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एमिटी विवि में सकारात्मक मनोविज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

एमिटी विवि में सकारात्मक मनोविज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

सकारात्मक नजरिया अपनाने से मिलेगी जीवन में सफलता

ग्वालियर (सुनील)। एमिटी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा एवीएसएम (रिटायर्ड) ने कहा है कि जीवन में सकारात्मक नजरिया अपनाया जाना चाहिए। इस नजरिये का बहुत महत्व है। सकारात्मक सोच विकास की ओर ले जाती है, जबकि नकारात्मक सोच हमें पीछे ले जाती है। वे एमिटी के सभागार में शुक्रवार को शुरू हुई ‘सकारात्मक मनोविज्ञान: मुद्दे व चुनौतियां’ एनएसपीपी-२०१८ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को  संबोधित कर रहे थे।

लेफ्टिनेंट जनरल वीके शर्मा ने कहा कि व्यक्तित्व विकास की दिशा में सकारात्मक मनोविज्ञान की अहम भूमिका है। सकारात्मक मनोविज्ञान वह पहली सीढ़ी है जो हमारा साक्षात्कार खुद से कराती है। स्वयं को जानना सबसे बड़ी कला है। उन्होंने प्रसन्नता के मापदंड, आशावादी सोच और कार्यनिष्ठ बनने में सकारात्मक मनोविज्ञान के अनेक प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ठंडे मौसम और लंबी सर्दियों वाला देश फिनलैंड अब दुनिया का सबसे खुश देश बन चुका है। यह बात संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट कह रही है। वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के मुताबिक 156 देशों की लिस्ट में सबसे ऊंचे पायदान पर नॉर्डिक राष्ट्र  हैं। इस रिपोर्ट में जीवन प्रत्याशा, सामाजिक समर्थन, सामाजिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों से देश की प्रसन्नता का आंकलन किया गया।   रिपोर्ट में फिनलैंड सबसे सुखी जगह के रूप में उभरा। बावजूद इसके कि यहां सूरज बहुत कम निकलता है और यहां का तापमान भी काफी कम रहता है जो कि डिप्रेशन होने के उत्तरदायी कारणों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि बीते साल की रिपोर्ट के मुताबिक पहले फिनलैंड पांचवें स्थान पर था लेकिन इस बार वह पहले पायदान पर आ गया है। वहीँ अगर भारत की बात की जाए तो रिपोर्ट में भारत का स्थान 133वां है जबकि खुश रहने के मामले में आतंकी देश पाकिस्तान और गरीब देश नेपाल भारत से आगे निकल चुके हैं।

इस अवसर पर संगोष्ठी के मुख्य अतिथि महात्मा गाँधी हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति डा. गिरीश्वर मिश्रा ने सकारात्मक मनोविज्ञान में प्रसन्नता की महत्ता पर बताया कि प्रसन्नता के मापन के क्षेत्र में अधिक शोध करने की आवश्यकता है वहीँ भविष्य में स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने की योजना पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य, जीवन में अपरिचित दबावों, संवेगात्मक नियमन, आशावादिता सहित अन्य मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं में सकारात्मक मनोविज्ञान की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

विशिष्ठ अतिथि एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक की प्रो.(डॉ.) प्रोमिला बत्रा ने कहा कि मनोवैज्ञानिक अनेक शोध कर मानव की दशा और दिशा ठीक करने में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि कैसे प्रसन्न, आशावादी रहकर हमें कार्यनिष्ठ बनाने में सकारात्मक मनोविज्ञान अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक मनोविज्ञान नियमित जीवन और स्वस्थ मानसिकता पर जोर देता है। इस दौरान बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन के लिए रूपल शर्मा और पोस्टर प्रेजेंटेशन के लिए प्रतिभागियों को पुरुस्कृत किया गया। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से आमंत्रित वक्ता डॉ. उमेद सिंह कहा कि भविष्य में स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने की योजना है। इससे काउंसलर तैयार करने में मदद मिलेगी। समापन सत्र की मुख्य अतिथि डॉ. निशा मिश्रा वैज्ञानिक डीआरडीओ नई दिल्ली ने कहा कि सकारात्मक मनोविज्ञान का महत्व अब सर्वत्र स्वीकारा जाने लगा है। इस विषय के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जो एक सकारात्मक पहलू है। समापन सत्र के अवसर पर डा. दीपा पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर एमिटी के प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ एमपी कौशिक रजिस्ट्रार राजेश जैन सहित सभी प्राध्यापकगण और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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