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जेटली का सुधारों पर जोर

नई दिल्ली।  भारत के लिए 8-9 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि की संभावना जताते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज संकेत दिया कि आगामी बजट में सिर्फ अच्छी रेटिंग पाने के लिए लोकलुभावन नीतियों का सहारा नहीं लिया जायेगा बल्कि इसमें ढांचागत सुधारों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस जीएसटी कानून की जरूरत को समझेगी और उसे आगामी बजट सत्र में राज्य सभा में पारित कराने में मदद करेगी। संसद का बजट सत्र अगले महीने शुरू हो रहा है।
उन्होंने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत ठोस मंच पर सामने आना होगा। मत भूलिए, कि भारत विश्व के उन कुछ देशों में से है जिन्होंने 2001, 2008 और 2015 के वैश्विक संकट का सफलतापूर्वक सामना किया। वित्त मंत्री ने बुनियादी कारकों की मजबूती पर जोर देते हुये कहा, बजट को ऐसे क्षेत्रों पर गौर करना है जिनमें निवेश की जरूरत है। इसलिए मुझे उस दिशा में जोर देना है। यदि बजट में सिर्फ रेटिंग बटोरने के लिए लोकलुभावन नीतियों को शामिल किया जाता है तो फिर यह जरूरी नहीं कि हम अर्थव्यवस्था की मजबूती या फिर ठोस राजनीति जिस लक्ष्य को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं उसमें मदद मिले। जेटली ने कहा कि सरकार पिछली तारीख से कर दावे नहीं करेगी और कहा कि वह चाहेंगे कि ऐसे दो या तीन मामले जो बचे हैं उनका जल्दी समाधान हो। उन्होंने यहां ईटी ग्लोबल बिजनेस समिट में कहा, भुगतान योग्य कर का संग्रह होना चाहिए लेकिन अनुचित कर नहीं होने चाहिए क्योंकि अनुचित आकलन से नाम खराब होता है और राजस्व भी नहीं मिलता है।
जेटली ने उम्मीद जताई कि कांग्रेस जीएसटी का समर्थन करेगी जिसका लक्ष्य पूरे देश को एक साझा बाजार बनाना है। उन्होंने कहा, ह्यह्यजीएसटी संप्रग का महत्वपूर्ण सुधार है। यदि इसे तैयार करने का श्रेय किसी को देना हो तो यह मैं उन्हीं को दूंगा। अब, यदि लेखक ही अपनी पटकथा के खिलाफ हो जाए तो मैं क्या कर सकता हूं .. मैं उनके पास गया हूं, मैंने उनसे बात की। मैंने उन्हें पूरा ब्योरा दिया और मुझे उम्मीद है कि वे इसकी वजह समझेंगे और जीएसटी पारित कराने के पीछे जो तर्क है उसे समझेंगे। मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को छोड़कर हर पार्टी जीएसटी विधेयक का सक्रिय समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा, राजद, राकांपा और जदयू जैसे संप्रग के सहयोगी दल इसका खुलकर समर्थन कर रहे हैं। मंत्री ने कहा, मुझे कोई वजह नहीं दिखती कि कांग्रस को इस विधेयक के बारे में सोचना चाहिए। यदि विधेयक के किसी विचार पर कोई चर्चा करनी है तो निश्चित तौर पर मैं उनके साथ चर्चा के लिए तैयार हूं, हम दोषपूर्ण कानून बनाकर भावी पीढ़ी पर इसे नहीं थोप सकते। जेटली ने ढांचागत सुधार आगे बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया और कहा कि बुनियादी ढांचा, सिंचाई और कृषि उत्पादकता पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, हममें शायद और वृद्धि की क्षमता है और यह जो हमने प्राप्त किया है उससे कहीं अधिक है। यह 7-7.5 प्रतिशत की वृद्धि हमारी उच्चतम सीमा नहीं है। भारत के लिए सामान्य खंड 8-9 प्रतिशत है। जब आप इस दर से वृद्धि दर्ज करेंगे तभी आप गरीबी से मुक्ति पा सकेंगे। उन्होंने कहा कि विशाल मानव संसाधन, प्रशिक्षित लोग और विशाल बाजार भारत के लिए सकारात्मक है।
उन्होंने कहा, हममें विनिर्माण बढ़ाने की क्षमता है। हममें नवोन्मेषी कौशल है। हमारी श्रम लागत नहीं बढ़ रही है जैसे चीन में बढ़ रही है। चीन में जो हो रहा है उन कारकों अथवा बदलाव का हम हिस्सा नहीं हैं।  वित्त मंत्री ने कहा कि तेल एवं जिंस मूल्य में नरमी के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी है। उन्होंने कहा कि यह नरमी हमारे लिए अच्छी है क्योंकि हम खरीदार हैं।
जेटली ने कहा ऐसी लाभप्रद स्थिति के मद्देनजर हमें अपनी आंतरिक स्थिति ठीक करनी है। मुझे लगता है कि पहली महत्वपूर्ण चीज है ढांचागत सुधार करना। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा, सिंचाई, कृषि उत्पादकता एवं विनिर्माण में सुधार करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
जेटली ने कहा, मुझे लगता है कि इन बदलावों के साथ और भविष्य में इंद्र देवता पिछले दो साल के मुकाबले ज्यादा मेहरबान हों तो भारत के लिए यह लक्ष्य बहुत मुश्किल या असंभव नहीं है।

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