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एमिटी में ‘महिला आरक्षण विधेयक पर परिचर्चा का आयोजन

एमिटी में ‘महिला आरक्षण विधेयक  पर परिचर्चा का आयोजन
नोएडा (अनिल दुबे)। एमिटी विश्वविद्यालय सेक्टर 125 नोएडा में किया गया। जिसका शुभारंभ सेंटर फॉर सोशल रिर्सच की निदेशिका डा रंजना कुमारी, प्रख्यात पत्रकार एंव पूर्व राज्यसभा सांसद एच के दुआ, दिल्ली यूनीवर्सीटी अकादमिक एंड पावरफुल वॉइस ऑन वूमेन राइटस की प्रो विजयालक्ष्मी नंदा, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन की एन्नी राजा, कलेक्टीव विलेज ऑफ प्रधान सुश्री विमलेश शर्मा एंव
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सांइस की निदेशिका डा निरूपमा प्रकाश ने किया। कार्यकम की अध्यक्षता संयुक्त महिला कार्यक्रम की डा ज्योत्स्ना चटर्जी ने की। संयुक्त महिला कार्यक्रम की डा ज्योत्स्ना चटर्जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देष के संविधान मे हम सभी के समान अधिकार की बात लिखी है। इसके बावजूद कई बार कई फैसले महिलाओं के हक में या उनके पक्ष में नही होते। महिलाओं को भी अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लडऩी पड़ती है। संसद एंव विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या कम है क्योकी महिला आरक्षण विधेयक जैसे मुद्दों को गंभीरता से नही लिया जाता। हमें युवाओं के सहयोग की आवष्यकता है जिससे समान अधिकार प्राप्त हो सके।
नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन की सुश्री एन्नी राजा ने संबोधित करते हुए कहा कि संसद में केवल 12 प्रतिशत महिलाएं है। 20 साल से महिला आरक्षण विधेयक हेतु संघर्ष कर रहे है। आज काफी सारी राजनितिक पार्टिया हमें सहयोग दे रही है। कई पार्टीयां जिन्होंने अपने चुनावी मुद्दों में लिखा और कहा था कि सरकार बनते ही महिला आरक्षण विधेयक पास किया जायेगा आज वो कहते है कि सर्वसम्मती चाहिए। महिला आरक्षण विधेयक हेतु सोच एंव राजनितिक इच्छाशक्ती का होना आवश्यक है। देश की आधी आबादी के हक हेतु यह विधेयक पास होना आवश्यक है। उन्होनें कहा कि जैसे निर्भया केस पर युवाओं, बजुर्गो एंव सभी ने मिलकर आवाज उठाई थी उसी तरह महिला आरक्षण विधेयक हेतु एक जनआंदोलन की आवष्यकता है।
डा रंजना कुमारी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में महिलाओं का अहम योगदान है। उन्होने बताया कि पुरुषों से अधिक महिलाएं मतदान देती है इसका अर्थ यह है कि महिलाओं का झुकाव राजनीति की ओर अधिक है। यह बेहद दुख कि बात है कि भारत को हमेशा सामाजिक सूचक में पीछे का स्थान प्राप्त हुआ है और अब देश महिलाओं को बराबरी का विकास का हक देने मे भी पीछे हो रहा है। अगर आप विश्व में सर उठाकर यह बताना चाहते है कि हमारे देश ने महिलाओं को संसद मे बराबरी का हक दिया है तो महिला आरक्षण विधेयक का पास होना जरूरी है। प्रख्यात पत्रकार एंव पूर्व राज्यसभा सांसद एच के दुआ ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक स्न 1996 में संसद में रखा गया और देश में पचास प्रतिषत महिलाओं की मौजूदगी के बावजूद अब तक पास नही हो पाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को पास कराने हेतु एक राष्ट्रीय जन जागरण की आवश्यकता है जिससे हम गांव, पंचायत, शहर, नगर के हर व्यक्ती का जागरूक किया जा
सके । एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सांइस की निदेशिका डा निरूपमा प्रकाश ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विकास हेतु महिलाओं का राजनितिक क्षेत्र में बराबरी की भागीदारी आवश्यक है। उन्होने कहा कि युवाओं को आगे आकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। एमिटी में हम सदैव छात्रों को उनके समाजिक एंव नैतिक जिम्मेदारीयों हेतु आगे बढऩे के लिए जागरूक करते है। इस अवसर पर सुश्री षषी, प्रो विजयालक्ष्मी नंदा, सुश्री विमलेश शर्मा एंव संयुक्त महिला कार्यक्रम की सुश्री पद्मिनी कुमार ने अपने विचार रखे।

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