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एमिटी विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगि की सम्मेलन-2017 का आयोजन

एमिटी विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगि की सम्मेलन-2017 का आयोजन
नोएडा (अनिल दुबे)। एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ  इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड एमिटी टेक्निकल प्लेसमेंट सेंटर द्वारा छात्रों को उद्योग, शोध, नवाचार में सूचना प्रौद्योगिकी के महत्व पर सूचना प्रौद्योगिकी सम्मेलन 2017 का आयोजन आईटू ब्लाक सभागार में किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ टाटा ग्रुप के एडिशनल जीएम एंव स्पेशल कंस्युमर गु्रप के एचओडी रविन्द्र जोशी, सूक्ष्म, लघु एंव मध्य उद्यम के निदेशक डा आर के पाणिग्रही, इनोबल आईपी की संस्थापक श्वेता सिंह,  स्टार्टप इंडिया की आस्था ग्रोवर, एनआईएक्सआई में इलेक्ट्रोनिक एव सूचना प्रौद्योगि की मंत्रालय के सलाह कार हरिश चैधरी, एनडीएमए के निदेशक बी एस अग्रवाल, एनटीपीसी के आर के चैहान, एआईएमए के रवि जंागरा, न्यूज कोरपोरेशन की एच आर हेड शिप्रा लावानिया, एमिटी टेक्निकल प्लेसमेंट सेंटर के निदेशक डा अजय राणा एंव एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ  इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी के निदेशक डा सुनील खत्री ने पारम्परिक दीप जला कर किया।
इस सम्मेलन में विभिन्न परिचर्चा सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम परिचर्चा सत्र का विषय नवाचार रणनिती से सूचना प्रौद्योगिकी में परिवर्तन कैस ेसंभव था। जिसमें सत्र के सभा पति सूक्ष्म, लघु एंव मध्य उद्यम के निदेशक डा आर के पाणिग्रही थे और अन्य अतिथियों ने अपने विचार रखे।
टाटा ग्रुप के एडिशनल जीएम एव स्पेशल कंस्युमरगु्रप के एचओडी रविन्द्र जोशी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज कई आईटी कंपनिया जैसे इंटेल, आईबीएम, सिस्को आदि पावर वितरण में काम करने की इच्छुक है। कई देषों एंव स्थानों पर कर भीर ही है। उर्जा वितरण मीटर में विद्युत का वितरण, मीटर की रीडिंग, बिल प्रदान करना एवं बिल का भुगतान सहित शिकायत दर्ज में सूचना प्रौद्योगिकी का काफी बड़ा उपयोग हो सकता है। आईटी क्षेत्र के छात्रों के लिए काफी सारे अवसर उपलब्ध है। आप नौकरी करने की बजाय नौकरी प्रदाता बन सकतेहै।
पेजट्रैफिकटीआइइ के संस्थापक नवनीत कौशल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हर साल देश में 16 लाख छात्र इंजिनियर बनते है जिसमें से लगभग 2लाख सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आते है। सूचना प्रौद्योगिकी के छात्रों हेतु दस उच्च कौशल तावाले रोजगार जैसे वेब प्रोडक्षन, प्रोडक्ट डिजाइनर, डिजिटल मार्केटिंग, मोबाइल डेवलपमेंट प्रोडक्षन, रिसर्च एडं डेवलपमेंट इंजिनियर, क्वालिटी विश्लेशक आदि उपलब्ध है।
इनोबल आईपी की संस्थापक श्वेता सिंह ने छात्रों से कहा कि हम नवोन्मेश करते हैं लेकिन प्रतियोगिता नहीं। आप लोगों को आपरेशन लइनोवेशन पर अधिक ध्यान देनाचा हिए जिसमें आप उसीकार्य को विभिन्न तरीके से करते हो जिससे श्रम, समय एवं धन की बचत होती हो।
स्टार्टप इंडिया की आस्थाग्रोवर ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा किन विचार से उद्यम क्षेत्रों में बदलाव आ रहा है। उन्होनें छात्रों का आह्वान करते हुए कहा कि रोजगार मांगने की बजाय रोजगार प्रदाता बनें। अगर आपके पास कोई विचार या आइडिया है जिससे समस्या का निवारण हो सकता है तो उसे इंक्युबेशन सेंटर पर बताये और अपने उद्यम को प्रांरभ करने में सहायता प्राप्त करें। ग्रोवर ने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय में एमिटी इनोवेशन इंक्यबेटर की सुविधा उपलब्ध है जो आपके विचारों को उद्यम बनने में पूरा सहयोग प्रदान करेगा।
एआईएमए के रवि जंागरा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहाकि नवोन्मेश का अर्थ केवल नये उत्पाद विकसित करना नहीं होता बल्कि बाजार में बदलाव लाना होता है। अगर आप अपनी उत्पाद के विक्रय रणनिती में बदलाव लाकर उत्पाद को बेच रहे हो तो वो भी नवोन्मेश है। जांगरा ने कहा कि नवोन्मश ग्राहकों की मानसिक स्थिती में बदलाव लाना भी है। इस अवसर पर एनडीएमए के निदेशक बी एस अग्रवाल, एनटीपीसी के आर के चैहान ने छात्रों को जानकारी दी।

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एमिटी विश्वविद्यालय में ” विभिन्न परिपेक्ष्यों में भारत के वनों मे आग का पुर्नलोकन विषय पर कार्यशाला का शुभांरभ

 एमिटी विश्वविद्यालय में ” विभिन्न परिपेक्ष्यों में भारत के वनों मे आग का पुर्नलोकन विषय पर कार्यशाला का शुभांरभ

नोएडा  एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिर्सोस एंड ससटेनेबल डेवलपमेंट एंव इंडियन कांउसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसज़्च एंड एजुकेशन एंव उत्तराखंड वन विकास निगम, देहरादून के सहयोग से आज ” विभिन्न परिपेक्ष्यों मे भारत के वनों मे आग का पुर्नलोकन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ एफ वन ब्लाक सभागार, एमिटीविश्वविद्यालय में किया गया। इस कायज़्षाला का शुभारंभ पूवज़् कृषि मंत्री डा सोमपाल सिंह शास्त्री, नेशनल रिमोट सेसिंग सेंटर के फॉरेस्ट एंव इकोलॉजी के समूह निदेशक डा सी एस झा, इंडियन कांउसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसज़्च एंड एजुकेषन के रिटायज़्ड डायरेक्टर जनरल डा अष्विनी कुमार, एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिसोज़्स एंड ससटेनेबल डेवलपमेंट के सलाहकार प्रो बी के पी सिन्हा, एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिसोज़्स एंड ससटेनेबल डेवलपमेंट की निदेषिका डा इंद्राणी चंद्रषेखरन ने पांरपरिक दीप जलाकर किया। इस कायज़्षाला मे 50 से अधिक वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों जिसमे (आइएफएस, पीसीसीएफ, सीसीएफ, डीसीएफ, एसडीओ आदि) एंव एनजीओ के सदस्यो सहित छात्रों, शोधार्थियों एंव पीएचडी करने वाले छात्रों ने भी हिस्सा लिया है।
पूर्व कृषि मंत्री डा सोमपाल सिंह शास्त्री ने कार्यशाला मे संबोधित करते हुए कहा कि वनों मे लगने वाली आग कई प्रजातियों, पौधों, पेड़ों, वन्य जीवों, आदि को नुकसान पहुंचाती है। उन्होने कहा कि प्राचीन समय में वनों को जलाकर उसकी भूमि का उपयोग किया जाता था लेकिन उसे प्रकिया द्वारा सीमीत स्थान एंव समय के जरीए उपयोग किया जाता था जिससे नुकसान अत्यंत कम होता था। डा शास्त्री ने कहा कि कुछ पौध प्रजातियां आग लगने के बाद पुन: पनपती है। पहले लोग वनों पर भोजन एंव अन्य वस्तुओं के लिए अधिक आधारित थे किंतु आज वनों के अनुपात में जनसंख्या अधिक है और वन कम। यह खतरे की घंटी है इसलिए वनों मे आग को रोकना आवश्यक है। उन्होनें कहा कि निती निर्धारकों को वनों मे फैलने वाली आग को रोकने हेतु अलग से बजट का प्रावधान रखना चाहिए जिस साल यह बजट उपयोग मे ना आये तो उसे किसी अन्य मद मे खर्च किये बगैर अगले वषज़् के बजट मे जोड़ देना चाहिए। डा शास्त्री ने कहा कि वनों मे लगने वाली आग का नुकसान सिर्फ वहां खड़े पेड़ों और उनकी लकड़ीयों की कीमत से नही लगाना चाहिए बल्कि वहां मौजूद पौधों एंव वन्य जीवों की प्रजातियां, औषधीय पौधे, विशेष प्रजाती के पौधे एंव जीव आदि के नुकसान सहित मृदा का क्षरण, जल को रोकने वाले पौधों, घासों एंव जड़ों का नुकसान, वर्षा के लिए पेड़ो द्वारा बनने वाले बादलों का नुकसान, भी शामिल होना चाहिए। उन्होने कहा कि वन एक ऐसा स्थान है जहंा विज्ञान एंव ज्ञान के विभिन्न विषय जैसे माइक्रोबायलॉजी, बायो केमेस्ट्री, बायोतकनीकी आदि की षिक्षा प्राप्त होती है। वनों को आग से बचाना अत्यंत आवष्यक है।
नेषनल रिमोट सेसिंग सेंटर के फॉरेस्ट एंव इकोलॉजी के समूह निदेशक डा सी एस झा ने कायज़्षाला में संबोधित करते हुए कहा कि नेशनल रिमोट सेसिंग सेंटर के बारे मे बताते हुए कहा कि हम सेंटर मे सैटलाइट से डाटा प्राप्त करते है और उसका अध्ययन करके रिपोज़्ट तैयार करते है। हमारे देश मे लगभग 99 प्रतिषत आग जमीनी होती है। डा झा ने एक्टिव फायर एलिमेंट – भुवन एंव विजिबल इंनफियरड इमेजिन रेडियोमीटर सैटेलाइट (विआईआरएस) के बारे मे विस्तृत जानकारी प्रदान की। डा झा ने जले हुए स्थान का मूल्याकंन के बारे मे बताते हुए कहा कि हमारी प्रथमिकता वनों मे फैल रही आग को रोकने की होती है और उसके उपरंात तुंरत मूल्यांकन एंव नुकसान के बारे मे बताना मुष्किल होता है। उन्होने अप्रैल एंव मई मे उत्तराखंड के वनों मे लगी आग के बारे मे जानकारी भी दी।
इंडियन कांउसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसज़्च एंड एजुकेशन के रिटायज़्ड डायरेक्टर जनरल डा अश्विनी कुमार ने कहा कि प्राचीन समय मे वनों को जलाकर भूमि को कृषि, स्थान के लिए उपयोग मे लाया जाता था। आज भी कई स्थानों पर सह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। डा कुमार ने कहा कि वनों मे आग की समस्या सिफज़् भारत मे नही है बल्कि पूरे विष्व मे व्यापक तौर पर व्याप्त है। विभिन्न स्थान के आधार पर सघनता तेज या कम होती है। वनों के आग से लकडिय़ों सहित वनस्पतियों एंव प्रजातियों को नुकसान तो होता है, आग से उठने वाले धुंए से ग्लोबल वामिंज़्ग एंव अन्य स्वास्थय संबधी समस्याये उत्पन्न होती है। उन्होने कहा कि 90 प्रतिषत वनों मे आग मनुष्यों से जाने या अनजाने मे लगती है। कई बार छोटी सी घटना भी बड़े आग की घटना को जन्म दे देती है। प्राकृतिक घटना – जैसे बिजली एंव हवा से कई बार वनों मे आग की घटना हो जाती है। उन्होने कहा कि वनों मे आग जैसी घटनाओ को कम करने लिए लोगो को जगारूक करना आवष्यक है।
एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिर्सोस एंड ससटेनेबल डेवलपमेंट की निदेषिका डा इंद्राणी चंद्रषेखरन ने अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि एमिटी सदैव इस प्रकार के कायज़्क्रमों द्वारा वन विभाग से जुड़े अधिकारियों, निति निधाज़्रकों, शोधार्थियों एंव छात्रों को एक मंच पर लाने का कायज़् करता है। इस कायज़्षाला की सफलता तभी है जब इसमें हम सभी की सहभागीता हो। आप वनों की आग के परिपेक्ष्य मे अपने अनुभवों, समस्याओं एंव विचारों को रखे। देष मे कुछ राज्य जैसे उत्तराखंड, मिजोरम, आंध्र प्रदेष, मणीपुर आदि मे वनों मे आग की समस्या अक्सर देखी गई है जिसका निवारण हम सभी को मिलकर करना है।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कार्यशाला पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
तकनीकी सत्र के अंतज़्गत पूवज़् पीसीसीएफ डा इरषाद खान, इंडियन कांउसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसज़्च एंड एजुकेशन के निदेशक – एफएसआई के साइबल दासगुप्ता ने ”देश मे वनों मे आग- निती, स्ट्रैटजीÓÓ पर, यूएसएआईडी के टाराटेक, फॉरेस्ट प्लस के सीनीयर एडवाइजर डा सुशील सैगल, आईआईआरएस फॉरेस्ट फायर डेंजी इंडेक्स के डा अरजीत रॉय ने ” कंरट फायर स्टेटस – डाटा, मेथड एंव डाक्यूमेंटषन ÓÓ पर अपने विचार रखे।

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