एमिटी द्वारा गेंहूँ प्रथम पंक्ति प्रदर्शन का आयोजन

एमिटी द्वारा गेंहूँ प्रथम पंक्ति प्रदर्शन का आयोजन

नोएडा (विशारद टाइम्स)। विश्व में भारत सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है जिसकी सवा सौ करोड़ आबादी की खाद्यान्न आपूर्ति करना एक चुनौती है। दूसरी तरफ खेती की जमीन का क्षेत्रफल प्रतिदिन घटता जा रहा है। जिसका प्रमुख कारण बढ़ती जनसंख्या के परिणामस्वरूप शहरीकरण और औद्योगीकरण है जिसके फलस्वरूप बढ़ती जनसंख्या का पेट भरना एक विकट समस्या है। इसलिए अधिकतम उत्पादन देने वाली प्रजातियों के उत्पादन के प्रति जागरूक करने हेतु एमिटी विष्वविद्यालय एंव आई.सी.ए.आर.-भारतीय गेंहूँ और जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के सहयोग से दादरी ब्लॉक के गाँव आँकलपुर और बिसरख ब्लॉक के गाँव दुरियाई से किसानों हेतु गेहॅू प्रथम पंक्ति प्रदर्षन का आयोजन किया गया जिसमें 25 किसानों ने भाग लिया।  एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र के निदेशक डा एन पी सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि गेंहूँ प्रथम पंक्ति प्रदर्शन के लिए दादरी ब्लॉक के गाँव आँकलपुर और बिसरख ब्लॉक के गाँव दुरियाई से किसानों का चयन किया और किसानों के प्रक्षेत्र पर गेंहूँ की नवीनतम प्रजाति एच.डी. 3086 और एच.पी.डब्लू.बी. 01 व एच.पी.डब्लू.बी. 02 के प्रदर्शन लगवाये गये। जिनमें एच.पी.डब्लू.बी. 01 और एच.पी.डब्लू.बी. 02 दोनों ही प्रजातियाँ जिंक प्लस है। इन प्रजातियों में 42 पी.पी.एम. तक जिंक व 38 . 40 पी.पी.एम आयरन होता है जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते है इसलिए पोषकता के लिए किसान एच.पी.डब्लू.बी – 01 एंव एच.पी.डब्लू.बी – 02 को लगायें। इस कार्यक्रम में एमिटी के कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसान के प्रक्षेत्रों पर जाकर गेंहूँ की फसल का निरीक्षण किया और किसानों से उनकी प्रतिक्रिया भी ली।   डा0एन.पी.सिंह ने बताया कि गेंहूँ की तीनों प्रजातियाँ नवीनतम है। किसान इन्हें बाजार में न बेचकर खाने के उपयोग में लाये जो कि स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा। इन प्रजातियों का प्रसार करे और अन्य किसानों के खेतों में भी लगवाये और किसान इनका उपयोग 3 वर्ष तक बीज के लिए कर सकते है।  किसानों ने बताया कि गेंहूँ की फसल बहुत अच्छी है। फसल में टिलरिंग व बाली भी बढ़िया हुई है। जिससे गेंहँू की पैदावार 50 .52 कुन्तल प्रति हैक्टेयर तक प्राप्त हो सकती है। किसानों ने एमिटी विश्वविद्यालय का आभार प्रकट किया और आग्रह किया कि इस प्रकार के कार्य आगे भी भविष्य में किसानों के लिए करते रहे।

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