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“चेंज योर हैंड राइटिंग टू चेंज योर पर्सनालिटी”: वाई. मल्लिकार्जुन राव

 “चेंज योर हैंड राइटिंग टू चेंज योर पर्सनालिटी”: वाई. मल्लिकार्जुन राव

आपके व्यक्तित्व का आइना है लिखावट

एमिटी में ग्राफोथरेपी’ बिषय पर एक दिवसीय नेशनल वर्कशॉप आयोजित 

 ग्वालियर (सुनील गोयल)। आपका व्यवहार, विचारधारा आपकी लिखावट से झलकती है इसीलिए हैंडराइटिंग को ‘ब्रेन राइटिंग’ कहा जाता है। ‘ग्राफोथरेपी’ से न केवल मानसिक समस्याओं का पता लगाया जा सकता है बल्कि इसमें बदलाव लाकर काफी हद तक उन्हें दूर भी किया जा सकता है। एमिटी विश्विद्यालय मध्यप्रदेश के एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा ‘ग्राफोथरेपी’ बिषय पर आयोजित  एक दिवसीय नेशनल वर्कशॉप के अवसर पर नेशनल हैंड राइटिंग एकादमी हैदराबाद के डायरेक्टर वाई.मल्लिकार्जुन राव ने बताया कि हैंड राइटिंग से आपके जेहन में चल रहे विचारों का पता चलता है, इसलिए कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं का पता हैंड राइटिंग से चल सकता है। उन्होंने कहा कि हैंड राइटिंग से न केवल मानसिक समस्याओं का पता लगाया जा सकता है बल्कि इसमें बदलाव लाकर काफी हद तक उन्हें दूर भी किया जा सकता है। वाई.मल्लिकार्जुन राव ने कहा, ‘हैंड राइटिंग के अध्ययन को ‘ग्राफोलॉजी’ और इसमें बदलाव लाकर किए जाने वाले इलाज को ‘ग्राफोथरेपी’ कहते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हदय रोग, रक्तचाप, मस्तिष्क में रक्तप्रवाह संबंधी कुछ बीमारियों का पता हैंड राइटिंग देखकर लगाया जा सकता है। बीमारी के शुरुआती दौर में यह किसी भी व्यक्ति की लिखावट में अपनी छाप छोडती हैं, लेकिन यह चिकित्सीय संकेतक की तरह होता है और इसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर आदि की मदद अवश्य लेनी चाहिए।’
 वाई.मल्लिकार्जुन राव डायरेक्टर- नेशनल हैंड राइटिंग एकादमी हैदराबाद से बातचीत के मुख्य अंश :-      “चेंज योर हैंड राइटिंग तो चेंज योर पर्सनालिटी”
– आज के कंप्यूटर और ईमेल के युग में हाथ से चिट्ठी, आवेदन पत्र आदि लिखने की गुंजाइश भले ही कम हुई हो, लेकिन हैंड राइटिंग किसी भी शख्स के व्यक्तित्व का आइना होते हैं।
– वाई.मल्लिकार्जुन राव ने कहा ‘लापरवाह लोगों की लिखाई में अक्षर बहुत बेतरतीब ढंग से लिखे होते हैं, जबकि अनुशासन प्रिय लोग बहुत सावधानी से जमाकर लिखते हैं।आपका व्यवहार, विचारधारा आपकी लिखावट से झलकती है।’ दरअसल हैंड राइटिंग को ‘ब्रेन राइटिंग’ कहा जाता है।
-‘अपराधियों को पकड़ने, जाली हस्ताक्षर आदि के मामलों में तो हैंड राइटिंग के महत्व के बारे में काफी लोग जानते हैं, लेकिन कम लोगों को पता है कि इसकी मदद से किसी व्यक्ति के व्यवहार, उसकी प्रवृत्ति, जीवनशैली आदि के बारे में भी जाना जा सकता है।’ लिखाई की बनावट किसी व्यक्ति के बारे में जानने में अहम भूमिका निभाती है।
– उन्होंने कहा, ‘12-15 साल तक तो बच्चे को माता-पिता या स्कूल के शिक्षक जैसा बताते हैं, वह उसी तरह लिखने की कोशिश करता है, लेकिन इसके बाद उसकी अपनी शैली विकसित होना शुरू हो जाती है, जो उसके व्यक्तित्व पर निर्भर करती है। यह प्रक्रिया 18 से 24 साल तक पूर्ण हो जाती है।’
– उन्होंने बताया कि ‘हैंड राइटिंग की मदद से किसी व्यक्ति में तनाव आदि के संकेत मिल जाते हैं। यदि किसी में आत्महत्या का विचार हो तो यह भी इसे देखकर पता लगाया जा सकता है।’
– श्री राव ने कहा कि आजकल तो कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी हैंडराइटिंग में आवेदन लेती हैं और उनके विश्लेषण के आधार पर कर्मचारियों का चयन करती हैं। हालांकि यह विधा ‘एप्लाइड साइंस’ की श्रेणी में मानी जाती है और इसे ‘परफेक्ट साइंस’ में नहीं रखा गया है।’
व्‍याख्‍यान के अंतिम सत्र के दौरान डायरेक्टर एसेट मेजर जनरल डॉ.एससी जैन(वीएसएम)  ने लेटरल थिंकिंग पर प्रतिभागियों को हैंड्स ऑन ट्रेनिंग के द्वारा विस्तृत जानकारी साझा की और धन्‍यवाद ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान एमिटी विश्विद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ.एमपी कौशिक द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्रों से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एमिटी विश्विद्यालय के रजिस्ट्रार, डीन रिसर्च प्रोफेसर डॉ. एसपी बाजपेयी, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. पंकज मिश्रा व डॉ.मनीषा सिंह  सहित सभी फैकल्टी एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

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