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एमिटी विश्वविद्यालय में असंक्रामक रोगों पर राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का शुभारंभ

 

एमिटी विश्वविद्यालय में असंक्रामक रोगों पर राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का शुभारंभ

नोएडा (अनिल दुबे)। एमिटी इंस्टीटयूट आॅफ फार्मेसी द्वारा भारत सरकार के केद्रीय आयुश मंत्रालय एंव नोएडा के डा डीपी रस्तोगी केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान द्वारा असंक्रामक रोगों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का आयोजन एफ टू ब्लाक सभागार एमिटी विश्वविद्यालय में किया गया। इस सम्मेलन का शुभारंभ आयुश मंत्रालय के सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा, आयुश मंत्रालय की सहायक सलाहकार डा (श्रीमती) कवंल सेठी ( होम्योपैथी ), केंद्रीय होम्योपैथी संस्थान के महानिदेशक डा आर के मनचंदा, एमिटी विश्वविद्यालय के हेल्थ एंड एलाइड सांइस के डीन डा बी सी दास, नेहरू होम्योपैथीक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के पूर्व प्रधानाचार्य डा वी के खन्ना, राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन के आयोजन समिती के चेयरपरसन बीएस आर्या एंव डा डीपी रस्तोगी केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा योगेन्द्र राय ने पांरपरिक दीप जलाकर किया। आयुष मंत्रालय के सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने एमिटी को सम्मेलन के सहयोग हेतु धन्यवाद देते हुए कहा कि इस सम्मेलन में चार मुख्य क्षेत्र जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कर्क रोग एंव दीर्घकालिक प्रतिरोधी फेफड़े संबधी रोग पर चर्चा की जायेगी। उन्होनें कहा कि यह दो दिवसीय सम्मेलन होम्योपैथी दवाओं की वैज्ञानिक वैधता को मजबूत करने मे सहायक होगा। इसके साथ असंक्रामक रोग से बचाव में भी होम्योपैथी औषधियों के हर संभव योगदान पर भी चर्चा होगी।
आयुष मंत्रालय की सहायक सलाहकार डा (श्रीमती) कवंल सेठी ( होम्योपैथी) ने संबोधित करते हुए कहा कि होम्योपैथी के वैज्ञानिक एंव साक्ष्य आधारित अध्ययन को तेजी से स्वीकार किया जा रहा है। असंक्रामक रोग बढ़ते शहरीकरण एंव पर्यावरण के नुकसान एंव प्रदूषण बढ़ने से महामारी के रूप बन रहा है। विष्व आज होम्योपैथी की ओर देख रहा है जो उपचारात्मक दृष्टिकोण की बजाय रोगी के पृष्ठभूमि को जानकार जैसे रोगी किस रोग से भविश्य मे ग्रसित हो सकता है आदि को आधार बना कर रोगों से बचाव मे मदद करता है। उन्होनें कहा कि विंडो पीरियड इस पक्रिया को अपनाने और होम्योपैथी दवाओं के बचाव उपाय पर कार्य करने का सही समय है। उन्होनें कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर स्तन कैंसर एंव प्रोस्ट्रेट कैंसर पर चार होम्योपैथी दवाओं के प्रबल संयोजन के साथ मिलकर शोध किया जा रहा है। केंद्रीय होम्योपैथी संस्थान के महानिदेषक, डा आर के मनचंदा ने संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के वक्त से भारत संक्रामक रोगों से लड़ रहा है लेकिन जनसंख्या बढ़ने के साथ असंक्रामक रोगों ने देष में रोगों की संख्या दोगुनी कर दी है। उन्होने कहा कि हर उम्र के व्यक्ति असंक्रामक रोगों की चपेट मे आ सकते है। साउथ इस्ट एशिया में लगभग 60 प्रतिषत मृत्यु अंसक्रामक रोगों के कारण होती और पूरे विश्व में 47 प्रतिशत मृत्यु इसके कारण होती है। डा मनचंदा ने कहा कि अंसक्रामक रोग की प्रकृति पुरानी होती है। अगर कोई व्यक्ति असंक्रामक रोगों से ग्रस्त हो जाता है तो होम्योपैथी में क्षमता है कि व्यक्ति का कभी एड आॅन एंव कभी स्टैंड एलोन उपाय से इलाज किया जाता है। उन्होनें कहा कि उन्हें आषा है कि यह दो दिवसीय सम्मेलन में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक, होम्योपैथी चिकित्सक, षोधार्थि, अकादमिक, एवं वैज्ञानिकों एक साथ मिलकर असंक्रामक रोग के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे। एमिटी विश्वविद्यालय के हेल्थ एंड एलाइड सांइस के डीन डा बी सी दास ने संबोधित करते हुए कहा कि औसत जीवन में वृद्धि एंव आबादी की बढ़ती उम्र के साथ असंक्रामक रोग जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कर्क रोग इत्यादी का भारत में बढ़ रहे है। पहले साधारण तौर पर होम्योपैथी का उपयोग सर्दी खांसी के इलाज के लिए होता था लेकिन वर्तमान समय में होम्योपैथी का उपयोग असंक्रामक रोगों के इलाज मे होने लगा है जिसमें उन्होनें जोड़ते हुए
कहा कि होम्योपैथी दवाओं को सबसे बडा लाभ यह है कि इनका कोई दुष्परिणाम नही है। यह दो दिन का सम्मेलन शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और हम सभी के लिए कई अवसर एंव शोध के विषय प्रदान करेगा जिससे असंक्रामक रोगों के क्षेत्र में ज्ञान के नये आयाम स्थापित होगें। तकनीकी सत्र के अंर्तगत प्रथम सत्र में केद्रींय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद की वैज्ञानिक डा (श्रीमती) प्रवीन ओबेरॉय ने स्कोप एंड लिमिटेशन आॅफ इंटीगेशन आॅफ होम्योपैथी इन लाइफस्टाइल डिसआर्डर पर व्याख्यान देते हुए कहा कि जीवनशैली का अर्थ जिस तरह जीवन हम जीते है। जीवनशैली संबंधी विकार, सभ्यता का रोग है जो लोगों या व्यक्ति के जीवन जीने से जुड़ा है जिसकी जीवनशैली मे परिवर्तन करके संभावित रोकथाम की जा सकती है। 10 प्रमुख जीवनषैली रोग जैसे हदय संबधि रोग, फेफड़ों के रोग, अवसाद, अस्थमा, मधुमेह, वृक्कीय विफलता, मोटापा, गठिया, कर्क रोग, हड्डी रोग आदि है। विष्व स्वास्थय संगठन के अनुसार स्न 2020 जीवनशैली रोग के कारण भारत में 7.63 मिलियन लोग मधुमेह की चपेट मे होगें। डा ओबेरॉय ने कहा कि स्वस्थ खानपान, तंबाकू को मना एंव शारीरिक रूप से सक्रिय जीवन से जीवनशैली रोगों से बचा जा सकता है। इस तकनीकी सत्र में डा वी के खन्ना एंव डा बी एस माथुर उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह के समापन पर डा डीपी रस्तोगी केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा योगेन्द्र राय ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।


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