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जरूरी नही की ज्ञान सिर्फ किताबो से लिया जाए

जरूरी नही की ज्ञान सिर्फ किताबो से लिया जाए 

जितने ज्यादा आप विनम्र होंगे उतना ही ज्यादा आप सीख सकेंगे और कर सकेंगे और अगर आप सीखना चाहते है तो उससे पहले आपके पास सीखा हुआ कुछ नही होना चाहिए तभी आप हर पल कुछ नया सीख़ सकेंगे। जो बात आपके दिल को छू जाती है उससे आप जुड़ जाते हो चाहे वो फिल्म हो या आम जिंदगी और फिल्मो की कहानी हमेशा भावनाओ से जुडी होती है।
मैंने लिखने की शुरुआत शादी के बाद की और मेरी हमेशा कोशिश यही रही है की मैं नया अच्छा और खूबसूरत लिख सकु यह कहना था कोई मिल गया, कृष, लम्हे और कहो न प्यार है जैसी बेहतरीन फिल्मे लिखने वाली हनी ईरानी का जो मारवाह स्टूडियो में चल रहे तीन दिवसीय ग्लोबल साहित्यिक समारोह में पहुंची। इस अवसर पर जानी मानी साहित्यकार आशा शैली और सुषमा चौहान के साथ मारवाह स्टूडियो के निदेशक संदीप मारवाह और फिल्म निर्देशक अशोक त्यागी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आशा शैली ने कहा की साहित्यकार का एक अपना चरित्र होता है जिसके साथ वो कभी छेड़छाड़ नही करना चाहता इसलिए लोग साहित्यकार को कई बार अभिमानी भी कह देते है जबकि वो उसका स्वभिमान होता है। 
संदीप मारवाह ने कहा की एक लेखक और साहित्यकार किसी भी शख्स का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही अपनी कविता की रूपरेखा तैयार करता है। बड़ी सोच, लगन व मेहनत होती है एक लेखक में।

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जरूरी नही की ज्ञान सिर्फ किताबो से लिया जाए किसी फिल्म या नाटक को सही ढंग से समझ ले तो वह भी साहित्य है। 

सुषमा चौहान ने कहा की मेरी कहानियो का केंद्र ज्यादातर महिलाए ही होती है क्योंकि महिलाए संवेदनशील, कर्तव्यशील और भावुक होती है । इसीलिए हर पल वो कही न कही एक दर्द सहन करती रहती है।
समारोह में सेमीनार, कार्यशाला, कवि सम्मलेन, कविताएं, नृत्य नाटिका, पेंटिंग प्रदर्शनी के साथ साथ छात्रों द्वारा कई रंगारंग कार्यक्रमों के साथ कठपुतली और राजस्थान फोक डांस का भी आयोजन किया गया।
 

 

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