शिक्षा/टेक्नालाजी समाचार

एमिटी विश्वविद्यालय में अफ्रीकी प्रतिभागीयों में उद्यम विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

नोएडा (अनिल दुबे)। एमिटी विश्वविद्यालय के सर रिर्चड रॉर्बट सेंटर फॉर जेनेटकली मॉडिफाइड ऑरगेनिस्म द्वारा बायोटेक कंसोरियम इंडिया लिमिटेड एंव विदेश मंत्रालय के सहयोग से छह देशों के 15 अफ्रीकन प्रतिभागीयों हेतु प्लांट टिशु कल्चर में उद्यम विकास पर तृतीय इंडो अफ्रीकन इंटरनेशनल प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ बायोटेक कंसोरियम इंडिया लिमिटेड के डीजीएम डा षिव कांत शुक्ला, एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती, एमिटी इंटरनेशनल सेंटर फॉर पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी के चेयरमैन डा सुनिल सर्न एंव एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक डा चंद्रदीप टंडन ने किया। इस अवसर पर एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी की डा आभा अग्नीहोत्री एंव सर रिर्चड रॉर्बट सेंटर फॉर जेनेटकली मॉडिफाइड ऑरगेनिस्म की कोआर्डीनेटर डा सुष्मिता शुक्ला भी उपस्थित थी।
एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न देश जैसे केनिया, युगांडा, तंज़निया, नाइजीरिया, जॉम्बीया एंव चाड से 15 अफ्रीकी प्रतिभागीयों ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागीयो को विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, प्रयोगशाला में तकनीकी प्रयोगिक जानकारी जैसे स्टरलाइज टेकनीक, प्लांट टिशु कल्चर में मशीनी उपकरणों की जानकारी सहित उत्पादों को व्यवसायिकरण और वित्तीय प्रबंधन की जानकारी प्रदान की जायेगी।
बायोटेक कंसोरियम इंडिया लिमिटेड के डीजीएम डा षिव कांत षुक्ला ने प्रतिभागीयों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उदेदश्य कृषि क्षेत्र में उद्यम विकास को प्रोत्साहित करना है। जनवरी 2017 से प्रारंभ किये गये इस प्रषिक्षण कार्यक्रम के जरीए अब तक 22 देशों के 109 अफ्रीकन प्रतिभागीयों को प्रषिक्षित किया गया है और स्न 2020 तक 270 से अधिक प्रतिभागीयों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। आपके इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एमिटी द्वारा व्यवसायिक प्लांट टिशु कल्चर पर केन्द्रीत करते हुए आपको व्यवसायिक प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित किया जायेगा जो आज के अफ्रीकन माइक्रो प्रोपागेषन उद्यम की मांग है। हर दिन प्रतिभागीयों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों एंव शोधार्थियों द्वारा व्याख्यान दिया जायेगा।


एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर षुक्ला ने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा दिये जा रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उदेदश्य अफ्रीकन प्रतिभागीयों को प्लांट टिशु कल्चर के प्रभाव से अवगत करना एंव उन्हे प्रयोगिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। जिससे वे इंडियन प्लांट टिषु कल्चर इंडस्ड्री की सफलता को अफ्रीकी देशोंं में दोहरा सकें। यह प्रशिक्षण द्वारा को इस क्षेत्र में उद्यम विकास हेतु प्रोत्साहित भी करेगा। किसी भी देश का यह बहुत ही मुख्य एंव महत्वपूर्ण कार्य होता है कि वो भोजन उत्पादो ंकी गुणवत्ता एंव मात्रा को बढ़ाने के लिए शोध कार्य करें ऐसे में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आपको उद्यम बनने में सहायता प्रदान करेगा।
एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी इनोवेषन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने संबोधित करते हुए कहा कि इस 21 वी सदी में भारत एंव अफ्रीकी देश मिलकर कार्य करेगें और क्रांतीकारी परिवर्तन आयेगा। टिशु कल्चर एंव बायोतकनीकी के क्षेत्र में हो रहा षोध एंव नवोन्मेश समुचे विश्व के लिए लाभकारी होगा। बढ़ती आबादी एंव निर्माण कार्य सें खेती की भूमी कम हो रही है इसलिए टिशु कल्चर के जरीए हरित क्रंाति की आवश्यकता है। आप टिशु कल्चर का व्यवसायिकरण करके व्यापार कर सकते है और नौकरी करने की बजाय रोजगार प्रदाता बन सकते है।
एक अफ्रीकन प्रतिभागी केनिया के नूलैड लिमिटेड के एग्रीबिजनेस विभाग के जोसफ कमाटा ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उपयोग करके वे अपने देष में प्लांट टिशु का व्यवसायिकरण करके अपना उद्यम प्रारंभ करेंगे। केनिया के जार्ज ओटियेनो ने कहा कि यहां प्राप्त प्रशिक्षण की जानकारी से वे अपने देष में गन्ने का उत्पादन को बढ़ाने मे मदद करेगें।

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