का निर्माण और छात्रों की सृजनात्मकता से उत्पादकता को विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि कॉलेज में पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या में भारत वर्ष 2030 तक चीन और अमेरिका से आगे निकल जाएगा। ले.जनरल शर्मा ने शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे शिक्षण को नस्ल निर्माण और राष्ट्र निर्माण के सर्वोच्च पेशे का स्थान दिया जाता है इसीलिए शिक्षण के पेशे की जिम्मेदारियों का मनोयोग से निर्वाह किया जाना चाहिए।

 इसी प्रकार प्रकार प्रो.डॉ.ए.पी.डेश ने कहा कि एक राजा का सम्मान सिर्फ उसके राज्य में होता है लेकिन ज्ञान को हर जगह सम्मानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षकों से बहुआयामी और बहुमुखी प्रतिभा की उम्मीद के साथसाथ तकनीकी कौशल भी अपेक्षित है। उन्होंने बताया कि उत्पादक शिक्षण के लिए शिक्षकों में अपने पेशे के प्रति गर्वस्वप्रेरित कार्यरत रहने और पेशेगत उन्नति की ललक की महत्ती आवश्यकता है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और दलाई लामा के संस्मरण साझा करते हुए शिक्षा व शिक्षण की चुनौतियों को भी रेखांकित किया।वहीं प्रो.एस.जी.देशमुख ने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थी तकनीक और डिजीटल दुनिया में प्रतिदिन समय बिताते हैं ऐसे में बेहतर शिक्षण के लिए शिक्षकों को भी नवतकनीक और संचार के प्रचलित माध्यमों को शिक्षण के औजार के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पढ़ाने के परंपरागत तरीकों के इतर विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक आंकलन के आधार पर सह उत्पादक बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का प्रजातांत्रीकरण करने की आवश्यकता है जिसके तहत शिक्षकों को विद्यार्थियों की अपेक्षाओं का आंकलन करते हुए ज्ञान को क्रियान्वित करने की दिशा में पहल करना आवश्यक है।

सत्र के अंत एमिटी विश्‍वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा एवीएसएम कार्यशाला का विश्लेषण प्रस्तुत किया और एफडीपी के आयोजन सचिव प्रो.(डॉ) एसपी वाजपेई के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया। इस अवसर पर एमिटी विश्‍वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ एमपी कौशिक, रजिस्ट्रार राकेश जैन ,डीन प्रोफेसर डॉ आर एस तोमर , डायरेक्टर मेजर जनरल (डॉ.) एस.सी जैन(वीएसएम), डायरेक्टर डॉ इति राय चौधरी ,सभी एचओआई,  एचओडी  सहित अन्य शिक्षक एवं शोधार्थी भी इस फैकल्‍टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में उपस्थित रहे । 

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