शिक्षा/टेक्नालाजी समाचार

एमिटी में नैनो टेक्नोलॉजी: अपषिष्ट जल प्रबंधन का स्थायी समाधान पर सेमिनार का आयोजन

नोएडा (अकांक्षा)। एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी द्वारा नैनोटेक्नोलॉजी: अपषिष्ट जल प्रबंधन का स्थायी समाधान पर सेमिनार का आयोजन एमिटी विश्वविद्यालय सैक्टर 125 नोएडा में किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के सलाहकार श्री आर एन सिंह, आईआईटी दिल्ली के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर नीरज खरे, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी के निदेषक प्रोफेसर डी के अवस्थी ने पारंपरीक दीप जलाकर किया।
राष्ट्रीय मिशन के सलाहकार आर एन सिंह ने कहा कि आज के समय में गंगा सबसे प्रदूषित नदी है वही दुसरी ओर गंगा को आत्म सफाई गुणता के लिए जाना जाता है। आज भी गंगा में जरूरत से अधिक ऑक्सीजन की मात्रा पाई जा रही है, गंगा की गति एंव प्रवाह इस प्रकार से है कि उसकी सफाई अपने आप ही हो जाती थी लेकिन अधिक गंदगी के कारण यह समस्या भी हल नही हो पा रही है। देखा जाए तो गंगा की सफाई के लिए बड़ी योजना एंव परियोजना की आवश्यकता नहीं है इसके लिए केवल छोटे कदम जैसे गंगा में कोई समान एंव गंदगी न डाले। नैनो लेवल के प्रयोग से थेम्स नदी की सफाई के लिए ब्रिटेन को लगभग 60 साल लग गए क्योकि थेम्स नदी की गति नही है। जब से 1985 के बाद से गंगा सफाई परियोजना प्रारंभ हुई है तब से गंगा अधिक प्रदूषित हो गई है।


एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ रीनूअबल एंड ऑल्टर्नटिव एन्र्जी के प्रोफेसर वी के जैन ने अपने द्वारा तैयार किए गए पॉकेट फ्रेंडली वॉटर प्यूरीफायर के बारे में बताया। गंगा का पानी वर्षो तक साफ रहता है। अध्ययन में पाया गया कि गंगा जहां से निकलती है, वहां पत्थरों में छोटे छोटे छेद है जिसका पानी को शुद्ध रखने में बड़ो योगदान है। ठीक उसी प्रकार सबसे पहले हमने पत्थरों को छोटे छोटे टुकड़ो में केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए पोर्स बनाए। इसमें नैनो सिल्वर फिक्स कर दिया है जो न सिर्फ बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता है बलकि उसे मारता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *