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कन्हैया और अन्य के खिलाफ अुनशासनात्मक कार्रवाई पर रोक

कन्हैया और अन्य के खिलाफ अुनशासनात्मक कार्रवाई पर रोक
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार एवं अन्य के खिलाफ अुनशासनात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि विश्वविद्यालय के आदेश के खिलाफ उनकी अपील पर अपीलीय प्राधिकरण द्वारा निर्णय सुनाए जाने तक यह रोक जारी रहेगी। वहीं, हड़ताली छात्रों ने भी हाईकोर्ट के कहने पर तुरंत अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली है। साथ ही छात्रों ने आश्वासन दिया है कि विश्वविद्यालय में कार्य में कोई व्यवधान नहीं डालेंगे।
इससे पहले जस्टिस मनमोहन की पीठ ने शुक्रवार सुबह छात्र संघ अध्यक्ष व अन्य छात्रों को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को तत्काल समाप्त करने को कहा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती देने वाली छात्रों की रिट याचिकाओं पर तभी सुनवाई की जाएगी, जब वे आंदोलन खत्म करेंगे। हाईकोर्ट ने कन्हैया से यह हलफनामा भी मांगा था कि वह विश्वविद्यालय को सही ढंग से काम करने देंगे और वहां कोई आंदोलन नहीं होगा। ये छात्र पिछले 16 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन से कन्हैया को यह कहने के लिए कहा कि वह छात्रों से हड़ताल खत्म करने को कहे। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कन्हैया छात्र नेता हैं। यदि वह छात्रों से कहेंगे तो वे उनकी बात मानेंगे और हड़ताल समाप्त कर देंगे। आप इस आंदोलन को वापस लीजिए क्योंकि आप ऐसा कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने छात्रों की याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा है कि यह समय विश्वविद्यालय में परीक्षाओं का है। ऐसे में इस तरह का प्रदर्शन कर समय बर्बाद न किया जाए। छात्र परीक्षाओं में ध्यान लगाएं। हाईकोर्ट ने साथ ही यह भी कहा कि ध्यान रखा जाए कि पत्रकारों को बेवजह की खबर बनाने का मौका न दिया जाए।
बचाव पक्ष द्वारा भविष्य में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गलत रुख अख्तियार करने पर विरोध जारी रखने की मांग की। जिस पर हाईकोर्ट ने छात्रों को स्पष्ट किया कि वह अपने आप को शांत रखं। यदि भविष्य में उन्हें किसी अधिकारी या विभाग के समक्ष अपनी बात रखनी हो तो वह शांतिपूर्वक तरीके से अपना पक्ष रखें।
कन्हैया व अन्य छात्रों को मिली इस अंतरिम राहत में उमर खालिद व अनिर्बान शामिल नहीं है। हाईकोर्ट ने इन दोनों छात्रों को कोई राहत नहीं दी है। इन्होंने भी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उनकी बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि इन दोनों छात्रों के खिलाफ कार्रवाई उच्च स्तरीय जांच समिति की सिफारिश पर की गई है।
कन्हैया, अश्वती ए नायर, ऐश्वर्या अधिकारी, कोमल मोहिते, चिंटू कुमारी, अनवेषा चक्रवर्ती और दो अन्य ने उनके खिलाफ जारी किए गए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आदेश को चुनौती दी थी। उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने इस सप्ताह उनकी बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट का रूख किया था। उमर पर 20 हजार रुपये का जुमार्ना भी लगाया गया है। अनिर्वान को जेएनयू परिसर में 23 जुलाई से लेकर पांच साल तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस साल नौ फरवरी को आयोजित हुए विवादास्पद समारोह के चलते कन्हैया, अनिर्बान और उमर पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया था। इनपर विश्वविद्यालय ने 10 हजार रुपये का जुमार्ना भी लगाया था।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई:- बीते नौ फरवरी को जेएनयू में हुए इस विवादित समारोह के संबंध में उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन तीनों और कुछ अन्य छात्रों के खिलाफ विभिन्न कार्रवाइयां की गई थीं। इनमें बर्खास्तगी से लेकर, विश्वविद्यालय में आने पर प्रतिबंध और जुमार्ना आदि शामिल हैं। याचिकाकतार्ओं ने हाईकोर्ट का रूख करके विश्वविद्यालय द्वारा इनपर लगाए गए जुमार्नों को चुनौती दी है। बाद में छात्रों ने कहा कि यदि उन्हें विश्वविद्यालय की किसी भी कार्रवाई से सुरक्षा देने का आश्वासन दिया जाता है तो वे आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हो सकते हैं। छात्रों ने याचिका में विश्वविद्यालय द्वारा इनपर लगाए गए जुमार्नों को चुनौती दी है। इसके साथ ही इन्होंने दो छात्रों से हॉस्टल सुविधाएं वापस लिए जाने को भी चुनौती दी है। इन दो छात्रों में से एक लड़की है।

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