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एमिटी विश्वविद्यालय में अफ्रीकी अभ्यर्थियों का पांच दवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

एमिटी विश्वविद्यालय में अफ्रीकी अभ्यर्थियों का पांच दवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
नौ देशों के पंद्रह अभ्यर्थियों ने लिया प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा
नोएडा (अनिल दुबे)। एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश के सर रिर्चड रॉर्बट सेंटर फॉर जेनेटिकली मॉडिफाइड आॅरगेनिस्म एंव भारत सरकार के विदेश मंत्रालय एंव बायोटेक कंसोरियम इंडिया लिमिटेड के सहयोग से अफ्रीकन अभ्यर्थियों हेतु वायरस इंडक्सींग एंड जेनेटिक फिडेलिटी टेस्टींग आॅफ टिषू कल्चर प्लांट पर इंडो – अफ्रीकन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें  विभिन्न  नौ  अफ्रीकी  देश  जैसे  इथोपिया,  केन्या,  मालावी,  नाइजिरिया,  सोमालिया, सुडान, साउथ सुडान, जोंबिया एंव इरटेरिया से 15 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया है। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का षुभारंभ बायोटेक कंसोरियम इंडिया लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर डा शिव कांत शुक्ला, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा. डब्लू सेल्वामूर्ती, एमिटी इंटरनेशनल सेंटर फॉर पोस्ट होर्वेस्ट टेक्नोलॉजी एंड कोल्ड चेन मैनेजमेंट के चेयरमैन डा सुनिल सर्न ने किया। बायोटेक कंसोरियम इंडिया लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर डा शिव कांत शुक्ला ने अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा पौध विज्ञान के कई क्षेत्रों में शोध कार्य किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होगा जिसमें आपकों एलाइजा, पीसीआर, मारकेरस एंव टिशू प्लांट की जानकारी सहित प्रसिद्ध वैज्ञानिकों एंव शोधार्थियों द्वारा व्याख्यान भी दिया जायेगा। डा शुक्ला ने कहा कि वायरस इंडक्सींग इस बात को सुनिश्चित करता है कि आपके कल्चर में वायरस ना हो और अब हम प्रत्येक पौध को क्यूआर कोड लेबल्ड के साथ विकसित करने का प्रयास कर रहे है। हमे विश्वास है कि इस प्रषिक्षण कार्यक्रम में आपको वायरस से पौधों की सुरक्षा के अलावा संबधित क्षेत्र की आधुनिक जानकारी भी प्राप्त होगी। एमिटी  सांइस  टेक्नोलॉजी  इनोवेशन  फांउडेशन  के अध्यक्ष  डा डब्लू  सेल्वामूर्ती ने अतिथियों एंव अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आपसी सहभागीता बढ़ाने हेतु ज्ञान को अन्य देशों के साथ साझा किया जाये। उन्होनें कहा कि इंडो अफ्रीकन संबंध अपने चरम पर है और भारत सरकार, भारत एंव अफ्रीका के रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने हेतु कार्य कर रहा है। डा सेल्वामूर्ती ने कहा कि एमिटी सदैव प्रशिक्षण कार्यक्रम के अभ्यर्थियों के साथ मिलकर कार्य करने एंव लोगों से जुड़कर कार्य करने में विश्वास रखता है। उन्होनें टिशु कल्चर, डीएनए आइसोलेषन एंव अन्य उपयोग के बारे में भी बताया। डा सेल्वामूर्ती ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि स्वस्थ पौधे चाहे वो दाल हो या  फल के बीज की प्रारंभ से सुरक्षा की जाये और  जीएमओ उनकी  सुरक्षा  को सुनिश्चत करता है। इस  अवसर  पर  डा  आभा  अग्नीहोत्री  ने सर  रिर्चड  रॉर्बट  सेंटर  फॉर  जेनेटिकली मॉडिफाइड आॅरगेनिस्म के बारे में विस्तृत जानकारी भी प्रदान की ।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के तकनीकी सत्र के अंर्तगत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के डा विरेंद्र कुमार बरनवाल ने एडवांसमेंट इन वायरस इंडेक्सींग आॅफ टिशु कल्चर पांइट पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वायरस कई आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों पर भी प्रभाव डालता है और इसका प्रभाव फलों या सब्जियों  करना पड़ता है। डा बरनवाल ने कहा कि पहले हम बायोएसेस एंव इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप का उपयोग निदान पद्धति के लिए करते थे उसके उपरांत इएलआईएसए एंव पीासीआर का उपयोग प्रांरभ हुआ। एंटीबाडी एंव एंटीजेन के मध्य के इंटरेक्षन के अध्ययन को इएलआईएसए कहते है। उन्होने अभ्यर्थियों को अन्य बृहद जानकारी भी प्रदान की।  इस अवसर पर कार्यक्रम के समापन में डा सुषमिता शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और कार्यक्रम में एमिटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एंव शोधार्थि भी उपस्थित थे।
 

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