जनता के प्रति पुलिस का व्यवहार एंव कर्तव्य


पुलिस सेवा एक ऐसी सेवा प्रदान करती है । जिससे जिन्दगी को काफी नजदीकी से देखा जा सकता है । जीवन के हर पहलू का अनुभवों के माध्यम से सभी रसो का आस्वादन किया जा सकता है । प्रेम करूणा, वात्सलय, क्रुरता, निर्दयता  आदि सभी भावनाएं देखने को मिलती हैं । दुसरे षब्दों में पुलिस सेवा मानव जीवन एंव व्यवहार के अध्यन का एक अच्छा षुभ अवसर प्रदान करती है । लोक प्रषासन के अन्र्तगत प्रलिस एक महत्तवपुर्ण ईकाई होती है । जनता कि सुरक्षा व कलयाण का दायित्व प्रलिस पर निर्भर रहता है व समाज में षांति सदभावना बनाए रखने की व्यवस्था पूलिस की जिम्मेवारी होती है । प्रलिस का कार्यक्षेत्र बडा है । और उसके कार्यो में परिवर्तन हुआ है । प्रलिस का कर्तव्य केवल कानुन व्यवस्था  ही नही रहा वह बेसहारा और गरीबो की सेवा भी करती है । सन्त सिरोमवी तुलसीदास ने भी कहा है ।
परहित सरिस धर्म नही भाई , पर पीडा सम नही अर्धम भाई ।
निर्णय सकल  पुराण वेदकर कहेउ तात जानेहि कोविद नर ।
अर्थात हे भाई परोपकार के समान कोई दुसरा धर्म नही है और दुसरो को दुख  पहॅुंचानें के समान हे तात् समक्ष पुराण और वेदो का यह सिद्धान्त मैंने तुम से कहा है । इस आपत् को पिडित लोग ही जानते हैं ।
सन्त सिरोमणी तुलसीदास ने लिखा कि जब कभी जन सेवा की भर्ती में साक्षाताकार के समय यह प्रष्न किया जाता है कि आप किसलिए किस पद पर  भर्ती होना चाहते हैं । तो सामान्य उत्तर यही मिलता है कि जन सेवा करने के लिए किन्तु नियुक्ति हो जाने पर जन सेवा पिछे छुट जाती है और स्वामी सिद्धि आगे – आगे चलने लगती है । हर्ष वास्तविकता यह है कि स्वामी और सेवा धर्म से बडा विरोध है । और सवार्थ के लिए  दुखियों की पीडितों की सेवा करना बडा कठिन है । सेवा स्वामी धर्म है तथा स्वार्थ अपना हित साधना आपने हित साधन में लिप्त प्राणी स्वामी का हित नही कर सकता जिससे पुलिस प्रषासन आपने कर्तव्य से विचलित हो जाता है और जनता कि समस्याओं को नही सुन पाते जिसके कारण तमाम घटनाएं घट जाती हैं । जनता को यह विष्वास रहता है कि हर रिर्पोट पर कार्यवाही होगी लेकिन ऐसा नही होता प्रलिस का कत्र्तव्य सेवा का निर्वाह सर्वस्व त्याग कर दुसरों की सेवा करना पुलिस का कत्र्तव्य होता है । मानव सेवा के नाते सामान्य व्यक्ति की सेवा करना पुलिस का कत्र्तव्य होता है । जनता की सुरक्षा व कलयाण का दायित्व पुलिस पर निर्भर रहता है व समाज में षांति सद्भावना बनाए रखने की व्यवस्था पुलिस की जिम्मेदारी होती है।
लेखक डीएल तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार हरियाणा)

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