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एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र द्वारा सरसों के प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन

एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र द्वारा सरसों के प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन

नोएडा (अनिल दुबे)। देश के कई भाग ऐसे भी है जहाँ का पानी पीने योग्य नहीं है। जिससे फसल उत्पादन नहीं हो सकता है। ऐसे पानी से प्रभावित क्षेत्र राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली एवं एनसीआर का नजफगढ़ क्षेत्र है। जिसका 32.82 प्रतिशत तक पानी खारा है। इस तरह के हालात में फसल लेना किसानों के लिये एक बड़ी चुनौती है। बढ़ती हुई जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगिकरण के कारण पानी की खपत बढ़ने से एवं भूमि का जल स्तर दिन प्रतिदिन काफी गिरता जा रहा है जिसके फलस्वरूप मीठे पानी की कमी हो रही है। आने वाले कुछ वर्षों में पानी की इतनी कमी हो जायेगी कि फसल उगाने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पायेगा। इसी क्रम में आई.सी.ए.आर.-सरसों अनुसंधान संस्थान, सेवर, भरतपुर राजस्थान ने एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र, नोएडा को सरसों के प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कराने के लिए चयनित किया गया। एमिटी विश्वविद्यालय के कृषि प्रसार सेवा केन्द्र के निदेषक डा0एन.पी.सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्य को नजफगढ़ क्षेत्र के ईसापुर गाँव में एवं एमिटी शोध फार्म पर किसानों की सहभागिता से सफलतापूर्वक 10 एकड़ पर प्रक्षेत्र प्रदर्शन कराया गया। इस कार्य में किसानों के खेत की मिट्टी एवं पानी की जाँच (मृदा प्रयोगशाला) में कराई गई जिसमें पाया गया कि पानी की विद्युत चालकता 7 . 7ण्5 के बीच में पाया गया एवं मिट्टी का पी.एच 8ण्5 रहा। सी.एस.एस.आर.आई. करनाल से  सरसों की लवण सहनशील प्रजनक प्रजातियाँ सी.एस.-56, सी.एस.-58 बीज लाकर किसानों को दी गई। किसानों के अलावा एमिटी के ईसापुर फार्म पर भी प्रदर्शन कराया गया। बुवाई से पहले खेत में एक सिंचाई मीठे पानी द्वारा की गयी और समय-समय पर फसल का निरीक्षण किया गया जिसके फलस्वरूप  सरसों का जमाव एवं पौधों का विकास काफी अच्छा रहा। सरसों बोने के पश्चात दो सिंचाई खारे पानी द्वारा फूल एवं दाना बनने के समय दिया गया।  किसानों ने बताया की खारे पानी में सरसों की उपज सामान्य प्रजाति की अपेक्षा डेढ़ गुणा प्राप्त हुई है एवं 16 से 18 कुन्तल प्रति हैक्टर तक उपज प्राप्त हुई है जिससे गेंहूँ के मुकाबले काफी मुनाफा मिला।  इसके अलावा नाबार्ड से स्वीकृत परियोजना के अन्तर्गत ग्राम कुन्हैडा, मतौर, चूड़ियाला एवं तलहेटा ब्लाक मुरादनगर एवं भोजपुर जिला गाजियाबाद के किसानों के ऊसर प्रक्षेत्र पर इन प्रजातियों का प्रदर्शन कराया गया। जिससे उपज डेढ़ से दो गुना प्राप्त हुई। सरसों की पैदावार 20.25 कुन्तल प्रति हैक्टर तक प्राप्त हुई। खारे पानी से फसलों की खेती पर एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र के निदेशक  डा0एन.पी.सिंह ने किसानों को सुझाव दिया कि रबी मौसम में सरसों की खेती करे जिसमें लागत कम आती है व यह एक नकदी फसल है जिसका बाजार में उचित मूल्य मिल जाता है जिससे कि किसानों को 30000 .35000 तक आमदनी प्राप्त हो जाती है। इस अवसर पर किसानों ने एमिटी कृषि प्रसार सेवा केन्द्र को धन्यवाद दिया।

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