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देश की सुरक्षा के लिए स्वदेशी संचार तकनीक विकसित करना आवश्यक : ले.जनरल वीके शर्मा

एमिटी में संचार, नेटवर्क और साइबर सुरक्षा पर दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का समापन
ग्वालियर (सुनील गोयल)।  विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति उत्सुकता और रूझान पैदा करने के? लिए एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी स्कूल ऑफ़  इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी  में संचार, नेटवर्क और साइबर सुरक्षा  पर दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का समापन एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति  लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा (एवी एसएम) दवारा किया गया। इस अवसर पर कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल वीके र्श मा (एवीएसएम) ने कांफ्रेंस  की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियो को बधाई देते हुए कहा कि शोध छात्रों को अपने शोधकार्यों को ओर तेजी से समाज के विकास के लिए आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने संचार, नेटवर्क और साइबर सुरक्षा से सम्बंधित स्वदेशी एम्वेडेड सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। जिससे भविष्य में देश की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता की संभावना न रहे। इस नेशनल कांफ्रेंस में देशभर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने प्रतिभागिता की तथा देशभर से आए लगभग 160 शोधपत्रों का पाठन किया गया।। ओरल पेपर प्रेजेंटेशन में हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ़ साइंसेज मथुरा की शोधार्थी त्रिशा सिंघल तथा एमिटी विश्वविद्यालय एसेट के संजय चौहान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
इस अवसर मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली से प्रोफेसर डॉ. डीपी विद्यार्थी ने क्लाउड कंप्यूटिंग से सम्बंधित अवसर एवं चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आगामी 2018 तक 90 प्रतिशत भारतीयों को असीमित तथा नि:शुल्क इन्टरनेट सुविधा मिलने लगेगी। वहीँ मनुष्य की जीवन शैली विभिन्न इन्टरनेट सेंसर्स द्वारा नियंत्रित होने लगेगी और रोबोटिक फार्मासिस्ट रोगों का इलाज करने में सक्षम हो जाएँगे। उन्होंने 3डी टेक्नोलॉजी तथा क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते उपयोग एवं खतरों पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि क्लाउड कंप्यूटिंग एक  किफायती, सुरक्षित,लोचदार, पर्यावरणके अनुकूल टेक्नोलॉजी होने के साथ इसके दुरुपयोग होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
सत्र के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी और भारतीय प्रबंधन संस्थान ग्वा लियर से प्रोफेसर प्रोफेसर डॉ केके पटनायक ने ‘आईओटीÓ नेटवर्किंग में प्रयुक्त सेंसर्स के महत्व, सेंसर्स नेटवर्क किस तरह इन्टरनेट पर कार्य करते है, ‘आईओटीÓ में सेंसर्स की भूमिका और इनके इस्तेमाल से मानव जीवन में पडऩे वाले प्रभावों आदि पर विस्तार से जानकारी साझा की। वहीँ साइबर सिक्यूरिटी सेंटर मेनिट, जयपुर के चेयरमैन प्रोफेसर दीपक सिंह तोमर ने डाटा माइनिंग व मोनिटरिंग, साइबर क्राइम तथा साइबर सिक्यूरिटी बिषय पर अपने शोध साझा करते हुए बताया कि वेबसाइट या किसी भी इन्टरनेट मीडिया पर पहचान छुपाना साइबर अपराध है. उन्होंने ‘साइबर-थ्रेटÓ के बढ़ते हमलों और उन्नत तकनीक द्वारा डिवाइस में डाटा सुरक्षित  रखने की महत्वपूर्ण जानकारी प्रतिभागियों से साझा की।
समापन सत्र में राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा से प्रो-वाइस चांसलर प्रो.राजीव गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। ओरल पेपर प्रेजेंटेशन में हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ़ साइंसेज मथुरा के शोधार्थी त्रिशा सिंघल तथा एमिटी विश्वविद्यालय एसेट के संजय चौहान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
समापन सत्र  में एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति  लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा एवी एसएम ने सेमिनार की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियो को बधाई देते हुए कहा कि शोध छात्रों को अपनी रिसर्च को समाज के विकास के लिए आगे बढ़ाना चाहिए.उन्होंने संचार, नेटवर्क और साइबर सुरक्षा से सम्बंधित स्वदेशी एम्वेडेड सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने पर विशेष जोर दिया। जिससे भविष्य में देश की सुरक्षा को लेकर किसी भी समझौते की संभावना न रहे। एमिटी स्कूल  ऑफ टेक्?नोलॉजी के  डायरेक्टर और सेमिनार के संयोजक डॉ अनिल वशिष्ठ, ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ नेशनल कांफ्रेंस का समापन किया।
इस अवसर पर उपकुलपति प्रो.(डॉ.)एमपी कौशिक, रजिस्ट्रार राजेश जैन, डीन अकादमिक प्रो.डॉ.आर. एस. तोमर, डीन रिसर्च प्रो.डॉ.एस.पी वाजपेयी, प्रोफे सर वाई.पी सिंह, डायरेक्टर एचआर अमनप्रीत रंधावा, प्रो.डॉ.सचिन बत्रा, डॉ.इति रॉयचौधरी, प्रो. राघवेंद्र शर्मा ,डॉ.हेमंत सोनी, सहित अन्य फैकल्टी और स्टूडेंट्स मौजूद रहे।

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